गुरदीप सिंह
सिंगापुर, एक सितंबर वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों और निवेशकों ने सोमवार को सिंगापुर में आयोजित ‘इंडिया एनर्जी शोकेस’ में भारत के तेल और गैस क्षेत्र में मौजूद अरबों डॉलर के निवेश के अवसरों और उन्हें बढ़ावा देने वाले सुधारों पर चर्चा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने की। इसमें मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।
सिंगापुर में भारत की उप उच्चायुक्त सुधि चौधरी ने ऊर्जा क्षेत्र में भारत-सिंगापुर सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने तेल और गैस की पूरी मूल्य श्रृंखला में भारत और सिंगापुर की कंपनियों के बीच और करीबी साझेदारी की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में प्रस्तुतियों के जरिए तेल एवं गैस अन्वेषण के लिए बोली प्रक्रिया, भारत में बीपी समूह के अनुभव और ‘इंडिया एनर्जी वीक 2027’ की जानकारी दी गई।
सचिव नीरज मित्तल के नेतृत्व में हुई प्रस्तुति में तेल और गैस क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला में बड़े निवेश अवसरों की जानकारी दी गई। इसमें सरकार के ‘समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण मिशन’ के तहत तेल-गैस की खोज और उत्पादन, ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विनिर्माण, रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स एवं गैस संबंधी बुनियादी ढांचा तथा रणनीतिक भंडारण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कार्यक्रम में बताया गया कि भारत की ऊर्जा मांग वैश्विक औसत की तुलना में तीन से चार गुना तेज गति से बढ़ रही है।
साथ ही, ऊर्जा क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की भागीदारी के लिए इक्विटी निवेश, संयुक्त उपक्रम, तकनीकी साझेदारी और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों जैसे विकल्पों की जानकारी दी गई। हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) के महानिदेशक श्रीकांत नागुलापल्ली ने भारत की हाइड्रोकार्बन संसाधन क्षमता और सरकार द्वारा किए जा रहे अन्वेषण संबंधी सुधारों की जानकारी दी। इनमें ‘समुद्र मंथन’ भी शामिल है।
उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने 31 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण मिशन को मंजूरी दी थी, जिसके तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक 8.85 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए जाएंगे। कार्यक्रम में निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल नियामक व्यवस्था तैयार करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा किए जा रहे अन्वेषण एवं उत्पादन संबंधी सुधारों को भी प्रमुखता से बताया गया। प्रस्तुति में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों और भारतीय हितधारकों के बीच लगातार सहयोग के महत्व को रेखांकित किया गया।
इसमें कहा गया कि भारत के भविष्य को ध्यान में रखकर किए जा रहे सुधार देश में लगातार निवेश के प्रमुख कारणों में से एक हैं। मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि ‘इंडिया एनर्जी शोकेस’ ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों और निवेशकों से जुड़ने, भारत के नीतिगत एवं नियामकीय सुधारों को सामने रखने और देश के ऊर्जा क्षेत्र में उभर रहे निवेश अवसरों को रेखांकित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। मंत्रालय ने कहा कि कार्यक्रम ने साझेदारी को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र के हितधारकों के साथ सहयोग मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।
कार्यक्रम का समापन सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य के लिए लगातार सहयोग और संवाद जारी रखने पर जोर के साथ हुआ। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव (अन्वेषण) विनोद शेषन ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
