दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल के प्रमुख के बीच हुई कथित गोपनीय मुलाकात ने भारत बांग्लादेश सीमा पर चल रही हलचल को और अधिक गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि बांग्लादेश के गृह मंत्री का एक विशेष पत्र भी अमित शाह को सौंपा गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पूर्वी सीमा पर घुसपैठ, अवैध नागरिकों की पहचान और उन्हें वापस भेजने को लेकर जबरदस्त तनाव बना हुआ है। खासकर पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी की ओर से चलाया जा रहा अभियान अब राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे बड़ी लड़ाई बन चुका है।
देखा जाये तो पश्चिम बंगाल और असम में लगातार सामने आ रही घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि सीमा पार से अवैध घुसपैठ कोई मामूली समस्या नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, जनसंख्या संतुलन और सामाजिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। असम के कछार जिले में भारतीय नागरिक रंजीत दास का दिनदहाड़े कथित अपहरण कर लिया जाना बेहद खतरनाक संकेत है। हम आपको बता दें कि रंजीत दास सीमा के पास घास लेने गए थे, तभी बांग्लादेशी तत्व उन्हें उठा ले गए। बाद में सीमा बलों की बातचीत के बाद उन्हें वापस सौंपा गया। यह घटना बताती है कि सीमा पार बैठे तत्वों के हौसले कितने बुलंद हो चुके हैं।
यही नहीं, मेघालय के महेंद्रगंज क्षेत्र में भी तनाव चरम पर पहुंच गया, जब अवैध रूप से भारत में घुसे एक बांग्लादेशी नागरिक को वापस भेजे जाने पर बांग्लादेश सीमा बल और वहां के स्थानीय लोगों ने उसे लेने से इंकार कर दिया। नतीजा यह हुआ कि वह व्यक्ति घंटों तक नो मैन्स लैंड में फंसा रहा। इससे पहले भी एक पचपन वर्षीय व्यक्ति को लेकर लगभग बीस घंटे तक गतिरोध चला था। यह साफ संकेत है कि बांग्लादेश अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है और अवैध घुसपैठियों को भारत की समस्या बनाकर छोड़ देना चाहता है।
हम आपको बता दें कि वर्षों तक पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार पर आरोप लगते रहे कि उसने वोट बैंक की राजनीति के लिए अवैध घुसपैठियों को संरक्षण दिया। पहचान पत्र, राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं तक पहुंच देकर सीमा पार से आए लोगों को व्यवस्थित तरीके से बसाया गया। इसी कारण राज्य के कई इलाकों की जनसांख्यिकी तेजी से बदली। अब जब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी इस मुद्दे को खुलकर उठा रहे हैं, तब घुसपैठियों और उन्हें संरक्षण देने वालों में बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है।
शुभेन्दु अधिकारी ने जिस आक्रामकता के साथ बंगाल में अवैध बांग्लादेशियों की पहचान और कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाये हैं उसकी पूरे देश में सराहना हो रही है। उन्होंने साफ कहा है कि बंगाल को घुसपैठियों का सुरक्षित अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। यह केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा संकल्प है। देश की सीमाएं दया या वोट बैंक की राजनीति से नहीं, बल्कि कठोर इच्छाशक्ति से सुरक्षित होती हैं।
जो लोग अवैध तरीके से भारत में घुसकर यहां की जमीन, संसाधन और अधिकारों पर कब्जा करना चाहते हैं, उन्हें अब स्पष्ट चेतावनी समझ लेनी चाहिए। भारत अब पहले वाला भारत नहीं है। अब सीमा पार से घुसपैठ कर वर्षों तक छिपकर रहने का खेल ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा। हर अवैध घुसपैठिये की पहचान होगी, कानूनी कार्रवाई होगी और उसे वापस भेजा जाएगा। भारत की संप्रभुता से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब कोई नरमी नहीं बची है।
बहरहाल, भारत बांग्लादेश संबंध अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। एक ओर कूटनीतिक बातचीत और सहयोग की मजबूरी है, दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।। अमित शाह और बांग्लादेश सीमा बल प्रमुख की मुलाकात इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे गंभीर चर्चा चल रही है। लेकिन यह भी सच है कि बातचीत से समस्या हल नहीं होगी। जब तक सीमा पर कठोर निगरानी और घुसपैठ के खिलाफ निर्मम कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह संकट बना रहेगा। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी की मुहिम इसी राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बनकर उभर रही है और आने वाले समय में इसका असर पूरे देश की राजनीति और सुरक्षा नीति पर दिखाई देगा।