हाल ही में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद वीर मेजर ऋषिकेश रामाणी के 17वें बलिदान दिवस के अवसर पर, हर साल की तरह इस वर्ष भी गार्ड ऑफ ऑनर द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शाम सेवा फाउंडेशन के चेयरमैन मगनभाई पटेल की अध्यक्षता में अहमदाबाद के निकोल क्षेत्र में स्थित मेजर ऋषिकेश रामाणी गार्डन में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम की शुरुआत मेजर ऋषिकेश रामाणी के पिता श्री वल्लभभाई रामाणी और माता श्रीमती गीताबेन रामाणी द्वारा मेजर ऋषिकेश रामाणी के स्मारक को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ श्रद्धांजलि अर्पित करके की गई। इसके बाद, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित श्री मगनभाई पटेलने भी सेना के दो उच्च अधिकारी (पायलटिंग ऑफिसर्स) के साथ गार्ड ऑफ ऑनर द्वारा स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उन्होंने मेजर ऋषिकेश रामाणी ट्रस्ट को आर्थिक सहायता का चेक भारत विकास परिषद, महावीरनगर शाखा को अर्पित किया।
इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में अनंता और स्टार हॉस्पिटल के डॉ. भावेश ठक्कर तथा 11 मराठा रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट चेतन वत्स अपने 18 जवानों की टीम के साथ उपस्थित रहे। उन्होंने भी मेजर ऋषिकेश रामाणी को गार्ड ऑफ ऑनर के ब्यूगल के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की और विजिटर बुक में अपना संदेश स्मृति स्वरूप अंकित किया। इसके साथ ही, उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों के हाथों उन्हें स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
यह कार्यक्रम भारत विकास परिषद की महावीरनगर, नरोडा, निकोल और बापुनगर जैसी चार शाखाओं के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया था।
इस कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और नागरिकों को संबोधित करते हुए, मगनभाई पटेल ने वीर ऋषिकेश रामाणी की वीरता, बहादुरी और बलिदान के बारे में अपने वक्तव्य में कहा कि बचपन से ही देशभक्ति के जज्बे, जुनून और परिवार की प्रेरणा से सैनिक स्कूल के संस्कारों में ढले वीर ऋषिकेश 11 जून, 2005 को सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर भारत माता की रक्षा के लिए भारतीय सेना के थलसेना दल में लेफ्टिनेंट बने। उनकी पहली नियुक्ति पंजाब के भटिंडा में हुई। यंग ऑफिसर्स और कमांडो कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उनकी यूनिट को जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया। कैप्टन के रूप में 11 जून, 2008 को उन्हें विशेष पदोन्नति देकर मेजर का पद दिया गया। इसी बीच, पाकिस्तानी सीमा से करीब दस आतंकवादियों के घुसपैठ की सूचना मिलने पर, सर्च ऑपरेशन की अत्यंत कठिन जिम्मेदारी कंपनी कमांडर के रूप में मेजर ऋषिकेश को सौंपी गई। अत्यधिक विकट परिस्थितिया, घना अंधकार और बरसाती मौसम के बीच आतंकवादियों का सामना करते हुए, उन्होंने तीन-तीन आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया। उन्होंने सामने से सीने पर बारह गोलियाँ झेलीं और वीरतापूर्वक मुकाबला करते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और दिनांक 6 जून, 2009 को वे वीरगति को प्राप्त हुए। भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी शहीद वीर मेजर ऋषिकेश रामाणी की वीरता को शत-शत नमन।
