साउथ अफ्रिकन महिला सीना धलधला की ऑफिस में मौत ने कॉर्पोरेट वर्क कल्चर को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। रोजबैंक स्थित कार्ट ट्रैक कंपनी में सेंटर एजेंट के रूप में काम करने वाली सीना धलधला लंबे समय से बीमार थी और ऑफिस के वॉशरूम में उनकी मौत हो गई। हर बार रिजेक्ट हुई एप्लिकेशन परिवार के लोगों ने बताया कि उसने छुट्टी के लिए दो बार एप्लिकेशन दी लेकिन हर बार उसे रिजेक्ट कर दिया गया। यहां तक कि महिला को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय उनके मैनेजर इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि इलाच का खर्च कौन उठाएगा। कर्मचारियों ने कंपनी पर लगाया लापरवाही का आरोप सीना के साथ काम करने वाले कर्मचारियों ने कंपनी पर सीना की बीमारी को लेकर लापरवाही का आरोप लगाया है। सीना के साथ काम करने वाल एक व्यक्ति के अनुसार, मौत से एक दिन पहले सीना घुटनों के बल बैठकर रो रही थी। वह कह रही थी कि मैं बहुत बीमार हूं। उसके बाद भी मुझे शनिवार को भी आना है। वो भी तब जब मैंने बता दिया है कि मेरी तबियत बहुत खराब है। परिवार ने बुलाई प्राइवेट हॉस्पिटल से एंबुलेंस जिस दिन सीना की मौत हुई, उस दिन शाम को करीब साढ़े 6 बजे टीम लीडर ने उसे ऑफिस में बुलाया। जब वे वापिस आईं तो वे रो रही थीं। सीना की आंटी नोमुसा ने बताया कि उनकी भतीजी ने दो बार सिक लीव के लिए आवेदन किया था, जिसे ठुकरा दिया गया। वह फिजिकली और इमोशनली टूट चुकी थी। नोमुसा ने कहा कि मुझे खुद प्राइवेट हॉस्पिटल से एंबुलेंस बुलानी पड़ी। सीना के परिवार ने कंपनी पर लगाया आरोप सीना के परिवार का आरोप है कि मैनेजर ने एम्बुलेंस का इंतजार करने की बात कही, लेकिन उनके पास अस्पताल का कोई रेफरेंस नंबर भी नहीं था। वे सिर्फ ये कहते रहे कि नब्ज धीमी चल रही है लेकिन उन्होंने समय पर कोई कदम नहीं उठाया। सीना के रिक्वेस्ट करने पर कंपनी ने उससे यह कहा गया कि वह कंपनी की पॉलिसी का गलत इस्तेमाल कर रही है। लेबर एडवोकेट्स और सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि सीना की मौत एक वर्कप्लेस पर काम का प्रेशर होने का जीता जागता उदाहरण है। ये वही प्रेशर है जो कर्मचारियों के बीमार होने पर भी दिया जाता है। सीना की मौत ने ऑफिस की मेडिकल लीव पॉलिसीज पर भी सवाल खड़े किए हैं। ये खबर भी पढ़ें इंजीनियर की नौकरी बोरिंग लगी तो नूडल्स का स्टॉल लगाया:मेटा की नौकरी छोड़ी, मदद करती गर्लफ्रेंड के साथ वीडियो वायरल फाइनेंशियल एडवाइजर और कंटेंट क्रिएटर लुइसा ते ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो इंटरव्यू शेयर किया। ये इंटरव्यू एल्विन का है जो मेटा कंपनी से नौकरी छोड़ कर नूडल्स बेचने का काम कर रहे थे। पूरी खबर यहां पढ़ें
बॉस ने नहीं दी सिक लीव, ऑफिस में ही मौत:2 बार मेडिकल भी दिखाया था; 29 साल की महिला ने वॉशरूम में दम तोड़ा
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
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सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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