विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने शनिवार को केरलम सरकार पर आरोप लगाया कि वह कन्नूर और पलक्कड़ में केरल अवसंरचना निवेश कोष बोर्ड (केआईआईएफबी) की मदद से प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण की सतर्कता जांच का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। एक बयान में विजयन ने आरोप लगाया कि सरकार भूमि अधिग्रहण को लेकर एक गलत धारणा बना रही है और बिना किसी विभागीय जांच के या किसी औपचारिक रिपोर्ट पर भरोसा किए बिना ही जांच के आदेश दे रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग करने जैसा है और इसका मकसद विकास परियोजनाओं को संदेह के घेरे में लाना है। विजयन ने कहा कि भूमि अधिग्रहण की यह प्रक्रिया करीब दो दशक पहले शुरू हुई थी और पिछली यूडीएफ सरकार के कार्यकाल में भी जारी रही थी। उन्होंने कहा कि इसे मौजूदा सरकार जिस तरह अचानक और गुप्त रूप से उठाया गया कदम बता रही है, वैसा नहीं है।
उन्होंने कहा कि कन्नूर हवाई अड्डे के आसपास औद्योगिक पार्क और सहायक बुनियादी ढांचे का विकास करना हवाई अड्डे को पूरी तरह से संचालित करने और निवेश आकर्षित करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उद्योगों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पर्याप्त जमीन की कमी राज्य के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों में से एक है। विजयन ने कहा कि भूमि अधिग्रहण से संबंधित सभी रिकॉर्ड और वित्तीय विवरण सरकार के पास उपलब्ध हैं और उनकी जांच की जा सकती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केआईआईएफबी केवल वित्तपोषण करने वाली एजेंसी है और वह सीधे तौर पर भूमि अधिग्रहण नहीं कर रहा है। उन्होंने इससे जुड़े अन्य दावों को भ्रामक बताया। भूमि के मूल्यांकन का उल्लेख करते हुए विजयन ने कहा कि सरकार ने 25 मई 2023 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें अन्य श्रेणियों की तुलना में कम उपयोगिता वाली भूमि के मूल्य में 80 प्रतिशत तक की कटौती का प्रावधान किया गया था।
विजयन की यह टिप्पणी राज्य सरकार द्वारा केआईआईएफबी के माध्यम से औद्योगिक परियोजनाओं के लिए कन्नूर में 4,896 एकड़ जमीन के प्रस्तावित अधिग्रहण में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का फैसला किए जाने के बाद आई है। यह फैसला शुक्रवार को जारी उस सरकारी आदेश के बाद लिया गया, जिसमें प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण में कथित प्रक्रियागत खामियों की विस्तृत जांच का जिम्मा वीएसीबी को सौंपा गया था।