मगनभाई पटेल ने मेजर ऋषिकेश रामाणी के शिक्षा करियर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अहमदाबाद के एक निजी गुजराती स्कूल से वर्ष 1988-1994 तक प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने गुजरात राज्य के जामनगर जिले के बालाचड़ी में स्थित सैनिक स्कूल से वर्ष 1994 से 2001 तक कक्षा 6 से 12वीं की माध्यमिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), खड़कवासला, पुणे में प्रवेश पाकर तीन साल और इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), देहरादून मिलिट्री कॉलेज में एक साल, इस प्रकार वर्ष 2001 से 2005 तक अपनी पढ़ाई और सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया। दिनांक 11 जून, 2005 को भारतीय सेना के थलसेना दल में लेफ्टिनेंट के रूप में पंजाब रेजिमेंट की यूनिट-23 में उनकी नियुक्ति हुई। उनकी इस अदम्य वीरता के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें मरणोपरांत वीरता पदक “सेना मेडल” से सम्मानित किया गया है।
मगनभाई पटेलने देश के डिफेंस सेक्टर (रक्षा क्षेत्र) के बारे में जानकारी देते हुए आगे कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसीलिए लोकतंत्र की सफलता की नींव देश की बॉर्डर सिक्योरिटी (सीमा सुरक्षा) और होम सिक्योरिटी (आंतरिक सुरक्षा) है। आज भारत दुनिया की अग्रणी सैन्य शक्तियों में स्थान रखता है। भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना की संयुक्त ताकत देश की सुरक्षा का एक मजबूत कवच है। आत्मनिर्भरता, आधुनिक टेक्नोलॉजी, अनुसंधान (रिसर्च) और स्थानीय उत्पादन पर अधिक जोर देकर भारत आनेवाले दशकों में वैश्विक रक्षा क्षेत्र में और अधिक शक्तिशाली स्थान हासिल कर सकता है। देश की सुरक्षा और विकास के लिए एक मजबूत डिफेंस सेक्टर राष्ट्र की सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति (स्ट्रेटेजिक एसेट) है। भारत का डिफेंस सेक्टर केवल सेना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हथियारों का उत्पादन, अनुसंधान, टेक्नोलॉजी का विकास, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष सुरक्षा और रक्षा नीतियां भी शामिल हैं। भारत का वार्षिक रक्षा खर्च दुनिया के सबसे बड़े रक्षा बजटों में से एक है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत स्थानीय स्तर पर हथियारों और रक्षा उपकरणों के उत्पादन पर विशेष जोर दिया है।
मगनभाई पटेलने डिफेंस सेक्टर (रक्षा क्षेत्र) के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए आगे कहा कि भारतीय सेना के जवान देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देते हैं। उनकी शहादत केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। इसलिए,शहीद जवानों के परिवारों, पत्नियों, माता-पिता और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाना सरकार तथा समाज की नैतिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। देश के हर राज्य में जहां भी मेजर, कर्नल, लेफ्टिनेंट, ब्रिगेडियर जैसे सेना के उच्च अधिकारियों की जन्मभूमि हो, वहां उनकी स्मृति में सरकार को उचित भूमि आवंटित कर एक ट्रेनिंग सेंटर (प्रशिक्षण केंद्र) शुरू करना चाहिए। उस ट्रेनिंग सेंटर में सेना की वीरता को दर्शानेवाली चित्र प्रदर्शनियां, फोटो गैलरी, शहीद जवान की वर्दी (यूनिफॉर्म) और हथियार जैसी चीजें प्रदर्शन के लिए रखी जानी चाहिए, ताकि जब देश के युवा इस ट्रेनिंग सेंटर का दौरा करें, तो उनमें देशभक्ति की भावना जगे और वे सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित हों। इस ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवाओं को गुजरात की बालाचड़ी जैसी सैनिक स्कूलों में भी भर्ती किया जाना चाहिए।
मगनभाई पटेलने आगे कहा कि हमारे सम्माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी साहब, केंद्रीय रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमितभाई शाह साहब के साथ उनकी पूरी टीम डिफेंस, बॉर्डर सिक्योरिटी और होम सिक्योरिटी के लिए दिन-रात बहुत ही सुंदर कार्य कर रही है, इसके लिए उन्हें लाख-लाख बधाई है। लेकिन यह जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है। यहाँ हमारे सुझाव प्रस्तुत करने का उद्देश्य केवल मात्र इतना है कि यदि सरकार के साथ-साथ देश के विभिन्न एनजीओ (NGOs), अग्रणी सामाजिक संगठन और देश की जनता जागरूक होकर इस क्षेत्र से जुड़ेगी, तो निश्चित रूप से परिणामोन्मुखी कार्य होगा और यही देश के वीर जवानों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि मानी जाएगी।
