प्रयागराज (उप्र), छह अक्टूबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया है कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद दो साल से लापता 42 वर्षीय एक महिला का पता लगाने के लिए सभी आवश्यक प्रयास करे। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने महिला के पति की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। पीठ ने इस तथ्य पर गौर किया कि सुदामा देवी आठ सितंबर 2024 से गायब थी और नौ सितंबर 2024 को महराजगंज जिले के पुरंदरपुर थाने में उनके गायब होने की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
पीठ ने पाया कि दो साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी महिला का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती सुनवाई के दौरान अदालत ने यह पाया कि याचिकाकर्ता और चौथे प्रतिवादी के बीच दुश्मनी थी और सुदामा देवी को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद अदालत ने राज्य सरकार को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें महिला के पते के बारे में जानकारी दी जाए।
राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि पुलिस अधिकारियों की एक खास टीम को सुदामा देवी का पता लगाने के लिए तैनात किया गया था लेकिन मानसिक रूप से अस्वस्थ इस महिला के पास मोबाइल फ़ोन नहीं था और इन हालात की वजह से पुलिस के लिए उसका पता लगाना मुश्किल हो गया था। राज्य सरकार ने 29 सितंबर को उच्च न्यायालय को बताया था कि पुलिसकर्मियों की तमाम कोशिशों के बावजूद महिला का पता नहीं चल पाया है। लापता महिला की तलाश करने में लगातार नाकामी को देखते हुए उच्च न्यायालय ने गत 29 सितंबर के अपने आदेश में सीबीआई को निर्देश दिया कि वह सुदामा देवी का पता लगाने के लिए सभी जरूरी कोशिशें करे और उसे आगामी एक दिसंबर को अदालत में पेश करे।
अदालत ने राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी निर्देश दिया कि वे जांच में सीबीआई की हर तरह से मदद करें। मामले की अगली सुनवाई आगामी एक दिसंबर को होगी।
