नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने रेखा गुप्ता नीत सरकार से दिल्ली चिकित्सा परिषद (डीएमसी) में महिलाओं को कम से कम 50 प्रतिशत आरक्षण देने के संबंध में जल्द निर्णय लेने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने चिकित्सक अंजू गंभीर की जनहित याचिका पर 30 सितंबर को यह आदेश दिया। याचिका में परिषद में महिला चिकित्सकों को ‘‘समान और सार्थक प्रतिनिधित्व’’ देने का अनुरोध किया गया है।
अदालत ने कहा कि डीएमसी का गठन दिल्ली चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1997 के तहत किया गया है, जिसमें चुनाव या मनोनयन, किसी भी माध्यम से महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है, इसलिए अदालत अधिकारियों को ऐसा कोटा देने का निर्देश नहीं दे सकती। अदालत ने कहा, ‘‘हालांकि, याचिकाकर्ता ने पहले ही एक अभ्यावेदन देकर अपनी मांग रखी है, जिस पर राज्य सरकार के विभिन्न अधिकारी विचार कर रहे हैं।’’
पीठ ने आदेश दिया, ‘‘हम वर्तमान याचिका का निपटारा राज्य सरकार और उसके संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता के अनुरोध पर विचार करने और उस पर उचित निर्णय जल्द लेने का निर्देश देते हुए करते हैं।’’
याचिकाकर्ता ने डीएमसी के अलावा दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन में भी महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग की थी। अधिवक्ता रूपेश दत्ता और स्नेहलता चतुर्वेदी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि चिकित्सा क्षेत्र में महिलाओं की संख्या काफी होने के बावजूद डीएमसी में पर्याप्त विविधता और प्रतिनिधित्व नहीं है।
याचिका में कहा गया कि इसके कारण विभिन्न मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की आवाज शामिल नहीं हो पाती।