शहीद जवानों के परिवारों के लिए केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार की अनेक योजनाएं हैं, जिनका लाभ इन परिवारों को मिले इसके लिए एनजीओ (NGOs) और सामाजिक संगठनों को मददगार बनना होगा। इसके साथ ही, कॉर्पोरेट कंपनियों के CSR फंड तथा पब्लिक फंड से बॉर्डर सिक्योरिटी (सीमा सुरक्षा) और होम सिक्योरिटी (आंतरिक सुरक्षा) के परिवारों के लिए स्वास्थ्य संबंधी, रोजगार संबंधी और उनके बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए यदि जन-भागीदारी होगी, तो देश के अनेक युवाओं में राष्ट्रभावना जागेगी और वे देश की सेवा के लिए भारतीय सेना में निश्चित रूप से शामिल होंगे।
भारतीय थल सेना (Indian Army) :- आज हमारी भारतीय थल सेना (Indian Army) दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है। भारत की सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य आधार स्तंभ भारतीय थल सेना है। देश की जमीनी सीमाओं की सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान, आंतरिक सुरक्षा, प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य और युद्धकाल में राष्ट्र की रक्षा करने का महत्वपूर्ण कार्य भारतीय सेना करती है। 15 जनवरी, 1949 को भारतीय सेना ने पूरी तरह से भारतीय नेतृत्व के तहत काम करना शुरू किया था, इसलिए हर साल 15 जनवरी को “आर्मी डे” (सेना दिवस) के रूप में मनाया जाता है। भारतीय थलसेना आज न केवल दक्षिण एशिया की, बल्कि पूरे विश्व की सबसे बड़ी और अनुभवी सेनाओं में से एक मानी जाती है। भारतीय सेना की स्थापना कोलकाता में वर्ष 1776 में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा की गई थी। भारतीय सेना में वर्तमान में लगभग 12 लाख सक्रिय सैनिक कार्यरत हैं। भारतीय सेना के जवान देश के सबसे कठिन क्षेत्रों में अपनी ड्यूटी निभाते हैं, जिसमें सियाचिन ग्लेशियर शामिल है जहाँ तापमान -50°C तक चला जाता है। इसके अलावा लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान का थार मरुस्थल और जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में भी देश के जवान मुस्तैदी से तैनात रहते हैं।
आज हमारी भारतीय सेना (Indian Army) दुश्मन देशों या आतंकवादी गतिविधियों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए आधुनिक टैंक, तोप,मिसाइल और आधुनिक ड्रोन सिस्टम से पूरी तरह सज्ज है।इनमें अर्जुन मेन बैटल टैंक, T-90 भीष्म, K9 वज्र, पिनाका रॉकेट सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल शामिल हैं, जो भारतीय सेना की मुख्य ताकत हैं। भारतीय सेना दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित सीमाओं की सुरक्षा करने वाली पहली सेना है। वर्ष 2025-26 के बजट में रक्षा क्षेत्र (डिफेंस बजट) के लिए लगभग ₹6.81 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 9.5% अधिक है। केवल थल सेना (आर्मी) के राजस्व खर्च (वेतन,प्रशिक्षण आदि) के लिए लगभग ₹2.07 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो तीनों सेनाओं में सबसे बड़ा हिस्सा है। रक्षा बजट के मुख्य क्षेत्रों में सैनिकों के वेतन और भत्ते, आधुनिक हथियारों की खरीद, सीमावर्ती बुनियादी ढांचा (बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर), मिसाइल विकास और साइबर सुरक्षा मुख्य रूप से शामिल हैं।
मगनभाई पटेल ने भारतीय सेना के लिए आवश्यक सुझाव बताए थे, जो इस प्रकार हैं:
