पूरी दुनिया में स्मोकिंग करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। WHO के मुताबिक दुनियाभर में करीब 130 करोड़ लोग तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें 80 फीसदी कम और मिडिल इनकम वाले देश शामिल हैं। सिगरेट पीना सबसे आम माना जाता है। वहीं दुनियाभर में सिगार, हीटेड टोबैको, हुक्का, खैनी, पाइप, गुटका और हाथ से बनाई जाने वाली बीड़ी या सिगरेट भी तंबाकू में शामिल हैं।
आमतौर पर स्मोकिंग करना फेफड़ों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन इसका असर कोलेस्ट्रॉल और हार्ट पर पड़ता है। सिगरेट से निकलने वाले केमिकल्स और निकोटिन शरीर की आर्टरीज को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि स्मोकिंग का कोलेस्ट्रॉल पर कितना असर पड़ता है।
क्या होता है कोलेस्ट्रॉल
कोलेस्ट्रॉल मोम जैसा फैटी पदार्थ है, जिसकी सही मात्रा होने से हमारा शरीर सेहतमंद रहता है। यह फैटी पदार्थ सीधे ब्लड में नहीं घुल सकता, इसलिए यह शरीर में मौजूद लिपोप्रोटीन का इस्तेमाल करता है। लिपोप्रोटीन, प्रोटीन और फैट से मिलकर बनता है। जोकि ब्लड के जरिए कोलेस्ट्रॉल को पूरे शरीर में ले जाता है, वहीं लिपोप्रोटीन दो तरह का होता है।
LDL
LDL लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन है। जिसको खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। अगर ब्लड में इसका लेवल बढ़ जाता है, तो आर्टरीज की दीवारों पर प्लाक बनने लगता है। जिससे स्ट्रोक, हार्ट अटैक या हार्ट से जुड़ी बीमारियां होने का रिस्क बढ़ सकता है।
HDL
HDL एक हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन है। जिसको अच्छा कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। HDL ब्लड में मौजूद एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल और प्लाक को लेकर लिवर तक जाता है। जिसको लिवर की सहायता से शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। ब्लड में अगर HDL ज्यादा होता है, तो दिल संबंधी जोखिम को कम किया जा सकता है। कोलेस्ट्रॉल जीन्स और लाइफस्टाइल से प्रभावित होता है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो लाइफस्टाइल में स्मोकिंग के बड़ी वजह है जिससे कोलेस्ट्रॉल पर असर पड़ता है। जो लोग स्मोकिंग ज्यादा करते हैं या फिर कई सालों से स्मोक कर रहे हैं, उनका कोलेस्ट्रॉल लेवल बिगड़ सकता है।
स्मोकिंग का कोलेस्ट्रॉल पर असर
एक अध्ययन में पाया गया है कि स्मोकिंग करने वालों की लिपिड प्रोफाइल स्मोकिंग न करने वालों की तुलना में काफी ज्यादा खराब थी। स्मोकिंग करने वाले पुरुषों में 9.6% और महिलाओं में 16.9% ट्राइग्लिसराइड्स अधिक पाया गया। शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स संतुलित होना जरूरी है। वहीं इन पुरुषों में 7.3% और महिलाओं में 4.3% HDL-c कम पाया गया। वहीं जो लोग स्मोकिंग छोड़ चुके हैं, उनका लिपिड लेवल स्मोकिंग न करने वाले और स्मोकिंग करने वालों के बीच में थे।
जिसका मतलब हुआ कि धूम्रपान छोड़ने के बाद काफी हद तक सुधार होता है, लेकिन शरीर में धूम्रपान का असर लंबे समय तक बना रह सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक शरीर में कोलेस्ट्रॉल को बैलेंस करने के लिए स्मोकिंग छोड़ना जरूरी है। क्योंकि यह आपके लिपिड प्रोफाइल के बैलेंस को बिगाड़ता है। जिस कारण हार्ट अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है।
स्मोकिंग से कोलेस्ट्रॉल को नुकसान
स्मोकिंग से शरीर में कोलेस्ट्ऱॉल जमा होने का प्रोसेस तेज हो सकता है। वहीं स्मोकिंग से HDL लेवल कम हो सकता है। क्योंकि सिगरेट के धुएं में एक्रोलिन केमिकल पाया जाता है, जिस कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। यह HDL के फंक्शन को खराब करता है और LDL ऑक्सीडेशन बढ़ता है। जिस वजह से कोलेस्ट्रॉल लिवर तक नहीं पहुंच पाता है और ब्लड में रह जाता है। सिगरेट के धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस होती है, जोकि ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाती है। जिससे कोलेस्ट्रॉल जमा होने का प्रोसेस तेजी से बढ़ता है। इस वजह से आर्टरी सख्त हो जाती है। लगातार स्मोकिंग करने वाले लोगों में हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा ज्यादा बढ़ सकता है।
हार्ट की बीमारियां
स्मोकिंग ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को बढ़ा देता है। ब्लड को चिपचिपा बनाने की वजह से ब्लड क्लॉट की संभावना बढ़ जाती है। LDL लेवल बढ़ने और HDL लेवल कम होने से ब्लड वेसल्स में तेजी से प्लाक बनने लगते हैं। वहीं जब आप स्मोक करते हैं, तो ब्लड वेसल्स मोटी और संकरी हो जाती है। हार्ट और दिमाग तक जाने वाले ब्लड फ्लो को यह ब्लड क्लॉट रोक सकते हैं। यह सभी कारक मिलकर दिल संबंधी बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है।
कोलेस्ट्रॉल को ऐसे रखें बैलेंस
मीठे ड्रिंक्स का सेवन न करें।
स्मोकिंग छोड़ देना चाहिए।
लंच ब्रेक के बाद थोड़ी देर जरूर टहलें।
लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
सप्ताह में 150 मिनट एक्सरसाइज जरूर करना चाहिए।
शराब आदि का सेवन न करें।
ब्लड में कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकने के लिए राजमा, दलिया, नाशपाती और सेब आदि का सेवन करना चाहिए।
ट्रांस फैट्स जैसे पैकेट बंद केक, चिप्स और कुकीज आदि चीजों को नहीं खाना चाहिए।
LDL के लेवल को कम करने के लिए फुल फैट डेयरी और रेड मीट जैसे प्रोडक्ट्स कम लेने चाहिए।
ओमेगा-3 फैटी एसिड वाली चीजें जैसे अखरोट, अलसी के बीज और सैल्मन मछली आदि डाइट में शामिल करना चाहिए।
अगर डॉक्टर ने कोलेस्ट्रॉल की दवा लिखी है, तो डॉक्टर के कहे मुताबिक यह दवाएं लेनी चाहिए।
डॉक्टर से कब मिलें
आराम करते समय या चलते समय सीने में दर्द होना
ज्यादा थकान होना
सांस लेने में तकलीफ होना
हाथ-पैरों में दर्द या सुन्नपन
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में अगर LDL 100 mg/dL से ऊपर या HDL 40 mg/dL से कम आए