पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को आरोप लगाया कि राज्य विधानसभा चुनाव में हार के बाद हताश विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अफवाहें फैला रहे हैं और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर उनका विरोध ‘‘राजनीति से प्रेरित’’ है। अधिकारी ने एक संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि कुछ समाचार संगठन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत को ‘‘अभी तक स्वीकार नहीं कर पाए हैं’’ तथा वे ‘‘अफवाहें फैला रहे हैं।’’
उन्होंने निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया की आलोचना को लेकर विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा और दावा किया कि यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से तथा सभी पक्षों की उचित भागीदारी के साथ की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘बंगाल में हार के बाद हताश विपक्षी दल एसआईआर को लेकर अफवाहें फैला रहे हैं।’’
केरलम से तुलना करते हुए अधिकारी ने कहा कि कांग्रेस वहां एसआईआर का समर्थन कर रही है क्योंकि उसने इस दक्षिणी राज्य में चुनाव जीता है, जबकि पश्चिम बंगाल में चुनाव हारने के बाद पार्टी इस प्रक्रिया का विरोध कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि कांग्रेस ने केरलम में चुनाव जीता है, इसलिए पार्टी वहां एसआईआर का समर्थन कर रही है, लेकिन बंगाल में इसका विरोध कर रही है क्योंकि कांग्रेस और उसके सहयोगी यहां चुनाव हार गए।’’
अधिकारी ने यह भी दावा किया, ‘‘बंगाल में एसआईआर के दौरान 27 लाख नाम हटाए जाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिम्मेदार थीं, भाजपा या निर्वाचन आयोग नहीं।’’
भाजपा नेता ने निर्वाचन आयोग की इस प्रक्रिया के विरोध को लेकर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद उनकी पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) अब ‘‘एक ही सुर में बोल रही हैं।’’
अधिकारी ने वाम मोर्चा के शासनकाल से जुड़े राजनीतिक हिंसा के मामलों का भी जिक्र किया, जिनमें साईबाड़ी और नंदीग्राम की घटनाएं शामिल हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और माकपा के बीच कथित राजनीतिक समझौते को लेकर भी सवाल उठाया।
