पटना, नौ सितंबर बिहार सरकार ने प्रशासनिक नियमों को सरल बनाने और व्यापार सुगमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘बिहार भवन निर्माण नियमावली-2026’ का प्रारूप तैयार कर लिया है, जिसके तहत कम जोखिम वाले भवनों के लिए स्व-प्रमाणन तथा मध्यम जोखिम वाले भवनों के लिए तृतीय पक्ष (थर्ड पार्टी) निरीक्षण की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। राज्य सरकार द्वारा बुधवार को जारी बयान के अनुसार, विनियमन में ढील (डीरेगुलेशन) के चरण 1.0 और 2.0 की प्रगति की समीक्षा के लिए भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव केके पाठक और बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की संयुक्त अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के बीच विभिन्न प्राथमिक क्षेत्रों में हुए सुधारों तथा उनके क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।
बयान के अनुसार, नई ‘बिहार भवन निर्माण नियमावली-2026’ का उद्देश्य भवन निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाना, व्यावसायिक भूखंडों के उपयोग से जुड़े प्रतिबंध कम करना और मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड यूज) विकास को बढ़ावा देना है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में व्यापार को गति देने के लिए बिहार विधानमंडल 23 जुलाई, 2026 को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) विधेयक पारित कर चुका है। इसके लागू होने पर उद्योगों को दोहरे लाइसेंस से राहत, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को स्व-घोषणा के आधार पर मंजूरी तथा अनावश्यक निरीक्षणों से संरक्षण मिलेगा।
बयान के मुताबिक, राज्य के सभी नियमों, अधिनियमों और सरकारी आदेशों के लिए ‘बिहार डॉट जीओवी डॉट इन’ पर केंद्रीकृत डिजिटल ‘रिपॉजिटरी पोर्टल’ 19 जून, 2026 से संचालित है, जिस पर अब तक 2,000 से अधिक दस्तावेज अपलोड किए जा चुके हैं। वहीं, लोक सेवा का अधिकार (आरटीपीएस) के तहत ‘स्वत:-अपील प्रणाली’ भी 23 जून, 2026 से लागू है। सरकार ने कहा कि भूमि एवं पर्यावरण सुधारों के तहत किसानों और भूमि मालिकों को राहत देने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की अनिवार्यता समाप्त करने पर सहमति बनी है।
इसके अलावा बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को तेज करने तथा निजी विद्यालयों के लिए न्यूनतम भूमि की अनिवार्यता समाप्त करने जैसे कदम भी उठाए गए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में एकीकृत स्वास्थ्य लाइसेंसिंग पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति शीघ्र निविदा जारी करेगी। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन नीति-2026 के तहत नियमों को भी सरल बनाया गया है।
बैठक में उद्योग, नगर विकास, राजस्व एवं भूमि सुधार, गृह, स्वास्थ्य तथा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में लागू किए जा रहे सुधारों की प्रगति से अवगत कराया।
