बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद अब राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी सिलसिले में आज मुख्यमंत्री आवास पर भाजपा और जदयू विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।
शिवराज सिंह चौहान बने पर्यवेक्षक
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इस राजनीतिक बदलाव को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बिहार का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। उनकी मुख्य जिम्मेदारी विधायक दल की बैठक में अगले नेता (मुख्यमंत्री) के चयन की प्रक्रिया की निगरानी करना है।
विजय कुमार चौधरी का बयान
बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी ने साफ किया है कि इस बार मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा की भूमिका निर्णायक होगी। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री पद के लिए नाम का सुझाव भाजपा को देना है। इसके बाद एनडीए विधायक दल की बैठक में नेता का औपचारिक चुनाव होगा। नीतीश कुमार के 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य बनने के बाद अब जल्द ही नई सरकार के गठन की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू होगी।
विजय चौधरी ने संकेत दिए कि एनडीए के सभी घटक दलों के बीच बातचीत जारी है, हालांकि मंत्रिमंडल के विस्तार पर अभी कोई चर्चा नहीं हुई है।
भाजपा का मुख्यमंत्री?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार बिहार में शक्ति संतुलन बदल सकता है। संभावना जताई जा रही है कि इस बार मुख्यमंत्री भाजपा कोटे का हो सकता है। दावेदारों में सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। जदयू कोटे से उप-मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। कुछ रिपोर्टों में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के नाम की भी चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
माना जा रहा है कि नीतीश कुमार 13 अप्रैल को इस्तीफा दे सकते हैं और 14 अप्रैल को ‘खरमास’ समाप्त होने के बाद 15 अप्रैल के आसपास नई सरकार का शपथ ग्रहण हो सकता है।