फरवरी 2026 में 9 करोड़ रुपए के चेक बाउंस मामले में सजा के बाद राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया है। यह मामला उनकी होम-प्रोडक्शन फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है। इस फिल्म के लिए उन्होंने कर्ज लिया था, जो ब्याज समेत बढ़ता गया और मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। हंगामा, हलचल जैसी फिल्मों से कॉमेडी किंग बने 2003 में फिल्म हंगामा, 2005 में गरम मसाला, 2006 में चुप चुप के, 2006 में फिर हेरा फेरी और 2007 में भूल भुलैया जैसी फिल्मों ने उन्हें कॉमेडी मे पहचान मिली। कॉमिक डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ उन्होंने लगभग 8 से 10 फिल्मों मे काम किया है। बेस्ट वर्सटाइल एक्टर अवॉर्ड जीत चुके हैं राजपाल राजपाल यादव को यश भारती अवॉर्ड मिला, जो उत्तर प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान है। उन्हें यह अवॉर्ड 2003 में फिल्म ‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं’ के लिए मिला। यह सम्मान उनके कॉमेडी और गंभीर अभिनय के रोल के लिए दिया गया था। इससे पहले यह अवॉर्ड अमिताभ बच्चन और जया बच्चन जैसे बड़े नामों को मिल चुका है। उन्हें फिल्मफेयर और आईफा जैसे प्लेटफॉर्म पर बेस्ट कॉमिक एक्टर के लिए नॉमिनेट किया गया, लेकिन वे यह अवॉर्ड नहीं जीत पाए। ‘मुंबई मे पहला सपना सिर्फ जिंदा रहना था’ एनएसडी से पढ़ाई पूरी होने के बाद राजपाल मुंबई आए। शुरुआत में उन्हें कोई सपोर्ट नहीं मिला। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनका पहला सपना मुंबई में जिंदा रहना था। कुछ समय के संघर्ष के बाद उन्हें काम मिलना शुरू हो गया। स्ट्रगल के दिनों में राजपाल ने 20-22 स्ट्रगलिंग एक्टर्स को अपने घर पर खाना खिलाया। एक इंटरव्यू मे नवाजुद्दीन सिद्दीकी बताते हैं कि, ‘राजपाल का घर लंगर जैसा था, फ्री का खाना और रहना।’ छोटू और बटला कहते थे स्कूल के दोस्त राजपाल यादव की हाइट लगभग 5 फीट 1 इंच है। स्कूल में छोटी हाइट की वजह से दोस्त उन्हें छोटू और बौना कहकर बुलाते थे। 20 साल की उम्र में गांव की ऑर्डनेंस क्लोदिंग फैक्ट्री में नौकरी मिली। 20 साल की उम्र में शादी राजपाल यादव ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वे लगभग 20 साल के थे, तब उनके परिवार ने उनकी शादी करा दी थी। उस समय वे गांव में ही रहते थे और नौकरी की शुरुआत कर रहे थे। बेटी के जन्म के 15 मिनट बाद पत्नी का निधन एक इंटरव्यू में राजपाल यादव ने बताया कि वे 20 साल के थे जब घरवालों के दबाव में उनकी शादी कराई गई। उनकी पहली पत्नी का नाम करुणा था। एक साल बाद बेटी ज्योति का जन्म हुआ, लेकिन डिलीवरी के 15 मिनट बाद ही उनकी पत्नी का निधन हो गया। वे कहते हैं, ‘मैं अगले दिन उनसे मिलने वाला था, लेकिन उनकी डेड बॉडी को कंधे पर उठाकर ले गया। 20 साल की उम्र में इतना दर्द सहना आसान नहीं होता।’ इसके बाद वे अकेले पिता बन गए और ज्योति की देखभाल उनकी मां और भाभी ने की। राजपाल ने एक इंटरव्यू में बताया कि दूसरी पत्नी राधा से उनकी मुलाकात कनाडा में हुई थी। उस समय वे सनी देओल और प्रीति जिंटा की फिल्म हीरो: लव स्टोरी ऑफ स्पाई की शूटिंग कर रहे थे। वहीं एक कॉमन फ्रेंड के जरिए मुलाकात हुई और 10 जून 2003 को दोनों ने शादी कर ली। 2016 में अपनी पोलिटिकल पार्टी बनाई 2016 में राजपाल यादव ने सर्व संभाव पार्टी (SSP) नाम से नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च की। पार्टी का गठन वृंदावन में हुआ था। वे पार्टी के जनरल सेक्रेटरी और स्टार कैंपेनर थे, लेकिन खुद चुनाव नहीं लड़ने वाले थे। पार्टी का मोटो, ‘विवाद की नहीं, संवाद की राजनीति’ था। उन्होंने गीता, कुरान, बाइबिल, गुरु ग्रंथ साहिब, रामायण और संविधान पर हाथ रखकर ईमानदारी से काम करने की कसम खाई। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 403 में से करीब 390-400 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया। पार्टी का मुख्यालय लखनऊ में था। उनके दो भाई श्रीपाल सिंह यादव (बिसलपुर) और राजेश सिंह यादव (तिलहर) पार्टी से चुनाव लड़े, लेकिन पार्टी को कोई बड़ी सफलता नहीं मिली। 3 बार मौत से बचे राजपाल यादव एक इंटरव्यू मे राजपाल यादव बताते हैं कि वो तीन बार जानलेवा हादसों से बचे हैं। एक बार गंगा जी में नहाते समय वे गहरे पानी में चले गए और बेहोश हो गए थे। इसके अलावा एक बार बैलगाड़ी के नीचे आने से और एक बार जंगली कुत्तों के हमले जैसी स्थिति से भी वे बाल-बाल बचे। स्टोरी- सृष्टि सिंह ————————————————— ये खबर भी पढ़ें- ICC विमेंस प्लेयर ऑफ द मंथ बनीं शेफाली वर्मा:लड़कों की एकेडमी में ट्रेनिंग ली, जानें प्रोफाइल भारतीय क्रिकेट टीम की स्टार ओपनर शेफाली वर्मा को ICC विमेंस प्लेयर ऑप द मंथ चुना गया है। यह अवॉर्ड जीतने वाली वो दूसरी भारतीय महिला क्रिकेटर है। 2 नवंबर को मुंबई में खेले गए विमेंस वर्ल्ड कप के फाइनल में वो प्लेयर ऑफ द मैच बनी थीं। पूरी खबर पढ़ें…
चेक बाउंस मामले में तिहाड़ पहुंचे राजपाल यादव:स्ट्रगलिंग एक्टर्स को फ्री खाना-रहना देते थे, बेटी के जन्म पर पत्नी को खोया; जानें प्रोफाइल
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
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सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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