1. मेक इन इंडिया के तहत अधिक स्वदेशी हथियारों का उत्पादन हो।
2. AI (Artificial Intelligence) और रोबोटिक युद्ध तकनीक का विकास।
3. ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम का विस्तार।
4. सीमावर्ती सड़कों और सुरंगों (टैनल्स) का तेजी से विकास।
5. साइबर और स्पेस कमांड को और अधिक मजबूत बनाना।
6. आधुनिक नाइट विजन और सर्विलांस सिस्टम को हर यूनिट तक पहुँचाना।
7. युवाओं में सैनिक सेवा (सेना में शामिल होने) के प्रति अधिक जागरूकता लाना।
संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के शांति मिशन (Peacekeeping Missions) में भारत सबसे अधिक सैनिक भेजनेवाले देशों में से एक है।
भारतीय नौसेना (Indian Navy):- भारतीय नौसेना (Indian Navy) भारतीय सशस्त्र बलों की समुद्री शाखा है, जो देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा करती है। यह दुनिया की सबसे शक्तिशाली और आधुनिक नौसेनाओं में से एक है, जिसे वैश्विक स्तर पर “ब्लू वॉटर नेवी” (गहरे समुद्र में लंबे समय तक ऑपरेशन करने की क्षमता रखने वाली सेना) के रूप में जाना जाता है।भारत के माननीय राष्ट्रपति भारतीय नौसेना (Indian Navy) के कमांडर-इन-चीफ यानी सर्वोच्च कमांडर होते हैं।
भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टि से भारतीय नौसेना को 3 मुख्य कमांड्स में विभाजित किया गया है ।
1. वेस्टर्न नेवल कमांड (Western Naval Command) जिसका मुख्यालय मुंबई है, जो अरब सागर की सुरक्षा के लिए है।
2. ईस्टर्न नेवल कमांड (Eastern Naval Command) जिसका मुख्यालय विशाखापट्टनम है, जो बंगाल की खाड़ी की सुरक्षा के लिए है।
3. सदर्न नेवल कमांड (Southern Naval Command) जिसका मुख्यालय कोच्चि में है, जो मुख्य रूप से एक ट्रेनिंग कमांड है।
भारतीय नौसेना (Indian Navy) के पास लगभग 73,000 से अधिक सक्रिय सैनिक और एक विशाल काफिला है। वर्ष 2026 में नौसेना अपने इतिहास के सबसे बड़े विस्तार के दौर से गुजर रही है, जिसमें इसी वर्ष रिकॉर्ड तोड़ 19 नए स्वदेश निर्मित युद्धपोत बेड़े में शामिल हो रहे हैं। भारत के पास वर्तमान में पूर्ण रूप से स्वदेशी 2 सक्रिय विमानवाहक पोत (एयरक्राफ्ट कैरियर्स) हैं, जिनमें INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत शामिल हैं। भारतीय नौसेना के पास इस समय विशाखापट्टनम क्लास और कोलकाता क्लास के घातक गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स (विध्वंसक जहाज) हैं। इसके अलावा, अत्याधुनिक स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस नीलगिरी क्लास (प्रोजेक्ट 17A) के नए फ्रिगेट्स (जैसे INS दूनागिरी और INS उदयगिरी) सेना में शामिल किए जा रहे हैं। भारतीय नौसेना के पास परमाणु ऊर्जा से चलने वाली (Nuclear-Powered) बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (सबमरीन) के साथ-साथ स्कॉर्पीन क्लास की कई पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां भी मौजूद हैं। समुद्री निगरानी और हमलों के लिए मिग-29K (MiG-29K) फाइटर जेट्स, पी-8आई (P-8I) समुद्री टोही विमान और रोमियो (MH-60R) हेलीकॉप्टर्स तैनात हैं। हाल ही में, नौसेना के लिए फ्रांस से 26 शक्तिशाली राफेल-एम (Rafale-M) फाइटर जेट्स खरीदने का एक बड़ा समझौता (करार) भी किया गया है।
