रणनीतिक क्षेत्रों के लिए सामग्री और विनिर्माण प्रक्रियाओं में प्रगति पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीएएमपीएस-2026) का चौथा संस्करण शनिवार को तिरुवनंतपुरम में आयोजित किया गया जिसमें वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के पेशेवरों ने रणनीतिक क्षेत्रों के लिए सामग्री और विनिर्माण प्रौद्योगिकियों में हुई प्रगति पर विचार-विमर्श किया। एक बयान के अनुसार, भारतीय धातु संसद (आईआईएम), तिरुवनंतपुरम इकाई द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में रक्षा, वांतरिक्ष, परमाणु, ऊर्जा और अन्य रणनीतिक एवं उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़ी उन्नत सामग्री एवं विनिर्माण प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई। आईआईएम के उपाध्यक्ष एस.वी.एस. नारायण मूर्ति ने अपने संबोधन में रणनीतिक क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए अहम और उच्च प्रदर्शन वाली सामग्री के क्षेत्र में भारत की घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
बयान में कहा गया, ‘‘उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्नत सामग्री को भरोसेमंद घटकों और प्रणाली में बदलने के लिए सामग्री के विकास के साथ-साथ सही प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षमताएं भी होनी चाहिए। उन्होंने घरेलू प्रौद्योगिकी को शोध से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक और औद्योगिक अनुप्रयोगों तक ले जाने के लिए अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, शिक्षाविदों और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग का भी आह्वान किया।’’
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के महानिदेशक (नौसेना प्रणाली और सामग्री) आर. आर. बालामुरलीकृष्णन उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि थे। बयान में कहा गया, ‘‘उन्होंने राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता हासिल करने में उन्नत सामग्री एवं महत्वपूर्ण खनिजों की अहम भूमिका पर जोर दिया और संसाधन पुनर्प्राप्ति, पुनर्चक्रण और सहयोगात्मक नवोन्मेष के जरिये सामग्री की खोज और उससे उत्पाद तैयार करने के बीच के अंतर को पाटने की जरूरत पर जोर दिया।’’
अलौह सामग्री प्रौद्योगिकी विकास केंद्र (एनएफटीडीसी) के निदेशक के. बालासुब्रमण्यम और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)-राष्ट्रीय अंतर्विषयी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईआईएसटी) के निदेशक सी. आनंदहरिकृष्णन सम्मानित अतिथियों में शामिल थे।
आनंदहरिकृष्णन ने पारंपरिक सीमित स्तर के शोध से आगे बढ़कर ऐसे नवोन्मेषी और प्रौद्योगिकी आधारित अनुसंधान की जरूरत बताई, जो समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान कर प्रभावी परिणाम दे सके।
