भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (UG) 2026 एक बार फिर विवादों के घेरे में है। राजस्थान के सीकर में एक ऐसा ‘गेस पेपर’ सामने आया है, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि यह असली परीक्षा के पेपर से काफी हद तक मेल खाता है। इस खुलासे के बाद नीट परीक्षा की शुचिता पर फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में एक और सेंध लगने की आशंका बढ़ गई है।
राजस्थान स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 5 मई को हुई NEET परीक्षा के 720 अंकों में से लगभग 600 अंकों के प्रश्न उन प्रश्नों से मिलते-जुलते थे जो कुछ छात्रों के बीच पहले से ही बांटे गए थे। जांचकर्ता अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह सामग्री केवल एक असाधारण रूप से सटीक “गेस पेपर” थी, या फिर परीक्षा से पहले प्रश्न बैंक के असली लीक का हिस्सा थी।
यह विवाद इसलिए और गहरा गया है क्योंकि जांचकर्ताओं का दावा है कि कई प्रश्नों में उत्तर के विकल्पों का क्रम भी उस सामग्री से मेल खाता था जो परीक्षा से पहले साझा की गई थी। सूत्रों ने बताया कि यह कथित प्रश्न पत्र सबसे पहले NEET परीक्षा से दो दिन पहले सीकर में सामने आया था, और इसे छात्रों को 20,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक की कीमतों पर बेचा गया था। परीक्षा की पिछली रात तक, कथित तौर पर इसकी प्रतियां लगभग 30,000 रुपये प्रति प्रति के हिसाब से बांटी जा रही थीं।
SOG की जांच में पता चला है कि यह संदिग्ध दस्तावेज़ चूरू के एक MBBS छात्र से जुड़ा है, जो फिलहाल केरल के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है। आरोप है कि उसने 1 मई को सीकर में अपने एक दोस्त के साथ यह सामग्री साझा की थी, जिसके बाद यह PG आवासों, कोचिंग संस्थानों से जुड़े नेटवर्क, करियर सलाहकारों और परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के बीच तेज़ी से फैल गई।
जांचकर्ताओं का दावा है कि इस सामग्री में भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के 300 से अधिक हस्तलिखित प्रश्न शामिल थे, और पूरे दस्तावेज़ में लिखावट एक जैसी ही लग रही थी। बताया जा रहा है कि लगभग 140 प्रश्न अंतिम परीक्षा में आए प्रश्नों से हूबहू मेल खाते थे। चूंकि NEET के प्रत्येक प्रश्न के लिए चार अंक निर्धारित होते हैं, इसलिए जांचकर्ताओं का मानना है कि यदि ये आरोप सच साबित होते हैं, तो इस मेल का रैंकिंग और दाखिलों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह सामग्री एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के ज़रिए बड़े पैमाने पर फैलाई गई थी। मोबाइल फोन से बरामद कुछ चैट में “कई बार फॉरवर्ड किया गया” (forwarded many times) का टैग लगा हुआ था, जिससे यह संकेत मिलता है कि परीक्षा से पहले यह सामग्री बड़ी संख्या में उम्मीदवारों तक पहुंच चुकी हो सकती है। अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या इसकी छपी हुई प्रतियां ऑफ़लाइन भी बांटी गई थीं। सीकर में एक PG ऑपरेटर जांच के दायरे में आ गया है। जांचकर्ताओं को पता चला है कि उसने कथित तौर पर परीक्षा से पहले ही कुछ सामग्री हासिल की थी और उसे आगे बढ़ाया था, और बाद में परीक्षा खत्म होने के बाद पुलिस और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। जांचकर्ताओं को शक है कि यह शिकायत शायद खुद को बचाने की एक कोशिश थी, क्योंकि उसे पकड़े जाने का डर सताने लगा था।
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NTA अब आगे की कार्रवाई पर फैसला लेने से पहले राजस्थान SOG की जांच के नतीजों का इंतज़ार कर रही है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि यह नेटवर्क कितना बड़ा है, कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ (प्रश्नों का सेट) का सोर्स क्या है, और क्या इसमें कोई संगठित गिरोह शामिल था।
2024 के जख्म हुए ताज़ा
इस घटना ने 2024 के नीट विवाद की यादें ताज़ा कर दी हैं, जब पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स को लेकर पूरे देश में प्रदर्शन हुए थे। हालांकि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा परीक्षा (Re-exam) से इनकार कर दिया था, लेकिन परीक्षा प्रणाली में सुधार के सख्त निर्देश दिए थे। 2026 में फिर से ऐसे आरोपों का सामने आना NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या यह केवल एक इत्तेफाक है या एक बड़ा भ्रष्टाचार? राजस्थान SOG की जांच के नतीजे ही तय करेंगे कि NEET 2026 का भविष्य क्या होगा। फिलहाल, लाखों परीक्षार्थी और उनके अभिभावक न्याय की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं।
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