दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर ऑटोमोबाइल निर्माताओं पर कथित तौर पर ‘दबाव’ डालने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह दबाव E20 पेट्रोल के साथ वाहनों की अनुकूलता (compatibility) को लेकर है। केजरीवाल ने चिंता जताई कि 2023 से पहले निर्मित वाहन E20 पेट्रोल के उपयोग से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और उनके प्रदर्शन में समस्या आ सकती है।
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केजरीवाल का ‘दबाव’ का आरोप
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ऑटोमोबाइल कंपनियों पर दबाव बना रही है कि वे यह साबित करें कि उनके वाहन E20 पेट्रोल के अनुकूल हैं। केजरीवाल के अनुसार, यदि वाहन निर्माता इस बात की पुष्टि नहीं करते हैं, तो सरकार उन्हें नए नियम लागू करने के लिए मजबूर कर सकती है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि पुराने वाहन E20 पेट्रोल का उपयोग करते हैं, तो उन्हें नुकसान हो सकता है।
बीजेपी का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अरविंद केजरीवाल के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा ने प्रमुख उद्योगपतियों के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है। पार्टी ने बताया कि व्यापक परीक्षण और सत्यापन के बाद यह पुष्टि की गई है कि E20 पेट्रोल वाहनों के लिए हानिकारक नहीं है। भाजपा ने इस बात पर जोर दिया कि ऑटोमोटिव सेक्टर E20 पहल का समर्थन करता है और केजरीवाल के आरोप निराधार हैं।
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E20 पेट्रोल क्या है?
E20 पेट्रोल, पेट्रोल में 20% इथेनॉल और 80% गैसोलीन का मिश्रण है। भारत सरकार पर्यावरण को बेहतर बनाने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से इथेनॉल सम्मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। इस पहल के तहत, 1 अप्रैल 2023 से देश भर में E20 पेट्रोल की बिक्री शुरू कर दी गई है।
