भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को यहां पुलिस थाने के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के धरने को सुर्खियों में बने रहने के लिए किया गया ‘‘कैमराजीवी’’ नाटक करार दिया। भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि यह ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश थी। सत्तारूढ़ पार्टी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता पर संसद मार्ग थाना परिसर स्थित पुलिस उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना देकर ‘‘ओछी और अराजक राजनीति’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि उनका उद्देश्य न्याय या जांच की मांग करना नहीं था, बल्कि हंगामा खड़ा करना और कानून-व्यवस्था को चुनौती देना था।
गांधी, 20 जुलाई को छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के छर्रों से घायल हुए युवक के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए शुक्रवार को संसद मार्ग थाना परिसर स्थित पुलिस उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज किए जाने के बाद धरना समाप्त हुआ। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि गांधी का धरना न तो छात्रों के लिए था और न ही न्याय के लिए, बल्कि यह कांग्रेस की ‘‘राजनीतिक हताशा’’ को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज पूरे देश ने एक बार फिर राहुल गांधी की ओछी और ध्यान भटकाने वाली राजनीति देखी, जिसका प्रदर्शन उन्होंने संसद मार्ग थाने के बाहर किया।”
नड्डा ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘राहुल गांधी का यह विरोध प्रदर्शन न तो छात्रों के लिए है और न ही न्याय के लिए; यह कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक हताशा और फुटेज के लिए राहुल गांधी की भूख है।’’
नड्डा ने गांधी के विरोध प्रदर्शन को ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी राजनीतिक विवाद से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रगीत के मुद्दे पर कांग्रेस को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है और इसी मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए गांधी ने धरना दिया। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस के राष्ट्र-विरोधी चेहरे को छिपाने और अपनी किरकिरी से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए राहुल गांधी ने जल्दबाजी में यह नाटक किया।’’
उन्होंने सवाल उठाया कि जब उच्चतम न्यायालय पहले ही 20 जुलाई की घटना का संज्ञान ले चुका है और मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित कर चुका है, तो गांधी ने विरोध प्रदर्शन करने का फैसला क्यों किया। नड्डा ने कहा, ‘‘जब देश की सर्वोच्च अदालत इस मामले की जांच कर रही है, तो कैमरों के सामने पुलिस थाने के बाहर बैठकर राहुल गांधी आखिर क्या साबित करना चाहते हैं?
क्या विपक्ष के नेता का न्यायपालिका पर से भरोसा उठ गया है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘सच्चाई यह है कि राहुल गांधी यह ‘कैमराजीवी’ ड्रामा केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि देश संविधान, कानून और न्यायिक प्रक्रियाओं के अनुसार चलता है, न कि ‘‘एक परिवार की जिद’’ या “कैमरों के प्रति प्रेम” के अनुसार। नड्डा ने कहा, ‘‘लोग कांग्रेस से जवाब मांग रहे हैं और कांग्रेस को इसका जवाब देना होगा।’’
उन्होंने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा विपक्षी पार्टी से संसद में चर्चा में भाग लेने की अपील के बावजूद वह संसदीय बहस से बच रही है। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘आज पूरे देश में वंदे मातरम् के मुद्दे को लेकर कांग्रेस चारों तरफ से घिरी हुई है।
राष्ट्रगीत का अपमान करने के लिए लोग कांग्रेस से जवाब मांग रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, “कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता को तिरंगे की थीम वाला केक काटते हुए देखा गया। इस राष्ट्र-विरोधी चेहरे को छिपाने और अपनी भारी किरकिरी से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए राहुल गांधी ने जल्दबाजी में यह नाटक रचा।”
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद रविशंकर प्रसाद ने यहां संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि गांधी यह विरोध प्रदर्शन लोगों का ध्यान भटकाने के लिए कर रहे हैं, क्योंकि कांग्रेस को एहसास हो गया है कि ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर उसका रुख गलत था। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा आरोप है कि ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर अपने रुख को लेकर कांग्रेस घिर गई है और अब वह लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।’’
प्रसाद ने कहा कि गांधी ने बिना अनुमति या पूर्व सूचना के धरना दिया था।
उन्होंने कहा कि मामले की पहले से ही जांच की जा रही है और सवाल उठाया कि जब इस मामले की जांच की जा रही है, तब कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन करने का फैसला क्यों किया। उन्होंने कहा कि यह मामला इस प्रकरण के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति के समक्ष भी विचाराधीन है। प्रसाद ने कहा, ‘‘कांग्रेस अब राहुल गांधी की तुष्टीकरण की राजनीति से संचालित होने वाली पार्टी बन गई है।
