टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल एन टाटा ने टाटा संस के निदेशक मंडल के समक्ष शापूरजी पालोनजी (एसपी) समूह की टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचकर कम-से-कम 25,000 करोड़ रुपये जुटाने का प्रस्ताव रखा है। टाटा ट्रस्ट ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा कि एसपी समूह की टाटा संस में हिस्सेदारी रखने वाली कंपनियां- स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट्स कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड और साइरस इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड कम-से-कम 25,000 करोड़ रुपये की सकल राशि जुटाने के लिए पर्याप्त शेयर बेचेंगी। लेनदेन का मूल्यांकन आयकर नियम, 1962 के नियम 11यूए के तहत निर्धारित मूल्य के आधार पर किया जाएगा।
प्रस्ताव के मुताबिक, यह खरीद 18 महीने के भीतर दो चरणों में पूरी की जाएगी। इसके लिए टाटा संस को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष चयनित पूंजी कटौती की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
नोएल टाटा ने टाटा संस के बोर्ड से धन जुटाने के अन्य विकल्पों पर भी विचार करने को कहा है। इनमें टाटा संस का आंतरिक नकदी प्रवाह, सूचीबद्ध निवेशों की बिक्री, नए कारोबारों में निवेशकों को शामिल करना और कुछ परिचालन कंपनियों की संभावित सूचीबद्धता से जुड़ी बिक्री पेशकश शामिल हैं। उन्होंने टाटा संस की परिचालन टीम और टाटा ट्रस्ट को एसपी समूह तथा उसके बैंकरों के साथ बातचीत जारी रखने और बोर्ड को इसकी जानकारी देने की अनुमति देने का भी आग्रह किया है।
टाटा ट्रस्ट ने कहा कि यह प्रस्ताव नोएल टाटा, टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और एसपी समूह के चेयरमैन शापूर मिस्त्री के बीच पहले हुई बातचीत के बाद आया है। ट्रस्ट ने कहा कि वह एसपी समूह की टाटा संस में हिस्सेदारी के लिए ‘निष्पक्ष और समान समाधान’ तलाशने की अपनी इच्छा पर कायम है। एसपी समूह के पास टाटा संस में करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है और वह लंबे समय से इस गैर-सूचीबद्ध होल्डिंग कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का मूल्य हासिल करने की कोशिश करता रहा है।
सीमित हिस्सेदारी बिक्री का प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस के प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में पंजीकरण वापस करने का आवेदन खारिज कर दिया है। इससे कंपनी पर अपर लेयर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर लागू सूचीबद्धता संबंधी नियमों के अनुपालन का सवाल फिर खड़ा हो गया है। प्रस्तावित सौदे से एसपी समूह को टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचकर नकदी मिल सकती है, जबकि टाटा संस को सार्वजनिक निर्गम के बजाय हिस्सेदारी खरीदने का विकल्प मिल सकता है।
हालांकि, इसके लिए नियामकीय और एनसीएलटी की मंजूरी लेनी जरूरी होगी। प्रस्ताव में हिस्सेदारी के मूल्यांकन, शेयरधारकों के साथ समान व्यवहार और पूंजी कटौती की प्रक्रिया की वैधता जैसे मुद्दों की जांच भी होगी। यह प्रस्ताव टाटा संस के भविष्य को लेकर चल रहे व्यापक विवाद की एक और कड़ी है, जिसमें नेतृत्व को लेकर मतभेद और कंपनी की सूचीबद्धता को लेकर शेयरधारकों के बीच असहमति शामिल हैं।