भारतीय नौसेना के पास मार्कोस (MARCOS – Marine Commandos) नाम की अत्यंत गुप्त और घातक स्पेशल फोर्स है। वे जमीन, हवा और विशेष रूप से पानी के भीतर स्पेशल ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने अरब सागर और अफ्रीका के तटों पर सोमाली समुद्री डाकुओं (Pirates) के खिलाफ कई सफल एंटी-पायरेसी ऑपरेशन चलाकर वैश्विक स्तर पर प्रशंसा हासिल की है। वर्तमान में नौसेना के 75% से अधिक जहाज और हथियार प्रणालियाँ पूरी तरह से स्वदेशी हैं। कोचीन शिपयार्ड, मझगांव डॉक और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स जैसे भारतीय शिपयार्ड देश में ही अत्याधुनिक पनडुब्बियाँ (सबमरीन) और एंटी-सबमरीन जहाज (जैसे INS माहे) बना रहे हैं। भविष्य की आवश्यकताओं के लिए अंडरवाटर ड्रोन (स्वार्म ड्रोन) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रणालियाँ विकसित की जा रही हैं। नौसेना का लक्ष्य 2035 तक अपने बेड़े को 175 से 200 आधुनिक युद्धपोतों तक पहुँचाना है, ताकि हिंद महासागर (Indian Ocean) और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन जैसी चुनौतियों का मजबूती से सामना किया जा सके।
मगनभाई पटेल ने भारतीय नौसेना के लिए आवश्यक सुझाव बताए थे, जो इस प्रकार हैं :
1. तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर (IAC-III) : भारत के पास वर्तमान में 2 विमानवाहक पोत (एयरक्राफ्ट कैरियर्स) हैं। लेकिन पूर्वी और पश्चिमी दोनों समुद्री सीमाओं पर एक साथ मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए तीसरे बड़े स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण कार्य को और तेज किया जाना चाहिए।
2. परमाणु पनडुब्बी (SSN) का विस्तार : हिंद महासागर में लंबे समय तक अंडरवाटर पेट्रोलिंग (पानी के भीतर गश्त) करने के लिए पारंपरिक डीजल पनडुब्बियों की तुलना में परमाणु ऊर्जा से चलनेवाली अटैक पनडुब्बियों की संख्या तेजी से बढ़ाना बेहद जरूरी है।
3. टेक्नोलॉजिकल अपग्रेडेशन (तकनीकी उन्नयन) : भविष्य के युद्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर स्पेस पर आधारित होंगे। इसलिए नौसेना को अंडरवॉटर ड्रोन (UUVs – Unmanned Underwater Vehicles) और एंटी-ड्रोन सिस्टम के विस्तार (स्केलिंग) पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
4. मित्र देशों के साथ नौसैनिक युद्धाभ्यास : ‘मालाबार’ और ‘मिलन’ (MILAN) जैसे बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों को और अधिक बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि क्वाड (QUAD) देशों के साथ आपसी तालमेल (Interoperability) पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सके।
5. स्थानीय शिपयार्डों की क्षमता में वृद्धि : भारतीय शिपयार्डों में युद्धपोत (जहाज) बनने में लगनेवाले समय (Gestation Period) को कम करने के लिए निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) की भागीदारी और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को बढ़ाया जाना चाहिए।
भारतीय वायुसेना (Indian Air Force – IAF):- भारतीय वायुसेना भारतीय सशस्त्र बलों की हवाई शाखा है, जो दुनिया की सबसे शक्तिशाली और प्रतिष्ठित वायु सेनाओं में से एक है। इसका मुख्य मिशन भारतीय हवाई क्षेत्र (Airspace) को सुरक्षित रखना और युद्ध के दौरान हवाई प्रभुत्व हासिल करना है।
भारत के माननीय राष्ट्रपति भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के कमांडर-इन-चीफ यानी सर्वोच्च कमांडर होते हैं।
भारतीय वायुसेना में लगभग 1,35,000 से 1,40,000 सक्रिय सैनिक (अधिकारी और वायुसैनिक) देश की सेवा में कार्यरत हैं। वायुसेना के पास कुल 1700 से अधिक विमानों (एअरक्राफ्ट्स) का बेड़ा है, जिसमें फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन शामिल हैं। इस बेड़े में अत्याधुनिक राफेल (Rafale), सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI), मिराज-2000, मिग-29 और पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक से निर्मित तेजस (LCA Tejas) जैसे घातक फाइटर जेट शामिल हैं। वायुसेना के पास अपनी एक विशेष कमांडो विंग है, जिसे गरुड़ कमांडो फोर्स (Garud Commando Force) के रूप में जाना जाता है। यह फोर्स एयरबेस की सुरक्षा और आतंकवादी हमलों के खिलाफ एयर-रेस्क्यू ऑपरेशन (हवाई बचाव अभियान) चलाने में पूरी तरह सक्षम है।
