भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने बुधवार को एक बयान जारी कर कहा कि चुनाव आयोग के भीतर विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना एक सामान्य बात है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके फैसले या तो सर्वसम्मति से या बहुमत से लिए जाते हैं। यह बयान ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्तियां जताई थीं, जिनमें ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे।
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चुनाव आयोग ने ये कहा
1. ECI एक संवैधानिक संस्था है जो संविधान के अनुच्छेद 324, कानूनी नियमों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के सख्त नियमों के तहत काम करती है। आयोग एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के रूप में काम करता है। लिखित नोट, टिप्पणियाँ, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जाँच-पड़ताल और संतुलन (checks-and-balances) सामान्य और निरंतर चलने वाली प्रक्रियाएँ हैं, जिनका मकसद पूरी पारदर्शिता, कानूनी नियमों का पालन और कामकाज में सख्ती सुनिश्चित करना है। ECI के सभी काम कानूनों और आयोग के निर्देशों के अनुसार हुए हैं।
2. आयोग द्वारा जारी सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश पूरी तरह कानूनी रूप से मान्य हैं और ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ के तहत स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।
3. ड्राफ्टिंग के दौरान आयोग के सदस्यों द्वारा उठाए गए कामकाज से जुड़े सवाल या सुझाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिनका मकसद मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है। आयुक्तों द्वारा दिए गए सुझाव चुनावी प्रक्रियाओं को और बेहतर बनाने के लिए थे।
4. किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियाँ होना सामान्य बात है। ये अंतिम फैसला लेने से पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। न केवल तीनों आयुक्त, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह अधिकृत है।
5. 10 महीनों की अवधि में कुछ खास आंतरिक नोट/टिप्पणियों को उजागर करना, जबकि बड़ी संख्या में मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, पूरी तस्वीर का केवल एक हिस्सा दिखाता है। हाल के महीनों में, आयोग ने कई फैसले लिए हैं, निर्देश जारी किए हैं, लगभग 40 नई पहलें शुरू की हैं और कई चुनावी सुधार किए हैं, जिनमें देश भर में मतदाता सूची का संशोधन (SIR सहित) शामिल है। ये सभी फैसले पिछले एक साल में पूरे आयोग के सर्वसम्मत फैसलों का नतीजा हैं।
6. आयोग ने हाल ही में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में बड़े चुनाव और इस दौरान चुनाव से जुड़ी गतिविधियाँ सफलतापूर्वक आयोजित की हैं। इस काम में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और कामकाज से जुड़ी मशीनरी और आयोग की कई मंजूरियाँ और निर्देश शामिल थे।
7. आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म, जैसे ECINet, अनधिकृत छेड़छाड़, हेरफेर आदि को रोकने के लिए सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। IT सुरक्षा जाँच और ऑडिट कंट्रोल राष्ट्रीय डेटाबेस में लागू किए जाने वाले सामान्य साइबर सुरक्षा उपाय हैं। कानूनी अधिकारी, जिनमें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (EROs) और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEOs) शामिल हैं, कानून के तहत रजिस्ट्रेशन और नाम हटाने के लिए अपनी कानूनी शक्तियों के अनुसार काम करते हैं।
8. भारत का चुनाव आयोग हमारे लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका को समझते हुए, पूरी ईमानदारी के साथ अपने संवैधानिक कर्तव्यों को निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
9. ईसी ने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है। सभी फैसले सहमति से हुए।
10. लगभग 40 नई पहलें शुरू की हैं और देश भर में मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर सहित) के संचालन सहित कई चुनावी सुधार किए हैं।
