केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के करोड़ों रुपये के ऋण धोखाधड़ी मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस (आर-कॉम) समूह के पूर्व प्रबंध निदेशक अमिताभ झुंझुनवाला को मंगलवार को चिकित्सकीय आधार पर जमानत दे दी। विशेष न्यायाधीश नितिन वी जीवाने ने झुंझुनवाला की बिगड़ती सेहत के आधार पर यह याचिका स्वीकार की। अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस हालिया आदेश का सहारा लिया, जिसके तहत उन्हें धन शोधन से जुड़े मामले में वैधानिक राहत दी गई थी।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने झुंझुनवाला को एक जून को गिरफ्तार किया था। झुंझुनवाला ने अपने वकीलों आबाद पोंडा, राहुल अग्रवाल और जास्मीन पुरानी के माध्यम से याचिका दायर की थी। याचिका में रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर, हड्डियों का कमजोर या खोखला होना, मांसपेशियों का क्षय और हृदय की धमनियों से जुड़ी बीमारी जैसी गंभीर रोगों का हवाला दिया गया था।
उन्होंने कहा कि इन बीमारियों के लिए लगातार डॉक्टरों की निगरानी और लंबे इलाज की जरूरत है, जो न्यायिक हिरासत में संभव नहीं है। अधिवक्ता पोंडा ने अदालत को सूचित किया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 22 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उन्हें बीमार या अस्वस्थ पाते हुए नियमित जमानत दे दी थी। इस दलील को स्वीकार करते हुए विशेष न्यायाधीश ने कहा कि चूंकि चिकित्सकीय स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए आवेदक सीबीआई मामले में भी चिकित्सकीय आधार पर नियमित जमानत का हकदार है।
विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट और सीधे शब्दों में कहा था कि उनकी चिकित्सकीय स्थिति के लिए विशेष इलाज की आवश्यकता है। यह इलाज सिर्फ दवाइयां देने या दर्द को थोड़े समय के लिए कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए लंबे समय तक लगातार देखरेख और सुधार की जरूरत है। इसके बाद अदालत ने उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही रकम की गारंटी देने वाले एक या दो स्थानीय जमानतदारों को पेश करने पर जमानत दे दी।
सीबीआई का यह मामला भारतीय स्टेट बैंक द्वारा अगस्त 2025 में आरकॉम और अन्य के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत से संबंधित है। बैंक ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाया था, जिससे बैंक को शुरू में 2,929.05 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
