ऑपरेशन सिंदूर को आज एक वर्ष पूरा हो गया। इस अवसर पर पूरा देश हमारे सशस्त्र बलों के शौर्य को सराह रहा है। राष्ट्रपति, प्रधनमंत्री, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, तमाम राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी अपने अपने बयानों के जरिये सेना के शौर्य को सराहने के साथ ही आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की भारत की नीति को दोहरा रहे हैं। इस बीच, भारतीय सशस्त्र बलों ने बीती रात ठीक एक बजकर पांच मिनट पर एक विशेष वीडियो जारी किया। यही वह समय था जब सात मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था। भारतीय वायु सेना ने इस वीडियो के साथ लिखा, “न्याय हुआ। कार्रवाई में सटीक, स्मृति में अमर— ऑपरेशन सिंदूर जारी है। भारत कुछ भूलता नहीं, भारत किसी को माफ नहीं करता।” इस संदेश ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ केवल चेतावनी नहीं देता, बल्कि कठोर कार्रवाई भी करता है। वीडियो में यह भी रेखांकित किया गया कि पूरी कार्रवाई केवल अठासी घंटों में पूरी कर ली गई थी।
हम आपको याद दिला दें कि यह अभियान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें छब्बीस निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। बहावलपुर में जैश का मुख्यालय, मुरीदके में लश्कर का अड्डा, सियालकोट, मुजफ्फराबाद, कोटली और भीमबर के कई आतंकी ढांचे भारतीय हमलों में ध्वस्त किए गए। इन हमलों में कम से कम सौ आतंकवादी मारे गये थे।
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देखा जाये तो ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामरिक आत्मविश्वास का खुला प्रदर्शन था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल तस्वीरों में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी तस्वीरें लगाकर इस अभियान के महत्व को रेखांकित किया। यह संदेश साफ था कि आतंकवाद के खिलाफ भारत अब किसी भी प्रकार के दबाव या परमाणु धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है।
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग रहा। ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित लक्ष्य पहचान प्रणाली, नेटवर्क आधारित युद्ध संचालन और सटीक मिसाइल प्रहार ने भारत की सैन्य क्षमता को नई ऊंचाई पर पहुंचाया। हम आपको यह भी बता दें कि पिछले एक वर्ष में भारत ने अपनी सैन्य तैयारी को और मजबूत करने के लिए कई बड़े फैसले किए हैं। रूस से अतिरिक्त एस-400 मिसाइल प्रणाली, फ्रांस से एक सौ चौदह राफेल लड़ाकू विमान, अमेरिका से पी-8आई निगरानी विमान और नई पीढ़ी के ड्रोन खरीदने की प्रक्रिया तेज की गई है।
भारत ने अपनी समुद्री ताकत को भी मजबूत किया है। तीसरी स्वदेशी परमाणु संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन को नौसेना में शामिल किया गया। इसके अलावा अग्नि पांच जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों के सफल परीक्षण ने भारत की रणनीतिक शक्ति को और मजबूत किया है। पांच हजार किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि पांच मिसाइल अब एशिया के बड़े हिस्से तक अपनी पहुंच रखती है।
दूसरी ओर पाकिस्तान ने भी इस अवसर पर बयान जारी करते हुए दावा किया कि वह भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी सैन्य क्षमताएं बढ़ाता रहेगा। पाकिस्तान सेना ने पिछले वर्ष हुए संघर्ष को “मारका ए हक” नाम दिया है और उसे अपने सैन्य इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बताया है। हालांकि पाकिस्तान के जवाबी हमलों को भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया था और अंततः दस मई को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हॉटलाइन वार्ता के बाद संघर्ष विराम लागू हुआ। इस संघर्ष विराम की गुहार पाकिस्तान ने लगाई थी।
हम आपको यह भी बता दें कि पाकिस्तान ने अपने बयान में उन्नत प्रौद्योगिकी, भविष्य के युद्धक्षेत्र और आधुनिक हवाई शक्ति की बात की, लेकिन वास्तविकता यह है कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना की तैयारी, समन्वय और तकनीकी श्रेष्ठता को पूरी दुनिया के सामने स्थापित कर दिया। भारतीय सेना ने जिस तेजी और सटीकता से आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाया, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ किसी भी खतरे का स्रोत जहां भी होगा, वहां तक पहुंचकर कार्रवाई करने की क्षमता रखता है।
इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मिशन को आधुनिक युद्धकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए इसकी अद्वितीय सटीकता और तीनों सेनाओं के निर्बाध समन्वय का उल्लेख किया। उन्होंने एक संदेश में कहा कि यह अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय संकल्प और तत्परता का एक शक्तिशाली प्रतीक है। सिंह ने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर हम अपने सशस्त्र बलों की वीरता और बलिदान को सलाम करते हैं, जिनका साहस और समर्पण राष्ट्र की रक्षा करता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन के दौरान उनके कार्यों ने अद्वितीय सटीकता, निर्बाध समन्वय और विभिन्न सेवाओं के बीच गहन तालमेल को दर्शाया, जिससे आधुनिक सैन्य अभियानों के लिए एक मानदंड स्थापित हुआ।’’ रक्षा मंत्री ने कहा कि यह अभियान ‘‘राष्ट्रीय संकल्प और तत्परता का एक शक्तिशाली प्रतीक है, जो दर्शाता है कि हमारी सशस्त्र सेनाएं सबसे महत्वपूर्ण समय पर निर्णायक कार्रवाई करने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में भारत की निरंतर प्रगति का भी प्रमाण है, जो क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ लचीलेपन को भी मजबूत करता है।’’
हम आपको यह भी बता दें कि राजनाथ सिंह आज जयपुर में संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों और सेना की युद्ध तैयारियों की व्यापक समीक्षा करेंगे। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह सम्मेलन साइबर, अंतरिक्ष और संज्ञानात्मक युद्ध के उभरते क्षेत्रों में चुनौतियों का मूल्यांकन करने और निर्णायक बढ़त वाली लचीली और भविष्य के लिए तैयार सेना के लिए क्षमता विकास का रोडमैप तैयार करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।
देखा जाये तो ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ केवल एक सैन्य अभियान की याद नहीं है, बल्कि यह उस बदलते भारत की कहानी है जिसने आतंकवाद के खिलाफ अपने इरादों को और अधिक कठोर, स्पष्ट और निर्णायक बना दिया है। भारतीय सेना का शौर्य, तकनीकी दक्षता और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता आज देशवासियों के आत्मविश्वास का सबसे बड़ा आधार बन चुकी है।
