बेंगलुरु, एक अक्टूबर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाने के लिए लोग अलग-अलग नामों से कई आवेदन कर रहे हैं। शिवकुमार ने एसआईआर को ‘बड़ा फर्जीवाड़ा’ भी करार दिया। यहां एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस साजिश में शामिल है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची से ‘‘अल्पसंख्यकों, दलितों और अनुसूचित जनजाति (एसटी) मतदाताओं’’ के नाम हटाना है।
उन्होंने दावा किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जानकारी के बिना इस तरह से ‘अवैध’ तरीके से मतदाताओं के नाम हटाना संभव नहीं है। शिवकुमार ने धमकी दी कि जब तक इस मामले में जांच के आदेश नहीं दिए जाते, वह मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबक्कुमार के कार्यालय में ही बैठे रहेंगे। शिवकुमार ने दावा किया, ‘‘कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मतदाताओं के नाम हटाने के लिए अलग-अलग नामों से कई आवेदन दाखिल किए गए हैं।
विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची से अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों के नाम हटाने के लिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।’’
उनके अनुसार, 45 लाख मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि अकेले विजयपुरा में एसआईआर के तहत 14,000 आवेदन मतदाताओं के नाम हटाने के लिए दाखिल किए गए हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि 22, 23 और 24 सितंबर को फॉर्म-7 बड़ी संख्या में दाखिल किए गए, जिनका उद्देश्य अल्पसंख्यक, दलित और एसटी मतदाताओं के नाम हटाना था।
उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 दाखिल करने वाले लोग बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नहीं, बल्कि भाजपा कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं सीईओ के कार्यालय में बैठा रहूंगा और तब तक वापस नहीं आऊंगा, जब तक जांच के आदेश नहीं दिए जाते, भले ही आज कैबिनेट की बैठक क्यों न हो।’’
जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या आज कैबिनेट की बैठक होगी, तो मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ज्यादातर संभावना है कि मुझे वहीं सोना पड़ सकता है।’’
शिवकुमार ने यह भी कहा कि बेलगावी, भालकी, मैसूरु और अन्य स्थानों पर मतदाता सूची से नाम ‘अवैध’ तरीके से हटाने के संबंध में कई प्राथमिकी दर्ज हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा और जद(एस) की 50-60 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की बड़ी साजिश है।
भाजपा ने बड़ी संख्या में फॉर्म-7 छपवाए हैं ताकि मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें।’
शिवकुमार ने कहा कि वह इस मुद्दे को ‘पूरी गंभीरता’ से उठा रहे हैं क्योंकि यह उनके लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दा है। इससे पहले उन्होंने एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग की आपराधिक जांच सहित व्यापक तफ्तीश कराने की मांग की। एक वीडियो संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ता कथित तौर पर पार्टी नेताओं के निर्देश पर, अल्पसंख्यकों, गरीबों और दलितों के नाम मतदाता सूची से हटाने की मंशा से फॉर्म-7 आवेदन जमा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई नेताओं ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में फर्जी तरीके से फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए जाने से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। शिवकुमार ने कहा, ‘‘इस मामले की कानून के दायरे में व्यापक जांच और आपराधिक अन्वेषण की जरूरत है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला केवल कुछ विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक मंत्री ईश्वर खांड्रे के भाल्की, नयना मोटम्मा के मूडिगेरे समेत कई मौजूदा और पूर्व विधायकों के क्षेत्रों में भी ऐसी शिकायतें सामने आई हैं।
शिवकुमार ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान एक करोड़ से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और 50 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। फिलहाल दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
