योग गुरु बाबा रामदेव ने शनिवार को नरेन्द्र मोदी सरकार को शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने जल्द ही इस ‘घपले’ को ठीक नहीं किया, तो यह आंदोलन और तेज हो सकता है और उन्हें भी दोबारा विरोध करना पड़ सकता है। रामदेव ने ‘जेन जी’ से हिंसा और कानून-व्यवस्था तोड़ने वाली गतिविधियों में शामिल न होने की अपील की और कहा कि विरोध-प्रदर्शन संविधान के दायरे में रहकर ही किए जाने चाहिए।
यहां ‘पतंजलि योगपीठ’ में 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संवाददाताओं से बात करते हुए रामदेव ने कहा कि छात्र स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर विरोध कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों में चयन प्रक्रिया पर ‘‘भ्रष्टाचार और धन बल’’ का असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘देश में हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है।
बच्चे शिकायत कर रहे हैं कि उनके स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। कुछ जगहों पर नकल हो रही है, तो कहीं प्रश्न पत्र लीक हो रहे हैं।’’
योग गुरु ने कहा, ‘‘सरकारी नौकरी के साक्षात्कार में 99 प्रतिशत तक भ्रष्टाचार होता है।
जाति और धर्म के आधार पर चयन किया जा रहा है। यह बहुत गलत और संविधान के खिलाफ है।’’
रामदेव ने कहा, ‘‘एक तरफ हम ‘सत्यमेव जयते’ और ‘यतो धर्मस्ततो जय:’ की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने के बाद ही भर्तियां हो रही हैं। अगर हर कोई विरोध करने लगे, तो देश कैसे चलेगा?
इसलिए, अपना तरीका सुधारें; वरना आंदोलन और तेज हो जाएगा।’’
योग गुरु ने कहा कि सरकार को इन समस्याओं को तुरंत ठीक करना चाहिए, वरना वह भी विरोध शुरू कर देंगे। उन्होंने चेतावनी दी, ‘‘मैं विरोध प्रदर्शन की आड़ में अराजकता और कानून-व्यवस्था तोड़ने का समर्थन नहीं करता। लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि देश में बहुत सारे घपले हो रहे हैं।
कृपया इसे ठीक करें, वरना बाबा रामदेव को फिर से विरोध करना पड़ेगा।’’
योग गुरु 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के खिलाफ किए गए अपने पुराने विरोध प्रदर्शन का जिक्र कर रहे थे। रामदेव ने कहा, ‘‘हमें पूरे देश में नफरत की सभी दीवारों को गिराना होगा। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर, आइए हम ‘बांटो और राज करो’ की नीति को खत्म करने का संकल्प लें।
