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Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की माने तो चिकनगुनिया अब विकराल रुप लेता जा रहा है। एक मोटे अनुमान के अनुसार आने वाले समय में पांच अरब लोगों के इसके दायरें में आने की पूरी पूरी संभावना है। हांलाकि चिकनगुनिया से मौत का आंकड़ा प्रभावितों में से केवल एक प्रतिशत है पर जिस तरह से इसके फैलने की संभावनाएं बनती जा रही है निश्चित रुप से मौत का आंकड़ा भी बढ़ेगा और लाख दावों के बावजूद इसके स्वास्थ्य पर दूरगामी गंभीर प्रभाव भी पड़ेगा। चिकनगुनिया की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि उष्णकटिबंधीय अफ्रीका से एशिया को लपेटे में…
टीएमजेड स्पोर्ट्स को पता चला है कि कुश्ती के दिग्गज हल्क होगन का 71 साल की उम्र में निधन हो गया है। गुरुवार सुबह-सुबह WWE के दिग्गज हल्क होगन के क्लियरवॉटर, फ्लोरिडा स्थित घर पर डॉक्टरों को भेजा गया… और डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें “कार्डियक अरेस्ट” हुआ था। होगन के घर के बाहर के एक वीडियो में, एम्बुलेंस में ले जाए जा रहे होगन की जान बचाने के लिए बचावकर्मी बेताब दिखाई दे रहे हैं।कुश्ती के दिग्गज और पॉप संस्कृति के प्रतीक हल्क होगन के निधन ने न केवल पेशेवर कुश्ती जगत को झकझोर कर रख दिया। 80 और…
भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की अंतिम स्वीकृति ने न केवल वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है, बल्कि भारत के आर्थिक भविष्य को भी एक नई दिशा दी है। दोनों देशों के बीच आखिरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होने का फायदा दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मिलेगा। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से संरक्षणवाद बढ़ा है, उसमें ऐसे व्यापार समझौतों की भूमिका और भी अहम हो जाती है। इस समझौते से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न केवल अमेरिका बल्कि अन्य देशों को भी भारत की मजबूत होती स्थिति का आइना दिखाया है, जो…
हर महिला खूबसूरत दिखना चाहती हैं, जिसके लिए वह काफी प्रयास भी करती हैं। डस्की स्किन को खूबसूरत बनाने के लिए महिलाएं महंगे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। अगर आपकी स्किन भी डस्की है, तो आप भी अपने चेहरे को खूबसूरती में चार चांद लगाने के लिए मेकअप करती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको ब्यूटी एक्सपर्ट की मदद से कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं। जिनका इस्तेमाल करने से आप आसानी से डस्की स्किन को खूबसूरत बना सकती हैं। हम आपको डस्की स्किन पर मेकअप करने के लिए आप कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।सही…
हाल ही में भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) केंद्र में सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अंतरराष्ट्रीय मायने बेहद अहम हैं, क्योंकि इसका फायदा दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मिलेगा। इस प्रकार भारत और ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से आने वाले वर्षों में दूरगामी वैश्विक असर भी देखने को मिलेंगे।यह कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिका प्रेरित भूमंडलीकरण और निजीकरण की नीतियों पर आधारित मुक्त वैश्विक अर्थव्यवस्था के दौरान, पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से कारोबारी संरक्षणवाद बढ़ा है, उसमें ऐसे व्यापार समझौतों की…
जब भी मानसून शुरू होता है, तो मार्केट में जामुन भी आने लगते हैं। गहरा बैंगनी रंग, खट्टा-मीठा स्वाद और हल्का सा कसैलापन लिए जामुन को नमक के साथ खाने में काफी मजा आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जामुन को स्टोर करके उससे कई सारी रेसिपीज भी बनती हैं। कुछ लोग जामुन का जैम, खट्टा-मीठा जूस और चटनी आदि ब्रेड से लेकर पराठे के साथ अच्छा लगता है। हालांकि कई लोग जामुन की चटनी बनाने में संकोच करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जामुन की चटनी खाने के स्वाद को दोगुना बढ़ा सकती है। ऐसे में…
एक बात साफ हो जानी चाहिए कि तकनीक मात्र उपकरण बनें तो यह मानवता के हित में नहीं हो सकती। ऐसे में तकनीक को जनकल्याण का माध्यम बनाना होगा। डिजिटल युग में बहुत कुछ बदला है। हमारे सोच का तरीका बदला है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में आज सामान्य मानव मन से भी अधिक तेजी से तकनीक काम करने लगी है। तकनीक ने इतना विकास कर लिया है कि अब मशीनें सोचने लगी है। हमारे चिंतन और मनन को प्रभावित करने लगी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि तकनीक ने जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रवेश करने के साथ…
पारंपरिक परिधानों में गोटा पट्टी का काम एक खास चमक और खूबसूरती जोड़ता है। जिस कारण महिलाओं के बीच गोटा वर्क वाले आउटफिट्स की जबरदस्त डिमांड रहती है। वहीं मार्केट में आपको गोटा पट्टी वर्क वाली साड़ियों की भरपूर वेराइटी देखने को मिल जाएगी। लेकिन गोटा पट्टी का यह वर्क अब सिर्फ साड़ियों तक ही सीमित नहीं है। बल्कि आजकल गोटा पट्टी ब्लाउज भी काफी ट्रेंड में हैं। यह ब्लाउज काफी आकर्षक और मनभावन होते हैं कि इनको एक ही नजर में खरीदने का मन करता है।लेकिन गोटा वर्क ब्लाउज को किस तरह की साड़ी के साथ पहनना चाहिए। यह…
‘हर छठा व्यक्ति अकेला है’-यह निष्कर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ताज़ा रिपोर्ट का है, जिसने पूरी दुनिया को चिन्ता में डाला है एवं सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हम कैसी समाज-संरचना कर रहे हैं, जो इंसान को अकेला बना रही है। निश्चित ही बढ़ता अकेलापन कोई साधारण सामाजिक, पारिवारिक एवं व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक ऐसा वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है, जो व्यक्तियों, समाजों, और व्यावसायिक संस्थानों को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। दुनिया के करोड़ों लोग टूटे रिश्तों व संवादहीनता की स्थितियों में नितांत खामोशी का जीवन जी रहे हैं।…
हमारे शरीर में जब भी किसी तरह की गड़बड़ी की शुरूआत होती है, तो कोई भी अंग ठीक से काम नहीं करता है। या फिर किसी भी न्यूट्रिशन और विटामिन की कमी होने लगती है। तो शरीर में इसके संकेत साफ नजर आते हैं। हालांकि अगर इन संकेतों को शुरूआत में ही समझ लिया जाए, तो आने वाले समय में बड़ी मुश्किल से बचा जा सकता है। पेट में गैस बनना, पाचन का कमजोर होना या ब्लोटिंग महसूस होना, नींद आने में मुश्किल, हमेशा कमजोरी, भूख न लगना, हाथ-पैरों में दर्द रहना या थकान महसूस होना आदि ऐसे लक्षण हैं,…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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