पश्चिम एशिया में तनाव ने आज नया और गंभीर मोड़ ले लिया जब इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान की राजधानी तेहरान पर व्यापक सैन्य हमला किया। इस संयुक्त अभियान को इजराइल ने शेर की दहाड़ नाम दिया है तो वहीं अमेरिका ने इस हमले को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया है। उधर, ईरान ने इजराइल पर तगड़ा जवाबी हमला करते हुए चेताया है कि युद्ध तुमने शुरू किया लेकिन इसे खत्म हम करेंगे। साथ ही इन हमलों के साथ ही तेहरान और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से चल रहे परमाणु विवाद के कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा है।
हम आपको बता दें कि ईरान पर हमले के दौरान तेहरान के मध्य क्षेत्र से घने धुएं के गुबार उठते देखे गए। स्थानीय मीडिया के अनुसार तीन से चार विस्फोट राजधानी में अलग अलग स्थानों पर हुए। पहला धमाका ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय परिसर के निकट हुआ, जो देश के सबसे संवेदनशील स्थलों में गिना जाता है। हालांकि बताया गया कि 86 वर्षीय खामेनेई उस समय तेहरान में मौजूद नहीं थे और उन्हें पहले ही एक सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया था।
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ईरानी सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि देशभर में अनेक ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह एक समन्वित और विस्तृत सैन्य अभियान है। खामेनेई के परिसर की ओर जाने वाले मार्गों को सील कर दिया गया है और राजधानी में अतिरिक्त विस्फोटों की आवाजें सुनाई देती रहीं। संकट की गंभीरता को देखते हुए इराक ने भी अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
इस बीच, इजराइल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि यह कार्रवाई खतरों को समाप्त करने के उद्देश्य से की गई है, हालांकि उन्होंने विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। सूत्रों के अनुसार इस अभियान की योजना कई महीनों से वाशिंगटन के साथ समन्वय में बनाई जा रही थी और इसके प्रारंभ की तिथि कुछ सप्ताह पहले तय कर ली गई थी। बताया गया है कि अभियान का प्रारंभिक चरण कम से कम चार दिनों तक चल सकता है। सुबह के समय हमले का उद्देश्य ईरानी पक्ष को चकित करना था, क्योंकि दिन के उजाले में हमले की संभावना कम आंकी जा रही थी।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के बाद अपने पहले बयान में कहा कि अमेरिका और इजराइल ने मिलकर बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की है जिसका उद्देश्य ईरान से उत्पन्न आसन्न खतरों का उन्मूलन करना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरानी मिसाइल उद्योग को नष्ट कर देगा और उसकी नौसेना को भी समाप्त कर देगा। ट्रंप ने कहा कि वहां हमारा एक विशाल नौसैनिक जमावड़ा है। उन्होंने हाल के सप्ताहों में पश्चिम एशिया में विमानवाहक पोतों, लड़ाकू विमानों और निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोतों की तैनाती का भी उल्लेख किया। इनमें जेराल्ड आर फोर्ड और अब्राहम लिंकन जैसे बड़े युद्धपोत भी शामिल हैं।
ट्रंप ने यह भी कहा कि वह ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ताओं के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका शांति पूर्ण समाधान चाहता है, परंतु यदि आवश्यक हुआ तो कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय अभी शेष है, लेकिन वार्ता सार्थक होनी चाहिए।
हम आपको बता दें कि इस हमले की पृष्ठभूमि में पिछले साल जून माह में इजराइल और ईरान के बीच 12 दिन तक चला हवाई संघर्ष भी है। उस संघर्ष के बाद अमेरिका और इजराइल ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाया तो फिर से कार्रवाई की जाएगी। तेहरान ने भी चेतावनी दी थी कि किसी भी उकसावे की स्थिति में वह क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य बलों और ठिकानों को निशाना बना सकता है।
आज के हमलों के तुरंत बाद इजराइल में सायरन बज उठे और नागरिकों को संभावित मिसाइल हमलों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई। नागरिकों से कहा गया है कि वह सुरक्षित आश्रय स्थलों के पास रहें और अनावश्यक यात्रा से बचें। इस बीच इस प्रकार की भी खबरें हैं कि ईरान ने भी इजराइल पर एक साथ से कई मिसाइल दाग दी हैं और इजराइल में जगह जगह धमाके सुनाई दे रहे हैं।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात पर भी इसका असर पड़ा है। तेहरान और इजराइल के हवाई क्षेत्र में पाबंदियों के कारण कई उड़ानों का मार्ग बदला गया। भारत की राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया ने तेल अवीव मार्ग पर अपनी सेवाएं एक सप्ताह के लिए स्थगित करने की घोषणा की। दिल्ली से तेल अवीव जा रही एक उड़ान को हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण मुंबई की ओर मोड़ना पड़ा है।
इसी बीच, इजरायल में भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षा परामर्श जारी किया है। दूतावास ने सभी भारतीयों से अत्यधिक सतर्क रहने, स्थानीय प्रशासन और होम फ्रंट कमान के निर्देशों का पालन करने तथा सुरक्षित आश्रयों के निकट रहने की अपील की है। आपात स्थिति के लिए चौबीसों घंटे सहायता उपलब्ध कराने की भी जानकारी दी गई है।
देखा जाये तो समूचे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है। अभी तक हताहतों की स्पष्ट संख्या सामने नहीं आई है, लेकिन सैन्य और कूटनीतिक हलकों में तीव्र गतिविधि जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन निर्णायक हो सकते हैं, क्योंकि यदि प्रारंभिक चार दिन का अभियान और विस्तृत हुआ तो इसका प्रभाव पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति पर पड़ेगा। फिलहाल विश्व समुदाय की निगाहें तेहरान, तेल अवीव और वाशिंगटन पर टिकी हैं, जहां से आगे की दिशा तय होगी।
