कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चुनाव आयोग के ECINet सॉफ़्टवेयर को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के दौरान इसके कामकाज के बारे में आई एक रिपोर्ट को बेहद गंभीर बताया है। थरूर की यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार की आलोचना के एक दिन बाद आई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को नए वोटर जोड़ने और नाम हटाने के बारे में अंधेरे में रखा। ताज़ा विवाद ECINet से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल वोटर्स ने SIR प्रोसेस के दौरान फ़ॉर्म और डॉक्यूमेंट जमा करने के लिए किया था। बाद में चुनाव अधिकारियों ने जमा किए गए डॉक्यूमेंट्स को प्रोसेस करने के लिए इस पोर्टल का इस्तेमाल किया।
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चुनाव आयोग ने इस साल जनवरी में ECINet ऐप लॉन्च किया था, जबकि इसके बीटा वर्शन का टेस्ट पिछले साल नवंबर में बिहार चुनावों के दौरान किया गया था। वेबसाइट और ऐप जनता को चुनाव नतीजों के बारे में रियल-टाइम अपडेट देते हैं और चुनाव अधिकारी भी इनका इस्तेमाल करते हैं। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ECINet के सेंट्रलाइज़ेशन और प्रोसेस से राज्य-स्तर के अधिकारियों को हटाने को लेकर संधू और जोशी ने जो चिंताएं जताई थीं, वे गोवा में देखने को मिलीं। रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा में यह मामला इसलिए भी अहम हो गया क्योंकि वोटर लिस्ट से नाम हटने पर राज्य की कई ऐसी स्कीमों के लिए पात्रता पर असर पड़ सकता है, जिनमें पात्रता तय करने के लिए वोटर लिस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।
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रिपोर्ट में गोवा मेडिक्लेम स्कीम का ज़िक्र किया गया है। यह स्कीम सुपर-स्पेशियलिटी इलाज के लिए फ़ंडिंग देती है, जो सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं होते; इनमें डायलिसिस, एंजियोप्लास्टी, ओपन-हार्ट सर्जरी, ट्रांसप्लांट, कीमोथेरेपी और कॉक्लियर इम्प्लांट शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्कीम सिर्फ़ राज्य के वोटरों के लिए उपलब्ध है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि SIR के तहत गोवा में फ़ाइनल वोटर लिस्ट जारी होने से चार दिन पहले, राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने सात दिनों में आठवीं बार दिल्ली में चुनाव आयोग को पत्र लिखा। इसके साथ 97 वोटरों की एक लिस्ट जुड़ी थी, जिनकी बात गोवा के ही इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (EROs) ने सुनी थी, उनकी जांच की थी और सुप्रीम कोर्ट की तय प्रक्रिया के तहत उन्हें योग्य पाया था। ईमेल में कहा गया कि उन्हें हटाने के पुराने फैसलों को पलटना होगा। लेकिन EROs सॉफ्टवेयर (ECINet) के ज़रिए उन फैसलों को पलट नहीं सके। रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी वजह यह थी कि ऐसा करने की इजाज़त दिल्ली से कंट्रोल होती थी। रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि यह मामला नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और ज़रूरी सुविधाओं तक उनकी पहुँच से जुड़ा है।
