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Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
‘हर छठा व्यक्ति अकेला है’-यह निष्कर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ताज़ा रिपोर्ट का है, जिसने पूरी दुनिया को चिन्ता में डाला है एवं सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हम कैसी समाज-संरचना कर रहे हैं, जो इंसान को अकेला बना रही है। निश्चित ही बढ़ता अकेलापन कोई साधारण सामाजिक, पारिवारिक एवं व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक ऐसा वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है, जो व्यक्तियों, समाजों, और व्यावसायिक संस्थानों को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। दुनिया के करोड़ों लोग टूटे रिश्तों व संवादहीनता की स्थितियों में नितांत खामोशी का जीवन जी रहे हैं।…
हमारे शरीर में जब भी किसी तरह की गड़बड़ी की शुरूआत होती है, तो कोई भी अंग ठीक से काम नहीं करता है। या फिर किसी भी न्यूट्रिशन और विटामिन की कमी होने लगती है। तो शरीर में इसके संकेत साफ नजर आते हैं। हालांकि अगर इन संकेतों को शुरूआत में ही समझ लिया जाए, तो आने वाले समय में बड़ी मुश्किल से बचा जा सकता है। पेट में गैस बनना, पाचन का कमजोर होना या ब्लोटिंग महसूस होना, नींद आने में मुश्किल, हमेशा कमजोरी, भूख न लगना, हाथ-पैरों में दर्द रहना या थकान महसूस होना आदि ऐसे लक्षण हैं,…
पहलगाम में जब आतंकी हमले में निर्दोषों का रक्त बहा, आहें एवं चीखें गूंजी, जिसने न केवल देश एवं दुनिया को झकझोर दिया था, बल्कि यह संकेत भी दे दिया कि आतंकवाद की जड़ें अब भी जीवित हैं और उन्हें राजनीतिक, वैचारिक और सीमा-पार समर्थन प्राप्त है। लेकिन इस बार एक बड़ा परिवर्तनकारी एवं प्रासंगिक कदम अमेरिका की ओर से सामने आया है, जिसने इस हमले की जिम्मेदारी लेने वाले पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की मुखौटा इकाई द रेजिस्टेंट फ्रंट (टीआरएफ) को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित कर दिया, इस तरह टीआरएफ की पहचान और आतंक के विरुद्ध वैश्विक एकजुटता…
पवित्र श्रावण मास चल रहा है, इस मास में देश के विभिन्न हिस्सों में शिवभक्त देवाधिदेव भगवान महादेव के ऊपर पवित्र नदियों का जल चढ़ाने के लिए सदियों से कांवड़ लेकर आते हैं। हालांकि कुछ लोगों के मन में यह प्रश्न उठता रहता है कि आखिर यह कांवड़ यात्रा क्या है, उन्होंने बेहद सरल शब्दों में यह समझना चाहिए कि कांवड़ यात्रा सनातन धर्मियों की केवल आस्था का ही नहीं बल्कि हमारे प्यारे देश भारत की समृद्धशाली धर्म-सांस्कृतिक, प्राचीन परंपरा और विरासत का एक अद्भुत प्रतीक है। वैसे भी सनातन धर्म-संस्कृति में पवित्र श्रावण मास की शिवरात्रि को देवाधिदेव भगवान…
धूल-मिट्टी और प्रदूषण का असर सिर्फ हमारी सेहत पर ही नहीं बल्कि स्किन का ग्लो भी कम हो जाता है। इस कारण स्किन संबंधी समस्या शुरू हो जाती हैं। ऐसे में महिलाएं स्किन का ग्लो वापस पाने के लिए तमाम ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बंद करते ही यह समस्याएं फिर शुरू हो जाती हैं और ज्यादा खर्च भी होता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि पपीते के पत्ते का इस्तेमाल करके आप स्किन संबंधी समस्याओं को कम करने के साथ स्किन को ग्लोइंग भी बना सकती हैं।आप पपीते के पत्ते का इस्तेमाल…
