दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) ने राष्ट्रीय राजधानी में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। बुधवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को लिखे एक औपचारिक पत्र में, कांग्रेस ने मतदान विवरण प्रमाणित करने से जुड़े ‘कानूनी और प्रक्रियात्मक जोखिमों’ पर तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र में पार्टी ने सत्यापन जिम्मेदारियों, पारदर्शिता और संदर्भ के रूप में पूर्व मतदाता सूचियों के उपयोग से संबंधित मुद्दों पर भी प्रकाश डाला।
कांग्रेस की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) प्रतिदिन प्रति बूथ भरे हुए 50 गणना प्रपत्र एकत्र कर सकते हैं और उनकी सत्यता प्रमाणित करने वाले वचनपत्र के साथ उन्हें जमा कर सकते हैं, जो न तो व्यावहारिक है और न ही कानूनी रूप से उचित।
यादव ने पत्र में कहा, “मतदाता आवेदन विवरणों का सत्यापन बूथ स्तर के अधिकारियों, सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारियों और मतदाता पंजीकरण अधिकारियों जैसे निर्वाचन अधिकारियों का वैधानिक दायित्व है।
राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले मतदान एजेंटों से ऐसे विवरणों को प्रमाणित करने की अपेक्षा करना आयोग की जिम्मेदारी दलों पर डाल सकता है और इससे अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो सकता है।’’
पार्टी ने 2002 की मतदाता सूची को आधार दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि परिसीमन के बाद से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में काफी बदलाव हुए हैं।
यादव ने कहा, “2002 और वर्तमान निर्वाचन क्षेत्रों के बीच उचित क्षेत्रवार मानचित्रण के बिना मतदाताओं के नामों का सटीक पता लगाना बेहद मुश्किल होगा।”
उन्होंने आयोग से 2002 की मतदाता सूचियों का निर्वाचन क्षेत्रवार विवरण मुद्रित और डिजिटल दोनों प्रारूपों में उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
कांग्रेस ने मतदाता पहचान में सहायता के लिए अंतिम रूप दिए जाने के बाद फोटोयुक्त मतदाता सूचियों की आपूर्ति की भी मांग की।
