अगस्त में भारत के व्यापार घाटे को लेकर राहत देने वाली तस्वीर सामने आई है। कुल निर्यात में आयात के मुकाबले तेज बढ़ोतरी होने से देश का समग्र व्यापार घाटा पिछले साल के इसी महीने के 11.62 अरब डॉलर से घटकर 9.41 अरब डॉलर रह गया। मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में वस्तुओं और सेवाओं समेत कुल निर्यात 25.41 प्रतिशत बढ़कर 82.68 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि आयात 92.09 अरब डॉलर रहा। एक साल पहले निर्यात 65.93 अरब डॉलर और आयात 77.55 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि अगस्त में निर्यात की रफ्तार और तेज हुई है। वस्तु निर्यात 26.12 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल 34.74 अरब डॉलर था। रुपये में यह 37.59 प्रतिशत बढ़कर 4.18 लाख करोड़ रुपये रहा। वस्तु आयात भी बढ़कर 70.67 अरब डॉलर हो गया। इसके बावजूद वस्तु व्यापार घाटा 26.86 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल के 27.20 अरब डॉलर से कम है। राजेश अग्रवाल ने कुल और वस्तु व्यापार घाटे में कमी को सकारात्मक संकेत बताया है।
गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में पेट्रोलियम, कच्चा तेल, कोयला, कोक और ब्रिकेट जैसे ऊर्जा उत्पाद आयात घाटे के बड़े कारणों में रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक सामानों के आयात ने भी दबाव बढ़ाया है। दूसरी ओर, सेवा क्षेत्र ने निर्यात को मजबूती दी। अगस्त में सेवाओं का निर्यात 24.61 प्रतिशत बढ़कर 38.87 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा आयात 21.42 अरब डॉलर पहुंच गया। वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर रुपये में कुल निर्यात 36.81 प्रतिशत बढ़कर 7.89 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। सोने का आयात 57.7 प्रतिशत घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया।
निर्यात वृद्धि में इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन और कपड़ा क्षेत्र का योगदान प्रमुख रहा। राजेश अग्रवाल के अनुसार, पहले पांच महीनों में इलेक्ट्रॉनिक सामानों का निर्यात करीब 30 प्रतिशत और इंजीनियरिंग सामानों का निर्यात 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा। रसायनों और समुद्री उत्पादों में भी 14 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।
भारत ने कई प्रमुख बाजारों में बेहतर प्रदर्शन किया है। चीन को निर्यात 39 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सिंगापुर में 97 प्रतिशत से अधिक, दक्षिण अफ्रीका में 58 प्रतिशत और मलेशिया में 75 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई। अप्रैल-अगस्त के दौरान ब्रिक्स देशों को निर्यात 13.3 प्रतिशत बढ़कर 34.5 अरब डॉलर रहा। अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से भी भारतीय सामानों की मांग बनी हुई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अप्रैल-अगस्त में वस्तु निर्यात 17.85 प्रतिशत बढ़कर 215.91 अरब डॉलर और आयात 18.21 प्रतिशत बढ़कर 363 अरब डॉलर हो गया। राजेश अग्रवाल ने कहा कि निर्यात वृद्धि केवल कीमतों की वजह से नहीं हुई, बल्कि माल की मात्रा भी बढ़ी है। निगरानी में शामिल 168 प्रमुख वस्तुओं में से 68 में मात्रा और मूल्य दोनों बढ़े हैं, जो उत्पादन और माल भेजने की गतिविधि में सुधार का संकेत है।
बता दें कि ब्रिटेन के साथ भारत का व्यापार समझौता लागू हो चुका है, जबकि यूरोपीय संघ के साथ व्यापक समझौता आगे बढ़ रहा है। इससे भारतीय सामानों के लिए बाजार विस्तार की उम्मीद है। अगस्त में वस्तु निर्यात जुलाई के 44.24 अरब डॉलर से घटकर 43.81 अरब डॉलर रहा, लेकिन आयात भी 76.22 अरब डॉलर से घटकर 70.67 अरब डॉलर हो गया। अगस्त का वस्तु व्यापार घाटा अर्थशास्त्रियों के 32 अरब डॉलर के अनुमान से कम रहा।
इस बीच सऊदी अरब पर नए हमलों और खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर हमलों ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। सऊदी तेल पाइपलाइन पर हमले और यमन के हूती समूह की बढ़ती गतिविधियों के बीच पश्चिम एशिया का संकट व्यापार और ऊर्जा कीमतों के लिए चुनौती बना रह सकता है। ऐसे में निर्यात की मजबूती और आयात दबाव को संभालना भारत के बाहरी क्षेत्र के लिए अहम संकेत हैं।
