पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने आज सक्रिय राजनीति में उतरने का ऐलान कर उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। मित्तल ने साफ किया कि वह किसी स्थापित राजनीतिक दल के सहारे नहीं, बल्कि स्वतंत्र मंच के जरिए जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत इसी प्रदेश से होगी। एक वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने बताया कि प्रशासनिक सेवा के दौरान जनता के बीच काम करते हुए उन्हें कई ऐसी हकीकतों का सामना करना पड़ा, जिसने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि सरकारी मंजूरी, धन और नियम-कायदे मौजूद होने के बावजूद आम लोगों की अनेक समस्याएं वर्षों तक जस की तस पड़ी रहती हैं। उन्होंने कहा कि कई लोगों की आवाज सरकार तक पहुंच ही नहीं पाती और जिनकी आवाज पहुंचती भी है, उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाती।
मित्तल ने एक दूरदराज के गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां के ग्रामीण पांचवीं कक्षा के आगे की पढ़ाई के लिए विद्यालय की मांग कर रहे थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, लेकिन वर्षों गुजर जाने के बाद भी विद्यालय का निर्माण शुरू नहीं हो सका। मित्तल के अनुसार, इस मामले में धन या नियमों की अड़चन नहीं थी, बल्कि इरादे की कमी सबसे बड़ी बाधा थी। उन्होंने एक भूमिहीन लाभार्थी का मामला भी सामने रखा, जिसे सरकारी दस्तावेजों में जमीन का आवंटन तो हो चुका था, लेकिन उसे जमीन पर वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया। मित्तल ने दावा किया कि जांच में रिपोर्टों में अनियमितताएं सामने आईं और सुधारात्मक कार्रवाई भी की गई, लेकिन इसके बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने ऐसे मामलों में कथित तौर पर ऊपरी स्तर के हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति को कानून और सरकारी व्यवस्था के तहत राहत मिलनी तय हो, तब भी उसे अपने अधिकार के लिए भटकना पड़े तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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राजनीति में आने के पीछे अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए मित्तल ने ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल आधारभूत सुविधाओं, असुरक्षित सड़कों, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में रोजगार की चुनौतियों को प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना है कि इन विषयों पर केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि गंभीर सार्वजनिक बहस और दीर्घकालिक नीति की जरूरत है। दिव्या मित्तल ने कहा कि वह ऐसी राजनीति करना चाहती हैं जिसमें इरादा, न्याय, संवेदनशीलता और दूरगामी सोच केंद्र में हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल मौजूदा नेताओं को हटाकर नए चेहरों को स्थापित करना नहीं है, बल्कि राजनीति के काम करने के तरीके में बदलाव लाना है।
किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की अटकलों को खारिज करते हुए मित्तल ने कहा कि वह सीधे जनता के साथ काम करेंगी और अपना स्वतंत्र राजनीतिक मंच तैयार करेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस्तीफे के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैलाई गईं, जिनका उद्देश्य नए लोगों को सार्वजनिक जीवन में आने से हतोत्साहित करना था। मित्तल ने शिक्षकों, किसानों, विद्यार्थियों, चिकित्सकों, मजदूरों और वकीलों समेत समाज के अलग-अलग वर्गों से उनके अभियान से जुड़ने की अपील की। उनका कहना है कि सार्थक राजनीतिक बदलाव केवल किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं, बल्कि जनता की व्यापक भागीदारी से संभव है।
