बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच एपल, मेटा जैसी टेक कंपनियों में नौकरी करने के इच्छुक युवाओं को एक सीईओ की सलाह काम आ सकती है। 1.8 अरब डॉलर (16,500 करोड़ रुपए) वैल्युएशन वाली वर्कफ्लो सॉफ्टवेयर कंपनी असाना के नए सीईओ डैन रोजर्स खुद भी माइक्रोसॉफ्ट, डेल, अमेजन वेब सर्विसेज, सेल्सफोर्स और सर्विसनाउ सहित प्रमुख तकनीकी कंपनियों में काम कर चुके हैं। रोजर्स का कहना है कि पहले की पीढ़ी के मुकाबले जेन जी के लिए सिलिकॉन वैली में नौकरी पाना ज्यादा आसान है। सबसे अच्छा रास्ता बड़ी कंपनियों की जरूरत के मुताबिक तकनीकी कौशल सीखना है। बड़ी टेक कंपनियां ऐसे लोगों को पसंद करती हैं जो पहले से किसी छोटी या मध्यम कंपनी में अनुभव हासिल करके आते हैं। ऐसा रिजूमे बनाएं जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो रोजर्स कहते हैं, ‘भले ही इसमें कुछ साल लग जाएं और कम प्रतिष्ठित कंपनियों में काम करना पड़े। लेकिन आपके रेज्यूमे में दर्ज आपके अनुभव और कौशल को खारिज कर पाना एआई के लिए भी आसान नहीं होगा। हो सकता है कि सीधे मुख्य द्वार के बजाय थोड़ा घूमकर टेक सेक्टर की बड़ी कंपनियों में प्रवेश मिले, लेकिन ऐसा होगा जरूर।’ सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है अगर आप छोटी उम्र से ही धीरे-धीरे कौशल विकसित करते हैं, तो अच्छा वेतन और पद बाद में अपने आप मिल जाएंगे। यह किसी अचानक होने वाले कारनामे से धीमा लेकिन ज्यादा भरोसेमंद है। आप जितना ज्यादा सीखेंगे उतनी ही अच्छी नौकरी पाने के अवसर ज्यादा बनेंगे। सफल होने के लिए आवश्यक कौशल हासिल करने का कोई शॉर्टकट नहीं है।’ डैन रोजर्स के सुझाव सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट, तकनीकी कौशल और वास्तविक काम का अनुभव दिखाएं।
करियर की शुरुआत छोटे रोल से करें और धीरे-धीरे अपनी विश्वसनीयता बनाएं।
सीधे बड़ी कंपनियों में प्रवेश की बजाय अलग-अलग भूमिकाओं का अनुभव लेकर टेक ईकोसिस्टम में जगह बनाएं।
ऐसा रिजूमे बनाएं जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो
रोजर्स ने बताए टेक सेक्टर में नौकरी पाने के गुर:अनुभवी सीईओ की सलाह- बड़ी कंपनियों के मुताबिक तकनीकी कौशल सीखें
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
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सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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