मगनभाई पटेल ने भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के लिए आवश्यक सुझाव बताए थे, जो इस प्रकार हैं:
1. स्क्वाड्रन की संख्या में वृद्धि : वायुसेना की स्वीकृत स्क्वाड्रन क्षमता 42 की है, लेकिन वर्तमान में यह घटकर लगभग 31 पर आ गई है। चीन और पाकिस्तान सीमा पर दोहरे खतरे (ट्विन चैलेंज) से निपटने के लिए नए फाइटर जेट्स (जैसे तेजस मार्क-1A और मार्क-2) का उत्पादन तेज करना बेहद जरूरी है।
2. ड्रोन टेक्नोलॉजी (UAVs) का विकास : आधुनिक युद्धों में ड्रोन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। एयरफोर्स को ‘स्वार्म ड्रोन’ (Swarm Drones) और मानवरहित लड़ाकू विमानों (UCAVs) की संख्या अपने बेड़े में तेजी से बढ़ानी चाहिए ।
3. स्वदेशीकरण (Indigenisation) : विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए डीआरडीओ (DRDO) और एच.ए.एल (HAL) जैसी भारतीय संस्थाओं के साथ मिलकर विमानों के इंजन (एअरक्राफ्ट इंजन) और अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों को भारत में ही बनाने की गति तेज की जानी चाहिए।
4.साइबर और स्पेस वॉरफेयर : भविष्य के युद्ध नेटवर्क-केंद्रित (नेटवर्क-सेंट्रिक) होंगे, इसलिए उपग्रह संचार (सैटेलाइट कम्युनिकेशन) और एंटी-सैटेलाइट प्रणालियों को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और अत्याधुनिक बनाना अनिवार्य है ।
श्री मगनभाई पटेल ने भारतीय सेना के तीनों अंगों की विस्तृत जानकारी और सुझाव देने के बाद, इस अवसर पर केंद्र की मोदी सरकार द्वारा रक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए आगे कहा कि मोदी सरकार ने न केवल सीमाओं को सुरक्षित किया है, बल्कि ‘मेजर’ जैसे उच्च पदों पर रहकर देश के लिए शहीद होनेवाले वीरों का बलिदान व्यर्थ न जाए और उनके परिवार सम्मानपूर्वक जी सकें, इसके लिए नीतिगत और आर्थिक स्तर पर सराहनीय व्यवस्था खड़ी की है। देश की रक्षा के लिए आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद होनेवाले भारतीय सेना के मेजर और अन्य पदों के वीर जवानों के परिवारों के प्रति सम्मान और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कई ऐतिहासिक निर्णय, आर्थिक सुधार और कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं, जिनमें:
1. वन रैंक वन पेंशन (OROP) की 40 वर्ष पुरानी मांग पूरी की : दशकों से लंबित ‘वन रैंक वन पेंशन’ (OROP) की मांग को मोदी सरकार ने वर्ष 2015 में आधिकारिक मंजूरी देकर लागू किया है। इस योजना के तहत सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) की तारीख चाहे जो भी हो, समान रैंक (जैसे मेजर या अन्य पद) और समान सेवा अवधि वाले सैनिकों एवं अधिकारियों को समान पेंशन मिलना सुनिश्चित हुआ है। इसके अलावा, इस योजना का सीधा लाभ शहीदों के परिवारों और वीर नारियों (युद्ध विधवाओं) को भी मिला है, जिससे उनकी पेंशन राशि में बड़ा सुधार हुआ है। समय-समय पर इन पेंशन दरों को संशोधित (जैसे OROP-2 और हालिया OROP-3) भी किया गया है।
2. आर्थिक सहायता और बीमा कवच में भारी वृद्धि, लिबरलाइज्ड फैमिली पेंशन (LFP): युद्ध में या आतंकवादियों के खिलाफ सीमा पर शहीद होनेवाले जवानों के आश्रितों को उनके द्वारा अंतिम बार प्राप्त किए गए वेतन (लास्ट ड्रॉन सैलरी) की 100% राशि ‘लिबरलाइज्ड फैमिली पेंशन’ के रूप में जीवनभर दी जाती है।
3.आर्मी सेंट्रल वेलफेयर फंड (ACWF): दुश्मन की कार्रवाई या आतंकवादी हमले में शहीद (बैटल कैजुअल्टी) होनेवाले जवान के परिवार को इस फंड से कुल ₹8,00,000 की तत्काल सहायता दी जाती है। इसमें से शहीद होने के तुरंत बाद ₹1,00,000 तात्कालिक आवश्यकताओं के लिए और शेष ₹7,00,000 आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिए जाते हैं।
