(शीर्षक और इंट्रो में महत्वपूर्ण सुधार के साथ रिपीट)
लखनऊ, सात नवंबर अयोध्या से समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक पवन पांडे ने शनिवार को कहा कि पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव 12 दिसंबर को अयोध्या स्थित राम मंदिर जाएंगे। इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज होने के आसार हैं जहां 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। अयोध्या से एक बार फिर सपा का उम्मीदवार बनाए गए पवन पांडे ने पत्रकारों से कहा, ‘‘अखिलेश और उनकी पत्नी डिंपल यादव 12 दिसंबर को राम मंदिर के साथ-साथ अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर में भी दर्शन करेंगे।’’
इस घोषणा को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह ऐसे समय में हुई है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नीत सरकार अयोध्या में भव्य दीपोत्सव का आयोजन कर रही है।
योगी सरकार अक्सर सपा नेतृत्व पर ‘‘तुष्टीकरण की राजनीति’’ करने और राम मंदिर नहीं जाने का आरोप लगाती रही है। वर्ष 2012 में अयोध्या से विधानसभा चुनाव जीतने वाले पवन पांडे ने कहा, ‘‘सपा प्रमुख अपने परिवार के साथ अयोध्या आएंगे। वे हनुमानगढ़ी और राम मंदिर सहित कई मंदिरों में दर्शन करेंगे।
इसके साथ ही संतों से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद भी लेंगे।’’
जनवरी 2024 में राम मंदिर में राम लला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के समारोह के बाद अखिलेश यादव की यह पहली अयोध्या यात्रा होगी। यह दौरा 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले प्रस्तावित है। अखिलेश यादव के इस दौरे को सपा की ओर से ‘‘नरम हिंदुत्व’’ की राजनीति के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है जिसके जरिए पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आरोपों का जवाब देने की कोशिश कर सकती है।
भाजपा लगातार जनता को बताती रहती है कि 1990 के दशक में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार के कार्यकाल में अयोध्या में कारसेवकों पर पुलिस ने गोली चलाई थी। इससे पहले, राम मंदिर जाने के सवाल पर अखिलेश यादव का कहना था कि वह अयोध्या तभी जाएंगे, जब इटावा में समाजवादी पार्टी द्वारा बनवाया जा रहा ‘‘केदारेश्वर धाम’’ बनकर तैयार हो जाएगा।