भारत में पर्यटन उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए कई वर्षों से लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं, परंतु इस क्षेत्र में वृद्धि दर कम ही रही है। क्योंकि, भारत में पर्यटन का दायरा केवल ताजमहल, कश्मीर एवं गोवा आदि स्थलों तक ही सीमित रहा है। परंतु, हाल ही के वर्षों में धार्मिक क्षेत्रों यथा, अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, उज्जैन, हरिद्वार, उत्तराखंड में चार धाम (केदारधाम, बद्रीधाम, गंगोत्री एवं यमुनोत्री), माता वैष्णोदेवी एवं दक्षिण भारत स्थित विभिन्न मंदिरों सहित, बौद्ध धर्म, जैन धर्म एवं सिक्ख धर्म के कई पूजा स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं का विस्तार कर इन्हें आपस में जोड़कर पर्यटन…
बारिश के मौसम में आपके बाल अधिक देखभाल मांगते हैं। बारिश की बूंदे जब सीधे हमारे बालों व स्कैल्प के संपर्क में आती है तो इससे बालों में चिपचिपापन, उलझन व डैंड्रफ आदि की शिकायत शुरू हो जाती है। ऐसे में बालों की केयर करने के लिए हम सभी घरेलू उपाय खोजते हैं और तरह-तरह के हेयर मास्क बनाने लग जाते हैं। यकीनन बालों को पैम्पर करने के लिए घर पर मास्क बनाना एक अच्छा आइडिया है। लेकिन इस मास्क को बनाते समय आप किन इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल करते हैं, यह भी बहुत अधिक मायने रखता है।चूंकि मानसून में हवा…
Creative Commons licenses/Wikimedia Commonsअगर आप साड़ी के साथ कुछ अलग डिजाइन की हील्स वियर करना चाहती हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। अलग डिजाइन वाली हील्स को वियर करने से आपके पैरों को नया टच मिलेगा। साथ ही आप इन हील्स को साड़ी के नीचे पहनकर आसानी से घूम भी पाएंगी।हील्स पहनना अधिकतर लोगों को पसंद होता है। लेकिन जब साड़ी के साथ हील्स को स्टाइल करने की बात आती है, तो हम अक्सर ऐसे डिजाइन पसंद करते हैं, जिनको पहनकर हम आसानी से चल सकें। अगर आप साड़ी के साथ कुछ अलग डिजाइन की हील्स वियर करना चाहती…
हमारे ब्लड में हीमोग्लोबिन एक बेहद जरूर प्रोटीन होता है, जोकि रेड ब्लड सेल्स में पाया जाता है। इसका मुख्य काम फेफड़ों से ऑक्सीजन को बॉडी के हर हिस्से तक पहुंचाना और कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों तक वापस लाना है। यह एक तरह के श्वसन वर्णक है, जिसकी वजह से ब्लड का कलर लाल होता है। यह ऑक्सीजन को ऑक्सीहीमोग्लोबिन के तौर पर और कार्बन डाइऑक्साइड की कुछ मात्रा को कार्बामिनोहीमोग्लोबिन के रूप में ले जाता है।हीमोग्लोबिन का नॉर्मल लेवलबता दें कि हीमोग्लोबिन का लेवल ब्लड में ग्राम प्रति डेसीलीटर में मापा जाता है। एक स्वस्थ व्यक्ति में हीमोग्लोबिन का…
जब सफेद कपड़े नए होते हैं, तो उनकी चमक एकदम अलग होती है। फ्रेश और चमकदार व साफ-सुथरे कपड़े, जिनको पहनकर हमें कॉन्फिडेंस महसूस होता है। लेकिन कुछ ही बार धुलने के बाद सफेद कपड़े पीले पड़ने लगते हैं और फिर वह पहनने लायक नहीं रह जाते हैं। फिर चाहे वह स्कूल की यूनिफॉर्म हो, शर्ट हो या फिर हमारा फेवरेट व्हाइट कुर्ता हो। जब यह पीले दिखने लगते हैं, तो हमारा कॉन्फिडेंस भी फीका पड़ने लगता है। अगर आप भी सफेद कपड़ों के पीलेपन की परेशानी से जूझ रहे हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज इस आर्टिकल के…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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