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Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
केंद्र सरकार में पिछले लगभग 12 वर्षों से सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार की सुनियोजित आर्थिक रणनीति का सकारात्मक परिणाम जब जीडीपी के मौजूदा उछाल के रूप में सामने आया तो देश-दुनिया के आर्थिक पंडित भी चौंक गए, क्योंकि यह उनकी आकलित उम्मीदों से भी ज्यादा है। यह बात अलग है कि मोदी सरकार का लक्ष्य 4.0 सरकार बनने से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार को 5 ट्रिलियन प्रदान करना है, जिस दिशा में वह मजबूती से सधे पांव रखकर अग्रसर है। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ कि भारत की वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) में जीडीपी…
कर्नाटक में सत्ता के लिए मचा संग्राम कांग्रेस की जगहसाई का कारण बन गया है। मुख्यमंत्री पद के लिए चल रही मारामारी से जाहिर है कि कांग्रेस का अनुशासन से कोई वास्ता नहीं रह गया है। सत्ता की कमजोरी कांग्रेस के बिखराव का कारण बनी हुई है। शिवकुमार धड़ा 2023 में सरकार बनाने के समय तय फॉर्म्युला को लागू करने की मांग कर रहा है। यह निश्चित है कि यदि शिवकुमार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री का पद नहीं मिला तो पार्टी में विद्रोह के हालात पैदा होंगे। पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस में सत्ता को लेकर घमासान मचा हुआ…
पाकिस्तान की भारत-निंदा की आदत कोई नई नहीं है; यह उसकी कूटनीति एवं संकीर्ण सोच का स्थायी चरित्र बन चुकी है। ऐसा शायद ही कोई अवसर हो जब भारत की बढ़ती शक्ति, बढ़ती साख और सांस्कृतिक उन्नयन का प्रभावी दृश्य उभरे और पाकिस्तान उसमें संकुचित मानसिकता से भरी त्रासद टिप्पणियां न करे, विरोध का वातावरण न बनाए या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अनर्गल आरोपों का पुलिंदा न खोले। हाल ही में अयोध्याजी में श्रीराम मंदिर पर हुए ध्वजारोहण समारोह को लेकर उसकी बौखलाहट इसी मानसिक दिवालियापन का ताज़ा उदाहरण है। भारतीयता के स्वाभाविक सद्भाव में सेंध लगाने का कोई अवसर पाकिस्तान…
धनुष और कृति सेनन की जोड़ी सच में एक यूनिक कास्टिंग चॉइस है। लेकिन क्या यह एक बहुत लंबी फिल्म को बनाए रखने के लिए काफी है? फर्स्ट हाफ में दिखाया गया है कि कैसे दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों का एक एंग्री यंग मैन शंकर (धनुष) साउथ दिल्ली की एक लड़की मुक्ति (कृति सेनन) से प्यार करने लगता है, जिसके पिता एक IAS ऑफिसर हैं। फिल्ममेकर्स से मेरी बस यही रिक्वेस्ट है कि हैरेसमेंट को नॉर्मल बनाना और हिंसा को ग्लोरीफाई करना बंद करें। पहली नज़र में, यह इमोशन और थ्रिल से बुनी हुई एक लव स्टोरी लगती है। लेकिन जैसे…
भले ही भारतीय संविधान ने देश-काल-पात्र के परिप्रेक्ष्य में हम भारतीयों को बहुत कुछ दिया है, फिर भी इससे और अधिक लेने की अपेक्षा रखना लाजिमी है। इस दिशा में सुलगता हुआ सवाल यही है कि आखिर सिस्टम पर विगत लगभग आठ दशकों से कुंडली मार कर बैठने वाले लोगों या उनके उत्तराधिकारियों-परिजनों ने, जिसमें संविधान की आरक्षण व्यवस्था द्वारा पैदा किये हुए राजनीतिक, प्रशासनिक, न्यायिक और मीडियागत के ‘अभिजात्य वर्गों’ के विधिक शोषण से उनके ही वर्ग या समाज के संघर्षरत अन्य लोगों को आखिर मुक्ति कब तक मिलेगी!इतना ही नहीं, नियम कानून द्वारा इस देश में असली समाजवाद,…