4.केंद्रीय एक्स-ग्रेशिया (एकमुश्त) सहायता : भारत सरकार द्वारा शहीद के परिवार को मृत्यु की परिस्थितियों के आधार पर एकमुश्त (Lump-sum) बड़ी राशि प्रदान की जाती है। सीमा पर संघर्ष या आतंकवादी हमले में शहीद जवान के परिवार को ₹35 लाख तथा युद्ध के समय (War/Battle Casualties) परिस्थितियों के अनुसार यह राशि ₹25 लाख से ₹45 लाख तक हो सकती है।
5. नेशनल डिफेंस फंड (NDF) :- नेशनल डिफेंस फंड का मुख्य उपयोग शहीदों के बच्चों और आश्रितों की शिक्षा के लिए किया जाता है। प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना (PMSS) के तहत, शहीद के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए मासिक स्कॉलरशिप दी जाती है, जिसमें लड़कों के लिए ₹2,500 प्रति माह और लड़कियों के लिए ₹3,000 प्रति माह दिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, किताबों और अध्ययन सामग्री के लिए सेना (आर्मी) हेतु वार्षिक ₹55 लाख, वायुसेना (एयरफोर्स) हेतु ₹37 लाख और नौसेना (नेवी) हेतु ₹32 लाख का ग्रांट आवंटित किया जाता है। इस केंद्रीय सहायता के अलावा, विभिन्न राज्य सरकारें भी अपनी नीति के अनुसार ₹25 लाख से लेकर ₹1 करोड़ तक की अलग से वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं (जैसे- हाल ही में हरियाणा सरकार ने शहीद परिवारों के लिए अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) बढ़ाकर ₹1 करोड़ कर दी है)।
6. मोदी सरकार ने ड्यूटी (फर्ज) के दौरान शहीद होनेवाले जवानों के लिए अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया / मुख्य आर्थिक सहायता) में भी भारी वृद्धि की है। दुश्मन की कार्रवाई या आतंकवादी हमले में सर्वोच्च बलिदान देने पर परिवारों को बड़ी केंद्रीय आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। आर्मी सेंट्रल वेलफेयर फंड (ACWF) और नेशनल डिफेंस फंड (NDF) द्वारा शहीद परिवारों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
जब देश अपने शहीदों के परिवार की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करता है, तब युवाओं में देश सेवा की भावना और अधिक मजबूत होती है। एक सशक्त राष्ट्र वही कहलाता है जहाँ सीमा पर शहीद हुए सैनिक के परिवार को कभी यह न लगे कि वे अकेले हैं। “शहीदों के परिवार का सम्मान ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है।
इस कार्यक्रम में अन्य गणमान्य व्यक्तियों में पाटीदार समाज के अग्रणी मगनभाई रामाणी, अग्रणी बिल्डर परेशभाई डोबरिया,अग्रणी बिल्डर परषोत्तमभाई गेवरिया, महावीरनगर शाखा के ट्रस्टी अशोकभाई कुलकर्णी, भारत विकास परिषद-गुजरात सेंट्रल प्रांत के कार्यकारी सदस्य शांतिलाल रैयाणी, गुजरात सेंट्रल प्रांत के प्रांतीय अध्यक्ष प्रकाशभाई कसवाला, महावीरनगर शाखा के अध्यक्ष घनश्यामभाई हिरानी, मंत्री हिम्मतभाई केवडिया, कोषाध्यक्ष रजनीकांतभाई पटेल के साथ-साथ भारत विकास परिषद की बापुनगर, नरोडा और निकोल शाखाओं के अध्यक्ष, मंत्री एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम में एक रक्तदान शिविर (ब्लड डोनेशन कैंप) का भी आयोजन किया गया था, जिसके लिए सिविल अस्पताल, असरवा की दो ब्लड वैन बुलाई गई थीं। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया, जिसमें 129 ब्लड यूनिट एकत्र हुआ।
गार्ड ऑफ ऑनर कार्यक्रम के बाद, मेजर ऋषिकेश रामाणी के नाम पर बने इस गार्डन (ऋषिकेश रामाणी गार्डन) के कर्मचारियों के विद्यार्थी बच्चों को श्री वल्लभभाई रामाणी और श्री मगनभाई पटेल के हाथों स्कूल बैग तथा नोटबुक का वितरण भी किया गया।
इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने “जब तक सूरज चांद रहेगा, ऋषिकेश तेरा नाम रहेगा” और “भारत माता की जय” के नारों के साथ गगनभेदी जयघोष किया। इस दिन रात्रि में प्रख्यात लोक साहित्यकार डॉ.रणजीतसिंह वांक और उनके गायक वृंद (संगीत मंडली) द्वारा ‘वीरांजलि संगीत कार्यक्रम’ का भी आयोजन किया था।