भुवनेश्वर, पांच नवंबर ओडिशा सरकार ने बृहस्पतिवार को चक्रवात ‘अर्नब’ और उसके बाद तीन दक्षिणी जिलों में आई बाढ़ के असर को देखते हुए, केंद्रीय सहायता के रूप में 2,526 करोड़ रुपये की मांग की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। राज्य सरकार ने राज्य में चक्रवातों और बाढ़ के असर को कम करने और इसका स्थायी समाधान निकालने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की विशेष सहायता की मांग की है।
यह जानकारी विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) राजेश पी. पाटिल ने पत्रकारों को दी। उन्होंने यह बात केंद्रीय टीम के साथ बैठक के बाद कही, जो राज्य के गंजाम, गजपति और कंधमाल जिलों में चक्रवात ‘अर्नब’ और उसके बाद आई बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने आई थी। पाटिल ने कहा कि आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सिंचाई सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए विशेष अनुदान की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव अनु गर्ग की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में, राज्य सरकार ने केंद्रीय टीम को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की गई। इस बैठक में गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव रवि शंकर के नेतृत्व वाली आठ सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम भी शामिल थी। अपनी यात्रा के दौरान टीम ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी से भी मुलाकात की।
ओडिशा का अपना दौरा समाप्त करने से पहले, टीम ने स्थिति पर चर्चा की। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, माझी ने राज्य में चक्रवातों और बाढ़ की समस्या को कम करने के लिए एक स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को अक्सर बाढ़, चक्रवात और लू जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है।
बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि इन घटनाओं से राज्य के विकास कार्यों में बाधा आती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि केंद्रीय टीम अपनी रिपोर्ट में तत्काल राहत और पुनर्निर्माण सहायता के लिए सिफारिशों के साथ-साथ, दीर्घकालिक और स्थायी समाधानों पर भी जोर दे। माझी ने राज्य में चक्रवात और बाढ़ को झेल सकने वाले बुनियादी ढांचे की सख्त जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि इस तरह का बुनियादी ढांचा ओडिशा के लोगों के लिए एक स्थायी समाधान प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि राज्य का विकास बाधित होने के बजाय और तेज हो।
