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Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता एस. रेगुपति ने दावा किया है कि तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने ‘‘मानवीय आधार’’ पर नरमी बरतते हुए टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय को करूर भगदड़ मामले में मुख्य आरोपी नहीं बनाने का फैसला किया था। रेगुपति ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने करूर भगदड़ से जुड़े मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्टालिन से विजय को मुख्य आरोपी बनाए जाने का आग्रह किया था। उनके अनुसार, हालांकि, स्टालिन ने विजय के खिलाफ आरोप आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया और इसके बजाय ‘‘मानवीय दृष्टिकोण’’ अपनाने का फैसला किया, क्योंकि विजय एक…
As people grow older, their movements may become slower, with occasional stiffness. These changes are usually considered a normal part of ageing and receive little attention, as the body naturally becomes less agile and shakier with age. However, certain changes should not be normalised, as they may be associated with neurological conditions such as Parkinson’s disease.ALSO READ: Doomscrolling before bed every night? Neurologist warns it may leave you mentally foggyDr Neeraj Agarwal, consultant neurologist at Manipal Hospital, Ghaziabad, explains how to distinguish normal age-related slowing from early symptoms of Parkinson’s disease and highlights the warning signs that are frequently overlooked.“Mild…
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का दुनियाभर में आम लोगों के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और ऐसे में इन चुनौतियों से निपटने और खासकर ‘ग्लोबल साउथ’ में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स देशों को एकजुट होकर काम करना होगा। ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों को रणनीतिक दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने’ को लेकर भी…
ग्लोबल पॉलिटिक्स में विकासशील देशों का दबदबा कैसे तय होगा? इसका जवाब आज भारत की मेजबानी में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन मिलने जा रहा है। आज का ओपन सेशन केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं का मंच नहीं है, बल्कि ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ के तहत आर्थिक निर्भरता घटाने, नई तकनीक अपनाने और पर्यावरण लक्ष्यों के साथ विकास को साधने की एक मजबूत साझा रणनीति है।इसे भी पढ़ें: Is it OK? असहज दिखे थें जिनपिंग, मोदी ने रोका भाषण, वीडियो वायरल1.रेजिलिएंस: आर्थिक कमज़ोरियों को कम करनापहला स्तंभ, यानी लचीलापन, उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को बाहरी झटकों के प्रति कम संवेदनशील…
सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन बैंक की जीवन बीमा और संपत्ति प्रबंधन (म्यूचुअल फंड) कारोबार में उतरने की योजना तय कार्यक्रम के हिसाब से आगे बढ़ रही है। बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बिनोद कुमार ने कहा कि इन क्षेत्रों में प्रस्तावित अनुषंगी कंपनियों या संयुक्त उद्यमों के लिए जल्द ही बैंक के निदेशक मंडल से मंजूरी ली जाएगी। कुमार ने पीटीआई-के साथ बातचीत में कहा कि बैंक फिलहाल प्रस्तावित अनुषंगी कंपनियों अथवा संयुक्त उद्यमों के लिए बोर्ड की मंजूरी लेने की प्रक्रिया में है।इसके बाद जरूरी नियामकीय और प्रशासनिक प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी। उन्होंने कहा, ‘‘जीवन…
ब्रिक्स समिट में अपने शुरुआती भाषण के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को कुछ असहज महसूस करते हुए देखकर थोड़ी देर के लिए अपनी बात रोक दी। कुछ हलचल से ध्यान बंटने पर प्रधानमंत्री रुके और शी की ओर मुड़े, जो सात साल बाद भारत के दौरे पर आए थे। पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के साथ आए अनुवादक से पूछा, क्या वह ठीक हैं? कुछ पल बाद उन्होंने फिर से यही सवाल पूछा। हालांकि, तुरंत यह पता नहीं चल पाया कि शी को किस वजह से असहजता महसूस हो रही थी। कुछ सेकंड बाद, शी…
रूस ने अगस्त में रिकॉर्ड 1.72 लाख टन पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। इसमें भारत की उस रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल से तैयार किया गया पेट्रोल भी शामिल है, जिसमें रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की आंशिक हिस्सेदारी है। यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूस की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने के बीच यह आयात बढ़ा है।सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में रूस के तेल उत्पादों के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत रही। भारत ने अगस्त में रूस को 1.20 लाख टन पेट्रोल की…
रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन का यह बयान सिर्फ एक सामान्य कूटनी नीतिक टिप्पणी नहीं बल्कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी पूरी वैश्विक व्यवस्था को सीधे चुनौती है। जब पुतिन एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को सुरक्षा परिषद में शामिल करने की बात करते हैं तो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के विश्लेषक इसे सीधे तौर पर भारत की स्थाई सदस्यता के समर्थन के रूप में देख रहे हैं। एशिया से भारत आज ना केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है बल्कि आर्थिक और सामरिक दृष्टि से ग्लोबल साउथ का सबसे प्रभावी नेतृत्वकर्ता बनकर उभरा है। अब सवाल यह है कि…
With Navratri just a few weeks away, Delhiites are making every moment count to ace the fast-paced moves and turns of dandiya and garba. Across the city, dance studios and cultural groups have started conducting classes and workshops, catering to every age bracket and level, from beginners to experienced dancers, looking to perfect their spins before the festive spirit sets in.Delhiites, it’s time to enrol in garba-dandiya classes ahead of Navratri festivities. (Photo: Generated using Gemini AI for representational purposes only)Dance teachers and workshop conductors share that it actually takes at least a month to be able to learn and…
आईटीसी अपने प्रमुख खाद्य ब्रांड ‘आशीर्वाद’ को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में है। कंपनी को उम्मीद है कि अगले पांच साल में आशीर्वाद के उत्पादों पर होने वाला उपभोक्ता खर्च मौजूदा के करीब 10,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये हो जाएगा। आईटीसी के खाद्य प्रभाग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और कार्यकारी निदेशक हेमंत मलिक ने बताया कि कंपनी आशीर्वाद के लिए दोहरी रणनीति पर काम कर रही है।इसके तहत एक ओर आटा कारोबार को और मजबूत किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर रेडी-टू-कुक, फ्रोजन फूड और अन्य संबंधित खाद्य श्रेणियों में विस्तार किया जाएगा। मई,…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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