दुनिया की प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियां छात्रों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के लिए लगातार नए तरीके अपना रही हैं। अमेरिका के 1400 स्कूलों के प्रशासनिक निकायों द्वारा मेटा, स्नैपचैट और टिक टॉक के खिलाफ दायर मुकदमों से जुड़े अंदरूनी दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि कंपनियां युवाओं का ध्यान खींचने और उन्हें लंबे समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैं। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब सोशल मीडिया के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है। अभिभावकों के आंदोलन, कई चर्चित किताबों और विशेषज्ञों ने अकेलेपन, बुलीइंग, खराब खान-पान की आदतों और यौन शोषण जैसी समस्याओं के लिए टेक प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार ठहराया है। पहले बहस मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव तक सीमित थी, लेकिन अब इसका फोकस कक्षाओं में पढ़ाई पर पड़ रहे असर की ओर भी बढ़ गया है। दस्तावेजों और अभिभावकों, शिक्षकों तथा टेक कंपनियों के पूर्व कर्मचारियों से हुई बातचीत के अनुसार कंपनियों ने बच्चों को स्क्रीन से जोड़े रखने के लिए पैरेंट्स,शिक्षकों और यहां तक कि अपनी ट्रस्ट एंड सेफ्टी टीमों की चिंताओं को भी नजरअंदाज किया। टिक टॉक की सुरक्षा टीम वर्षों से स्कूल समय के दौरान नोटिफिकेशन बंद करने की सिफारिश करती रही, लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया। वहीं, स्नैपचैट के रणनीतिक दस्तावेजों में कक्षा के दौरान फोन इस्तेमाल को “अंडर डेस्क टाइम’ कहा गया है। गूगल के प्रबंधकों को जानकारी थी कि यूट्यूब स्कूल के दौरान छात्रों को ऐसे वीडियो सुझाता है, जिनका पढ़ाई से कोई संबंध नहीं होता। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इंटरनेट सुरक्षा और प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए बड़ी टेक कंपनियों की पैरेंट्स-टीचर्स संगठनों से लंबे समय से साझेदारी रही है। 22 हजार स्थानीय चैप्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाली नेशनल पीटीए को सोशल मीडिया कंपनियों से हर साल लगभग 2.40 करोड़ से 4.75 करोड़ रुपए तक की आर्थिक सहायता मिलने की जानकारी भी दस्तावेजों में दर्ज है। लगातार नोटिफिकेशन और अलर्ट भेजे जा रहे हैं – स्नैपचैट ने पढ़ाई के दौरान फोन पर अलर्ट भेजकर बच्चों से क्लास रूम की गतिविधियों का ब्योरा शेयर करने के लिए कहा। – मेटा ने स्कूल में इंस्टाग्राम को प्रमोट करने के लिए ‘टीन एम्बेसडर्स’ को धन दिया। – टिकटॉक ने स्कूलों में उसके आयोजन के कवरेज के लिए पत्रकारों को करोड़ों रु. दिए। एप्स की लत लगाने वाली डिजाइन ने मुश्किलें बढ़ाई एक स्कूल के वकील प्रेविन वॉरेन कहते हैं,अंतहीन और विविध मनोरंजन के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इतने लुभावने हैं कि लत पैदा करते हैं। छात्र स्कूल की पढ़ाई की जगह उन पर ध्यान देते हैं। वहीं इन कंपनियों का तर्क है कि एप्स की लत के लिए बच्चे, स्कूल और मोबाइल बनाने वाली कंपनियां जिम्मेदार हैं। 258 करोड़ रुपए हर्जाना देने के लिए भी कंपनियां तैयार अभी हाल में ग्रामीण केंटुकी के एक छोटे जिले ब्रीथिट काउंटी में स्कूलों को बड़ी चार कंपनियां 258 करोड़ रुपए देने के लिए सहमत हो गई हैं। मेटा 86 करोड़ और स्नैपचैट, टिकटॉक 76-76 करोड़ रुपए और गूगल 19 करोड़ रुपए देगी।
छात्रों को लुभाने के लिए कंपनियां बांट रही फ्री गिफ्ट:सोशल मीडिया कंपनियों पर 1400 से अधिक मुकदमों के अंदरूनी दस्तावेजों से खुलासा
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
Related Posts
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
हमसे संपर्क करने और जुड़ने के लिए मेल करें -
siddhbhoomi@gmail.com Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
© 2025 Siddhbhoomi.com. Designed with ❤️ by Abiral Pandey.
