नयी दिल्ली, छह नवंबर उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु के अगस्त्यमलाई पारिस्थितिक क्षेत्र के संरक्षित क्षेत्रों में बेदखली और पुनर्वास प्रक्रिया की निगरानी के लिए पूर्व प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने वन अधिकार अधिनियम के तहत दावों को प्राप्त करने, उनकी पहचान करने और उन पर फैसला सुनाने की प्रक्रिया में देरी के लिए तमिलनाडु सरकार को जिम्मेदार ठहराया। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह बाकी बची ग्राम सभाओं के गठन की प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करे।
पीठ ने कहा, ‘‘एक विशेष समिति गठित की जा रही है, जिसके प्रमुख भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई होंगे। इस समिति की सहायता के लिए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) के एक अधिकारी और तमिलनाडु के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शामिल होंगे। समिति के अध्यक्ष को यह छूट होगी कि वह अपने कार्यों के निर्वहन में सहायता के लिए सीईसी के किसी उपयुक्त अधिकारी को चुन सकें।’’
इसने कहा, ‘‘समिति वन अधिकार कानून (एफआरए), 2006 के तहत सक्षम प्राधिकारियों द्वारा प्राप्त दावों के संबंध में पारित आदेशों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में इस न्यायालय को सौंपेगी।’’
पीठ ने कहा कि समिति संबंधित प्राधिकारियों को आवश्यक निर्देश देकर दावों के त्वरित निपटान की निगरानी भी करेगी।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि समिति अपना कामकाज तत्काल प्रभाव से शुरू करेगी। न्यायालय ने कहा, ‘‘तमिलनाडु सरकार, समिति को अपना काम करने के लिए सभी ज़रूरी साजो-सामान और प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराएगी। इस दौरान (समिति के) माननीय अध्यक्ष के पद की पूरी गरिमा का ध्यान रखा जाएगा।
इसके लिए, संयुक्त सचिव (प्रशासन) स्तर के एक अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जो समिति के साथ समन्वय करेंगे और इसके कामकाज के लिए आवश्यक हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने में मदद करेंगे।’’
शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु में अगस्त्यमलाई पारिस्थितिक क्षेत्र के संरक्षित इलाकों में हुए अतिक्रमण को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिया था कि अतिक्रमण हटाने के लिए एक समय-सीमा तय की जाए और इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया था कि वहां अतिक्रमण करने वाले सेवारत और सेवानिवृत्त सभी 118 कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
