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Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
Amid rising temperatures, erratic rainfall patterns, altered land and sea use, invasive alien species are quietly expanding their kingdoms, while humans play catch-up.In Ethiopia, there are poems about the dangers of the fast-spreading invasive Prosopis juliflora, brought to the country in the 1970s as part of a fodder and anti-land-erosion effort. (Wikimedia)Amid it all, a 2024 study by scientists from Austria, Hungary, the US, Australia and Germany found that, on average, natural areas owned by indigenous peoples played host to 30% fewer invasives. (The study was published in the journal Nature Sustainability.)“While we don’t yet have complete information on why…
There is a pretty, fragrant, and deadly alien tentacling its way across India.Lantana camara is now among the most widespread invasive alien species worldwide. (Wikimedia)And we’ve woken up to the problem really late.***The lantana has had a headstart of about 200 years.In the early 1800s, hybridised varieties of Lantana camara, a species native to South America, were introduced to India by colonisers, as ornamental hedges.Their tiny flowers, which grow in bouquets of different shades, were certainly charming. But the plants then quickly escaped their gardens and began to make their way into farms, pastures and forests.There, they suffocate native vegetation.…
As they quietly expand their kingdoms, we can look in the mirror and ruefully shake our heads.Spot the red fox, tropical fire ants, lantana, tree of heaven, pleco fish, branched pipe coral and water hyacinth. (images: Shutterstock; HT Illustration via ChatGPT)Over the past two centuries, amid growing trade and amid colonisation, plants, trees, fish and mammals have been transported from their home territories to new regions, for a range of reasons. Some shrubs were pretty, so they were planted as hedges (click here for a look at how much damage the lantana has done in India).Some trees grew fast and seemed…
पश्चिम बंगाल के चुनावों को लेकर इस बार एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली हैं। जहां आमतौर पर चुनाव के दौरान तनाव और हिंसा की खबरें सामने आती हैं, वहीं इस बार मतदान प्रतिशत और शांति दोनों ने ध्यान खींचा हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार, उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में हुए भारी मतदान प्रतिशत और शांतिपूर्ण माहौल की सराहना की हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एक नागरिक के रूप में उन्हें यह देखकर खुशी हुई कि बड़ी संख्या में लोगों ने मतदान में भाग लिया हैं। उनका मानना है कि जब लोग लोकतंत्र…
यूरोपीय फुटबॉल में कई बड़े फैसलों को लेकर हलचल तेज हो गई है। खासकर मैनचेस्टर यूनाइटेड में कोच पद को लेकर स्थिति अभी भी साफ नहीं हो पाई है।मौजूद जानकारी के अनुसार, माइकल कैरिक ने हाल ही में क्लब के बड़े अधिकारी सर जिम रैटक्लिफ से मुलाकात की, लेकिन इसके बावजूद यह तय नहीं हो पाया है कि उन्हें स्थायी कोच की जिम्मेदारी दी जाएगी या नहीं। बता दें कि क्लब फिलहाल इंतजार की नीति अपना रहा है और वह चाहता है कि टीम पहले शीर्ष चार में जगह पक्की करे, उसके बाद ही कोई बड़ा फैसला लिया जाए।गौरतलब है…
Metabolism is often blamed when fat loss slows down, especially after repeated attempts at dieting – but the reality is far more complex than most people realise. Many of us operate on half-truths, assuming our metabolism “breaks” over time, when in fact, it adapts in ways that aren’t always obvious. From how your body responds to calorie restriction to the role of sleep and muscle mass, metabolism works in nuanced ways that are often misunderstood, making it harder to navigate weight loss effectively.Read more to find out 5 facts about metabolism! (Unsplash)Also Read | Did you know using excess mouthwash…
इस बार का आईपीएल 2026 सीज मुंबई की टीम के लिए उम्मीद के मुताबिक बिल्कुल नहीं रहा हैं। लगातार खराब प्रदर्शन के चलते टीम दबाव में नजर आ रही हैं और अब स्थिति यह बन गई है कि आगे का हर मुकाबला उनके लिए करो या मरो जैसा हो गया है।मौजूद जानकारी के अनुसार, मुंबई इंडियंस ने अब तक सात मुकाबलों में सिर्फ दो जीत दर्ज की है, जबकि टीम कागज पर काफी मजबूत दिखाई दे रही थी। हार्दिक पांड्या, सूर्यकुमार यादव, जसप्रीत बुमराह और तिलक वर्मा जैसे बड़े नामों के बावजूद टीम निरंतरता नहीं दिखा पाई हैं। बता दें…
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को घोषणा की कि उनका प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरण का इलाज हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी सालाना मेडिकल रिपोर्ट जारी करने में दो महीने की देरी की, ताकि चल रहे युद्ध के बीच ईरान को इजरायल के खिलाफ झूठा प्रोपेगैंडा फैलाने से रोका जा सके। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया कि वे स्वस्थ हैं और बेहतरीन शारीरिक स्थिति में हैं। उन्होंने आगे बताया कि उनके प्रोस्टेट में एक छोटी सी मेडिकल समस्या थी, जिसका पूरी तरह से इलाज हो चुका है। प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआत प्रोस्टेट ग्रंथि से होती है। यह मूत्राशय…
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को आप के उन राज्यसभा सदस्यों को गद्दार कहा, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की। यहाँ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मान ने आरोप लगाया कि BJP, AAP को तोड़ने की कोशिश कर रही है और उसने “पंजाब के लोगों के साथ विश्वासघात किया है। मान ने कहा कि जब उन्हें भगवंत मान के खिलाफ कुछ नहीं मिला, तो उन्होंने आप को तोड़ने की कोशिश की।” मान शुक्रवार को ही नीदरलैंड और फिनलैंड की लगभग एक हफ़्ते लंबी यात्रा से लौटे थे, जिसका मकसद अपने…
वानखेड़े मैदान पर खेले गए मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेले गए मुकाबले में माहौल गरम होता दिखा। मैच के दौरान चेन्नई के हरफनमौला खिलाड़ी जेमी ओवरटन और मुंबई के बल्लेबाज तिलक वर्मा के बीच मैदान पर तीखी बहस हो गई। मौजूद जानकारी के अनुसार यह घटना मुंबई की पारी के दसवें ओवर की आखिरी गेंद पर हुई, जब तिलक वर्मा ने गेंद को हल्के से खेलकर रन लेने की कोशिश की थी।गौरतलब है कि इस दौरान तिलक वर्मा ने दो रन लेने का इशारा किया, लेकिन दूसरे छोर पर खड़े सूर्यकुमार यादव ने मना कर दिया…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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