लखनऊ, पांच नवंबर समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजकों और प्रायोजकों से विवादित कथावाचकों से दूर रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वाले लोग सामाजिक वैमनस्य पैदा कर सकते हैं और उन्हें आमंत्रित करने वालों की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। यादव की यह टिप्पणी कथावाचक धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा भगवान कृष्ण और भगवान राम के पिता को लेकर दिए गए बयानों पर जारी विवाद के बीच आई है।
यादव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में शास्त्री का नाम लिए बिना कहा, “दुष्मुखी लोगों के संबंध में शासन-प्रशासन के साथ ही उनके कार्यक्रम करवाने वाले सभी आयोजकों और प्रायोजकों से विनम्र आग्रह है कि वे ऐसे तथाकथित कथावाचकों से दूर ही रहें।”
उन्होंने कहा, “ऐसे एक-दो और भी तथाकथित कथावाचक हैं, जो बोलने और पहनने से कथावाचक तो दिखते हैं, लेकिन कथा और प्रवचन उनका व्यवसाय है। वे समय-समय पर अपनी भौतिक उपलब्धियों का भोंडा प्रदर्शन करते-करवाते रहते हैं। ऐसे लोग सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए हमेशा अनर्गल बातें करते हैं।
धन ही इनका धर्म होता है।”
यादव ने कहा, “ आयोजकों और प्रायोजकों को यह सोचना चाहिए कि ऐसे कथावाचक कुछ भी कहकर राजनीतिक संरक्षण पाकर बच निकलेंगे, लेकिन आयोजकों और प्रायोजकों को उसी शहर में जनता के बीच रहना है। उनके कुवचनों से पैदा हुए सामाजिक वैमनस्य का शिकार आयोजकों को ही होना पड़ सकता है।”
उन्होंने कहा, “जब ऐसे कथावाचक जनता के बीच नहीं होंगे, तो लोग उन्हें आमंत्रित करने वालों को ही अपने आक्रोश का निशाना बनाएंगे। आस्थावान लोगों को लगेगा कि भगवान के बारे में अपशब्द और गलत विचार व्यक्त करने वालों के विचारों से आयोजक और प्रायोजक भी सहमत हैं।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर श्रद्धालु आयोजकों और प्रायोजकों के विरोधी हो जाएंगे।
उन्होंने आगाह किया कि ऐसे लोगों को बुलाकर स्थानीय स्तर पर अपनी धाक जमाने की कोशिश करने वालों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। जनता के बीच उनकी धर्म और भगवान विरोधी छवि बन सकती है। यादव ने कहा कि सामान्य शब्दों में कहें तो ऐसे लोगों को ‘लेने के देने पड़ जाएंगे’ और उनकी सारी राजनीति धरी की धरी रह जाएगी।
उन्होंने कहा, “अतः आयोजकों-प्रायोजकों से पुन: आग्रह है कि समाज-सनातन के बीच खाई पैदा करने वाले ऐसे लोगों को खाद-पानी देकर उनकी विषबेल न बढ़ाएं और न ही ईशनिंदा में भागीदार बनें, अन्यथा इनके मौखिक पापों की सजा उन्हें भी भुगतनी पड़ेगी।”
यादव ने कहा, “देश में अनेक सच्चे विचारक और वक्ता उपलब्ध हैं, जिन्हें वैदिक एवं औपनिषदिक ज्ञान की गहरी समझ है और जो महाकाव्यों के संदेशों की ऊंचाइयों से परिचित हैं। आयोजकों और प्रायोजकों को ऐसे सहृदय और विद्वान लोगों को आमंत्रित करना चाहिए, ताकि मानवीय जीवन को बेहतर बनाने का पुण्य कमाया जा सके।”
