नयी दिल्ली में सोमवार को संसद की ओर कूच कर रहे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच भारी अफरातफरी देखने को मिली। दिन भर चले इस हंगामे के बाद सड़कों पर बिखरी चप्पलें और रोते-बिलखते छात्र उस तनावपूर्ण माहौल की गवाही दे रहे थे, जिसने कुछ समय के लिए पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।
सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई के दौरान के अपने कड़वे अनुभव साझा कर रहे हैं। एक वीडियो में महज 16 साल का एक किशोर रोते हुए बता रहा है कि वह मार्च के दौरान सबसे आगे चल रहा था, तभी अचानक लाठीचार्ज शुरू हो गया और उसे बुरी तरह पीटा गया। वह कहता है कि उसे समझ नहीं आ रहा कि आखिर उसकी गलती क्या थी।
एक अन्य वीडियो में भीड़ के बीच एक प्रदर्शनकारी अचेत अवस्था में जमीन पर पड़ा दिखाई दे रहा है, जबकि आसपास मौजूद लोग उसे संभालने और प्राथमिक सहायता देने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, एक छात्रा ने रोते हुए आरोप लगाया कि वह सुबह से प्रदर्शन में शामिल थी, लेकिन पुलिस कार्रवाई के दौरान जब वह बाहर निकलने का रास्ता खोज रही थी, तभी उन पर लाठीचार्ज किया गया और कई छात्रों को पीटा गया।
इस विरोध प्रदर्शन के बीच मानवीय संवेदनाओं का एक और पहलू तब सामने आया जब एक मां ने अपने बेटे के भविष्य के लिए सड़क पर उतरने का फैसला किया। सोशल मीडिया पर चर्चा बटोर रहे एक वीडियो में महिला कहती है कि उसके पति खुद दिल्ली पुलिस में हैं, लेकिन वह अपने बेटे के भविष्य की चिंता में इस मार्च में शामिल होने आई है।
गौरतलब है कि सोमवार को हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी संसद मार्ग के पास जुटे थे। वे परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया, तो सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद हुई झड़प में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया गया। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल इन वीडियो के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
