राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आगामी 20 सितंबर 2026 (रविवार) को आयोजित होने वाली उप-निरीक्षक भर्ती पुनः परीक्षा-2021 के अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आयोग ने उन अभ्यर्थियों की राह आसान कर दी है जो अपने ऑनलाइन आवेदन के उपयोग में ली गई ‘एसएसओ आईडी’ भूल चुके हैं और इस कारण आवेदन पत्र में आवश्यक संशोधन या अनिवार्य केवाईसी नहीं कर पा रहे हैं। आयोग सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि परीक्षा के लिए पात्र अभ्यर्थियों का आवश्यक डेटा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। इस विशेष सूची में अभ्यर्थी का नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, आवेदन क्रमांक तथा उनकी मूल एसएसओ आईडी जिसके द्वारा तत्समय आवेदन किया गया था अंकित है। अभ्यर्थी यहाँ से अपनी एसएसओ आईडी जानकर वर्तमान संशोधन प्रक्रिया को सुगमता से पूरा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, आयोग द्वारा अभ्यर्थियों के पंजीकृत मोबाइल नंबरों पर भी एसएमएस के माध्यम से आवेदन क्रमांक और एसएसओ आईडी की जानकारी प्रेषित की जा रही है। बंद या बदले हुए मोबाइल नंबर/ईमेल के लिए निःशुल्क समाधान यदि किसी अभ्यर्थी का पूर्व पंजीकृत मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी परिवर्तित हो चुका है और ओटीपी वेरिफिकेशन में समस्या आ रही है, तो आयोग द्वारा इसे संशोधित कराने की पूरी तरह निःशुल्क सुविधा दी गई है। इसके लिए अभ्यर्थी आयोग के ग्रीवेंस पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अथवा, feedback.rpsc@rajasthan.gov.in पर ई-मेल भेज सकते हैं। या आयोग कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। विवरण संशोधित होने के पश्चात अभ्यर्थी ‘फेच एप्लीकेशन फॉर्म’ विकल्प के माध्यम से अपना पुराना रिकॉर्ड नए प्रोफाइल में स्थानांतरित कर सकेंगे। डेमो वीडियो और हेल्प डॉक्यूमेंट जारी प्रक्रिया को पूरी तरह सरल बनाने के लिए आयोग ने हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में हेल्प डॉक्यूमेंट और एक डेमो वीडियो भी जारी किया है। अभ्यर्थी आयोग की वेबसाइट के होम पेज पर उपलब्ध ‘Important Links – Apply Online Link’ के माध्यम से अवलोकन कर प्रक्रिया को समझ सकते हैं। संशोधन न चाहने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी प्रमाणीकरण ‘अनिवार्य’ आयोग की ओर से स्प्ष्ट किया गया है कि जिन अभ्यर्थियों को अपने पूर्व आवेदन में कोई संशोधन नहीं करना है, उन्हें भी अनिवार्य रूप से एक बार अपना फॉर्म ‘एडिट मोड’ में खोलना होगा। वहाँ उन्हें अपनी लाइव फोटो, हस्ताक्षर और अंगूठा निशानी के उपयोग की सहमति प्रदान करनी होगी। इसके बाद ही ‘फाइनल सब्मिट’ बटन पर क्लिक कर ओटीपी दर्ज करना होगा। इस अंतिम प्रमाणीकरण के अभाव में आवेदन प्रक्रिया अधूरी मानी जाएगी। 30 मई है अंतिम तिथि यह प्रक्रिया 16 मई से 30 मई 2026 तक संचालित की जा रही है। निर्धारित तिथि (30 मई) तक अनिवार्य सहमति दर्ज न करने या निर्देशों की अवहेलना करने की स्थिति में अन्य कोई अवसर नहीं दिया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी स्वयं अभ्यर्थी की होगी। आयोग परीक्षा के लिए पात्र सभी अभ्यर्थियों से अपील करता है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना परीक्षा में सम्मिलित होना सुनिश्चित करने के लिए समय रहते इस प्रक्रिया को पूर्ण करें। 3 लाख 83 हजार 97 अभ्यर्थी दे सकेंगे एग्जाम बतादें कि इस परीक्षा में केवल वही 3 लाख 83 हजार 97 अभ्यर्थी फिर से परीक्षा दे सकेंगे, जो पहले आयोजित लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्न पत्रों में उपस्थित रहे थे। भर्ती से जुड़ी आयू सीमा, आरक्षण, योग्यता और अन्य शर्तें 3 फरवरी 2021 को जारी किए गए विज्ञापन एवं 7 जून 2021 को जारी पत्र के अनुसार ही रहेंगी। — एसआई भर्ती परीक्षा-2021 दोबारा होगी:पहले एग्जाम में शामिल 3.83 लाख अभ्यर्थियों को ही मिलेगा मौका, जानें कब होगा आयोजन
एसआई भर्ती-2021, RPSC ने जारी किए SSO आईडी-आवेदन क्रमांक:सभी के लिए KYC जरूरी; मोबाइल नम्बर, ईमेल आईडी में भी होगा फ्री करक्शन
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
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सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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