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Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
व्हाइट हाउस के दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक बेहद हल्का-फुल्का और दिलचस्प पल देखने को मिला। ट्रंप ने इस कूटनीतिक मुलाकात का इस्तेमाल अपने पूर्ववर्ती जो बाइडन पर एक नया तंज कसने के लिए कर लिया। जब ट्रंप शी जिनपिंग को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपतियों के सम्मान में सजी तस्वीरें और गैलरी दिखा रहे थे, तभी उन्होंने बाइडन के पोर्ट्रेट की ओर इशारा करते हुए उनके ऑटोपेन के इस्तेमाल पर एक चुटीला कमेंट कर दिया। ट्रंप की यह बात सुनते ही चीनी राष्ट्रपति अपनी हंसी नहीं रोक पाए और दोनों…
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की गई है। यह मांग मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के संबंध में कानूनी कर्तव्यों के कथित उल्लंघन को लेकर की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की। इसमें कुमार के उन फैसलों, गाइडलाइंस और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को चुनौती दी गई है, जो कथित तौर पर बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना किए गए थे। साथ ही, इन फैसलों…
गोविंदा इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर लगातार चर्चा में हैं। हाल ही में उन्हें मुंबई के लालबागचा राजा पंडाल में कोमल रानी स्वर्णकार के साथ देखा गया था। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। अब गोविंदा ने इस मुलाकात को लेकर हो रही आलोचना पर अपनी बात रखी है।कोमल के साथ लालबागचा राजा के दर्शन क्यों गए गोविंदा?हाल ही में एक इंटरव्यू में गोविंदा ने लालबागचा राजा के दर्शन के लिए कोमल रानी के साथ जाने पर सवाल उठाने वाले लोगों को जवाब दिया। उन्होंने बताया कि वह अपनी अगली फिल्म…
पश्चिम बंगाल में समाज-विरोधी गतिविधियों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लाया गया पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं समाज-विरोधी गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026 अब संवैधानिक और कानूनी समीक्षा के महत्वपूर्ण दौर में पहुंच गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधेयक को मंजूरी देने की बजाय पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है। दरअसल, केंद्र की आपत्ति मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि विधेयक का एक प्रावधान मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में पहले से मौजूद केंद्रीय कानून के साथ समानांतर व्यवस्था खड़ी कर सकता है।वैसे यहां एक बात को स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है। बंगाल में…
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को कहा कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI), और खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चुनावी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों का मजबूती से जवाब देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चुनावों में जनता का भरोसा कम न हो। उन्होंने कहा कि अगर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो मेरा मानना है कि CEC की यह जिम्मेदारी है कि वे मजबूती से अपना पक्ष रखें। अगर लोगों के मन में चुनावी प्रक्रिया को लेकर संदेह है, तो यह गलत है। चुनाव आयोग को अपनी बात मजबूती से रखनी…
हमारे जीवन में रंगों का खास महत्व होता है। कपड़ों से लेकर हमारे आसपास मौजूद सभी चीजें रंग-बिरंगी होती हैं। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप एक ऐसी दुनिया में पहुंच गए हैं, जो ब्लैक एंड व्हाइट है, जहां पर रंग ही नहीं है। ऐसा होने पर और रंगों के अभाव में ऐसा लगता है, जैसे हमारे जीवन में भी उदासी भर जाएगी। यही कारण है कि इन रंगों का उपयोग मेंटल हेल्थ को ठीक रखने के लिए भी किया जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि मेंटल हेल्थ…
लोककथाओं, देवी-देवताओं और रहस्यमयी जंगलों पर आधारित कहानियों ने हमेशा भारतीय दर्शकों को आकर्षित किया है। फिल्म ‘द व्वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ (The Vvan: Force of the Forest) इन्हीं कुछ तत्वों को बड़े पर्दे पर लाती है। कहानी एक पवित्र जंगल, उससे जुड़ी एक स्थानीय मान्यता और एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है जो इन सब बातों को अंधविश्वास मानता है। इसमें छठ पूजा, गाँव की संस्कृति, ज़मीन का विवाद और अलौकिक शक्तियों का कॉम्बिनेशन है। कागज़ पर यह विचार काफी दिलचस्प लगता है, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, यह साफ हो जाता है कि एक साथ…
Festive makeup often comes with a familiar dilemma: how to look polished and picture-ready for hours without ending up with a heavy or cakey base. Add long celebrations, changing weather and an endless stream of beauty trends on social media, and figuring out what is worth trying and what is better left behind can get tricky.In an interview with HT Lifestyle, Vaishnavi Jain, beauty expert, makeup artist and head of product development at PAC Cosmetics, shares her insights on the festive makeup trends that are in, what’s out and how to create a polished look that lasts. (Also read: Content…
टीवी की मशहूर अभिनेत्रियों में शामिल हिना खान इन दिनों लद्दाख में छुट्टियों का आनंद ले रही हैं। शहर की भागदौड़ और भीड़-भाड़ से दूर हिना यहां सुकून के पल बिता रही हैं। लद्दाख में उन्होंने साधुओं के बीच बैठकर ध्यान लगाया और आध्यात्मिक शांति महसूस की। इसकी झलक उन्होंने अपने हालिया पोस्ट में दिखाई है।लद्दाख के मठ में ध्यान लगाती दिखीं हिना खानहिना खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम खाते पर लद्दाख का एक वीडियो साझा किया है। इसमें वह एक मठ में साधुओं के बीच बैठकर ध्यान करती नजर आ रही हैं। शांत माहौल में हिना काफी सुकून में…
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े मंच से दिया बयान खूब चर्चा में है। जहां पर नेतन्याहू यूएनजीसी के महासभा के पोडियम पर पहुंचे तो उनके हाथों में एक छोटा सा डिवाइस नजर आया। यह वही छोटा सा गैजेट था जिसने पूरी दुनिया के सामने इजराइल की वाहवाही की थी। यह वो पेजर था जिसकी मदद से इजराइल ने सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठकर अपने दुश्मन हिजबुल्ला के नेटवर्क को एक ही झटके में तबाह कर दिया था। नेतन्याहू ने यूएन के मन से खुलकर इस ऑपरेशन की याद दिलाई और सीधे हिजबुल्ला और उसके आकाओं पर…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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