राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के एक सरकारी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान दलित समुदाय के दो लोगों के साथ जाति-आधारित दुर्व्यवहार करने और उन्हें कुर्सी से उठकर जमीन पर बैठने के लिए मजबूर करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने बताया कि इस आरोप में पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और जांच की जा रही है। यह कथित घटना 15 अगस्त को बागोर थाने के भाखलिया गांव स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुई।
पुलिस ने बताया कि भाखलिया गांव के अनुसूचित जाति समुदाय के रामेश्वरलाल बैरवा और गोपीलाल बैरवा की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी के अनुसार परिवादी गांव के सरकारी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में अपने समुदाय के अन्य लोगों के साथ कुर्सियों पर बैठे थे। तभी पांच लोग उनके पास आए और जाति-सूचक शब्दों का इस्तेमाल करके उन्हें अपशब्द कहे और उनके कुर्सियों पर बैठने पर आपत्ति जताई।
प्राथमिकी में नामजद आरोपियों में इसी गांव के रहने वाले बालू वैष्णव, हीरालाल शर्मा, नारायण जाट, रामेश्वर जाट और प्रकाश जाट का नाम शामिल है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आरोपियों ने उनसे जमीन पर बैठने को कहा। उनसे कहा गया कि वे उनके साथ कुर्सियों पर कैसे बैठ सकते हैं।
प्राथमिकी के अनुसार जब शिकायतकर्ताओं ने कुर्सियां खाली करने से इनकार कर दिया तो आरोपियों ने उन्हें डराया-धमकाया और जबरदस्ती कुर्सियों से उठा दिया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह घटना स्कूली बच्चों, शिक्षकों और अन्य ग्रामीणों की मौजूदगी में हुई और इससे उन्हें अपमान और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। शिकायतकर्ताओं के अनुसार आरोपियों ने यह धमकी भी दी कि स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर दिया जाएगा क्योंकि अनुसूचित जाति समुदाय की दो महिलाएं वहां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के तौर पर काम कर रही थीं।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच का जिम्मा पुलिस उपाधीक्षक राहुल जोशी को सौंपा गया है। पुलिस ने बताया कि आगे की जांच जारी है।
