बाजार में नए आईपीओ की हलचल के बीच एवरब्रांड्स इंडिया ने भी शेयर बाजार में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है। नॉरवेस्ट कैपिटल के समर्थन वाली इस कंपनी ने सेबी के पास आईपीओ से जुड़े दस्तावेज दाखिल किए हैं। कंपनी इस निर्गम के जरिए 600 करोड़ रुपये तक जुटाने की योजना बना रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, एवरब्रांड्स इंडिया ने 28 सितंबर को मसौदा दस्तावेज दाखिल किया है। प्रस्तावित निर्गम पूरी तरह नए शेयर जारी करने पर आधारित होगा। इसमें मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी बेचने यानी ऑफर फॉर सेल का हिस्सा नहीं होगा। हालांकि, कंपनी मुख्य निर्गम से पहले 120 करोड़ रुपये तक का प्री-आईपीओ निवेश जुटाने पर विचार कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो मुख्य निर्गम का आकार उतनी ही राशि से घट जाएगा।
बता दें कि एवरब्रांड्स इंडिया भारत में सबवे रेस्तरां का कारोबार चलाती है। इसके अलावा कंपनी के पेय कारोबार में लावाज़ा कॉफी, दिलमह चाय और उसके अपने फ्रेश एंड हॉनस्ट कॉफी ब्रांड शामिल हैं। कंपनी को सिंगापुर स्थित एवरग्रुप का समर्थन प्राप्त है, जिसका स्वामित्व समीर सैन और अतुल कपूर के पास है।
एवरब्रांड्स इंडिया के पास भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश में सबवे रेस्तरां के लिए विशेष मास्टर फ्रेंचाइजी अधिकार हैं। कंपनी सबवे कारोबार को त्वरित सेवा वाले रेस्तरां के रूप में चलाती है, जबकि लावाज़ा, दिलमह और फ्रेश एंड हॉनस्ट को पेय कारोबार के तहत संचालित किया जाता है।
आईपीओ से मिलने वाली रकम का एक बड़ा हिस्सा कंपनी अपने कारोबार के विस्तार में लगाने वाली है। कंपनी 125 करोड़ रुपये अपनी सहायक कंपनी कलिनरी ब्रांड्स इंडिया के कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल करेगी। मार्च 2026 तक इस सहायक कंपनी पर कुल 149.7 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया था।
इसके अलावा 326.85 करोड़ रुपये नए सबवे स्टोर खोलने में लगाए जाएंगे। बाकी पैसों का इस्तेमाल सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए किया जाएगा।
गौरतलब है कि एवरब्रांड्स इंडिया का दावा है कि भारत के बड़े और तेजी से बढ़ रहे त्वरित सेवा वाले रेस्तरां बाजार में स्टोर की संख्या के हिसाब से वह तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है। मार्च 2026 तक कंपनी के पास भारत में सबवे के कुल 1,008 स्टोर थे। इनमें 678 स्टोर कंपनी के स्वामित्व और उसके संचालन में चल रहे थे। कंपनी मुख्य रूप से किराये की जगहों पर छोटे आकार के स्टोर चलाने वाला कारोबार मॉडल अपनाती है।
कंपनी में प्रमोटरों की हिस्सेदारी 58.06% है। बाकी 41.94% हिस्सेदारी पब्लिक शेयरधारकों के पास है। इनमें नॉरवेस्ट कैपिटल की हिस्सेदारी 16.48% और प्लेबुक पार्टनर्स इंडिया की 4.15% हिस्सेदारी शामिल है।
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी अभी मुनाफे में नहीं है। मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष में उसका घाटा बढ़कर 58.1 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 28.2 करोड़ रुपये था। हालांकि, इसी दौरान परिचालन से मिलने वाला राजस्व 35% बढ़कर 966.2 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 716 करोड़ रुपये था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, कंपनी का मुकाबला जुबिलेंट फूडवर्क्स, देवयानी इंटरनेशनल, वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड, सैफायर फूड्स इंडिया और रेस्तरां ब्रांड्स एशिया जैसी सूचीबद्ध कंपनियों से है। एवरब्रांड्स इंडिया के प्रस्तावित आईपीओ के लिए मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज और नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट को मुख्य प्रबंधक बनाया गया है।