लंबे समय के इंतज़ार के बाद, मनोज बाजपेयी आखिरकार ‘द फैमिली मैन’ के तीसरे सीज़न में श्रीकांत तिवारी के रूप में वापस आ गए हैं। यह पॉपुलर वेब सीरीज़ अमेज़न प्राइम पर स्ट्रीम होगी। शो में, श्रीकांत को एक मिडिल-क्लास आदमी के रूप में दिखाया गया है जो एक टॉप-सीक्रेट TASC ऑफिसर होने के साथ-साथ दोहरी ज़िंदगी भी जीता है। लेकिन इस सीज़न में, बाजपेयी का किरदार भाग रहा है, क्योंकि उसे चुनौतियों और खतरों से बचना है। शो के लेटेस्ट सीज़न को क्रिटिक्स के साथ-साथ दर्शकों से भी काफी चर्चा और तारीफ़ मिली है।मनोज बाजपेयी और प्रियामणि के लीड…
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने पिछले महीने आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए। सीबीआई के अनुसार, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव के अलावा राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता, उनकी पत्नी सरला गुप्ता, आईआरसीटीसी अधिकारियों, कोचर ब्रदर्स समेत कुल 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए थे। यह खबर पूरे देश में पढ़ी—सुनी गई। यदि किसी ने नहीं देखी तो वह है कांग्रेस पार्टी ने। कांग्रेस ने लालू यादव के भ्रष्टाचार और जंगलराज के अन्य मामलों की तरह इसे भी नजरांदाज कर…
साल की सबसे बहुप्रतीक्षित सीक्वल फिल्मों में से एक, ‘दे दे प्यार दे 2’ आज बड़े पर्दे पर रिलीज़ हो गई है। यह फिल्म 2019 में आई फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ का सीक्वल है। यह एक कॉमेडी-रोमांटिक फिल्म है जिसमें अजय देवगन और रकुल प्रीत सिंह मुख्य भूमिका में हैं। दोनों एक ऐसे जोड़े की भूमिका निभा रहे हैं जिनकी उम्र में काफी अंतर है। पहली फिल्म में, हमने आशीष मेहरा (अजय देवगन) को रकुल के किरदार को अपने परिवार से मिलवाते हुए देखा था, और खूब हंगामा हुआ था। दूसरी फिल्म में आयशा खुराना (रकुल प्रीत सिंह) आशीष…
जो लोग अस्सी के दशक के उथल-पुथल भरे दौर को याद करते हैं, वे इस बात की पुष्टि करेंगे कि ऐतिहासिक शाह बानो मामले ने दशकों तक भारतीय धर्मनिरपेक्षता और पहचान की राजनीति की दरारों को नया रूप दिया। लेकिन अदालतों, मौलवियों की आपत्तियों और राजनीतिक आक्रोश से परे, आस्था, मानवीय गरिमा और एक महिला के अधिकारों की कहानी चारदीवारी के भीतर सामने आई। कथा साहित्य और दृष्टिकोण के दायरे में, इस सप्ताह निर्देशक सुपर्ण वर्मा ने पुनर्विवाह के बाद परित्यक्त एक समर्पित पत्नी, उसके पति द्वारा तत्काल तीन तलाक, भरण-पोषण से क्रूर विच्छेद और भरण-पोषण के लिए भीषण संघर्ष…
आज की ऑडियंस बदलाव चाहती है — वही पुरानी कहानियाँ नहीं, बल्कि कुछ ऐसा जो दिमाग और दिल दोनों को झकझोर दे। जब निर्देशक कुछ नया करने की हिम्मत दिखाते हैं, तो दर्शक भी उन्हें खुले मन से अपनाते हैं। इसी प्रयास का शानदार उदाहरण है ‘जटाधारा’, एक ऐसी फिल्म जो रहस्य, अध्यात्म और विज्ञान को एक साथ पिरोकर एक नया सिनेमाई ब्रह्मांड रचती है।फिल्म की जड़ें अनंथा पद्मनाभस्वामी मंदिर की रहस्यमय गलियों में हैं।यहाँ की कथा घूमती है ‘पिशाच बंधन’ नामक अनुष्ठान के इर्द-गिर्द — एक ऐसा विधि-विधान जो मृत आत्माओं को खजाने की रक्षा के लिए बाँध देता…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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