कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और उसके नेताओं एवं प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की रविवार को आलोचना करते हुए सवाल किया कि देश में लोकतंत्र है या आपातकाल जैसी स्थिति। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई और कॉजपा नेता अभिजीत दीपके, चार पूर्व मुख्यमंत्रियों तथा यूट्यूबर ध्रुव राठी समेत सात हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगह (जंतर-मंतर) पर पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा तथा लुटियन दिल्ली में 30,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे और प्रदर्शनकारियों को उस इलाके में पहुंचने से रोकने के लिए जगह-जगह अवरोधक लगाए गए थे।
शिवकुमार ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जवाब देना चाहिए कि देश में लोकतंत्र है या आपातकाल।’’ उन्होंने हवाई अड्डे से हिरासत में लिए गए लोगों समेत प्रदर्शन में शामिल नेताओं को हिरासत में लिए जाने को भारत के लिए बड़ी शर्मिंदगी की बात बताया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, लोकतंत्र में लोगों को प्रदर्शन करने और अपनी आवाज उठाने का अधिकार है। कोई उन्हें चुप नहीं करा सकता…।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को आलोचना का सामना करने और कुछ गलत होने पर उसे स्वीकार करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना कायरता को दर्शाती है। शनिवार को कॉजपा की ओर से बुलाए गए प्रदर्शन में कांग्रेस के शामिल नहीं होने के बारे में पूछे जाने पर शिवकुमार ने कहा कि पार्टी स्वतंत्र रूप से काम करेगी और प्रदर्शन के आयोजकों ने उसे विश्वास में नहीं लिया था।
उन्होंने कहा, हम उन्हें (कॉजपा) रोकना नहीं चाहते। हमारे इंडिया गठबंधन के कुछ सहयोगियों ने इसमें हिस्सा लिया और यह उनका अधिकार है। हम कल अपना प्रदर्शन करेंगे।
शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस के नर्वाचित प्रतिनिधियों को दिल्ली में रहने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि वह भी मतदाताओं के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए राष्ट्रीय राजधानी जाएंगे।
