नई दिल्ली, 20 जुलाई, 2026: इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (आईआईटीएम), जनकपुरी, नई दिल्ली के कंप्यूटर साइंस विभाग द्वारा “नेक्स्ट-जनरेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: एजेंटिक, रिस्पॉन्सिबल एंड सस्टेनेबल एआई सिस्टम्स” विषय पर एआईसीटीई-अटल प्रायोजित एक सप्ताहीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का सोमवार को शुभारंभ किया गया। 20 से 25 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाले इस छह दिवसीय ऑफलाइन कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों, शोधार्थियों एवं शिक्षाविदों को उभरती हुई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों का उन्नत ज्ञान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर आईआईटीएम की निदेशक प्रो. (डॉ.) रचिता राणा ने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन ला रही है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस एफडीपी के प्रत्येक सत्र में सक्रिय सहभागिता करते हुए नवीनतम एआई तकनीकों का ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल अर्जित करें। वहीं आईआईटीएम के उपनिदेशक प्रो. (डॉ.) गणेश कुमार वाधवानी ने उत्तरदायी, नैतिक एवं सतत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रतिभागियों को इस कार्यक्रम के माध्यम से अपने शोध एवं नवाचार संबंधी कौशल को और सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित किया।

प्रथम तकनीकी सत्र में आईआईटी दिल्ली के सहायक प्रोफेसर डॉ. रोहित वैषने “गेम थ्योरी फॉर मल्टी-एजेंट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड फेयर एल्गोरिदमिक डिसीजन-मेकिंग” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मल्टी-एजेंट एआई सिस्टम के विकास में गेम थ्योरी की भूमिका तथा निष्पक्ष, पारदर्शी एवं नैतिक निर्णय-निर्माण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

इसके पश्चात प्रतिभागियों ने “इन्फॉर्मेशन प्रोसेसिंग लेटर्स नामक शोध पत्रिका (2025) में प्रकाशित शोध पत्र “कनेक्टेड इक्विटेबल केक डिवीजन वाया स्पर्नर’स लेम्मा” पर आधारित एक विचार-विमर्श सत्र में भाग लिया, जिसमें एल्गोरिदमिक निष्पक्षता एवं संसाधनों के न्यायसंगत वितरण से जुड़े नवीन शोध आयामों पर चर्चा की गई।
दोपहर के सत्र में एनएसयूटी ईस्ट कैंपस के प्रोफेसर प्रो. नन्हाय सिंह ने “एलएलएम एप्लिकेशन डेवलपमेंट: प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, फंक्शन कॉलिंग एंड स्ट्रक्चर्ड आउटपुट्स” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs) आधारित अनुप्रयोगों के विकास, प्रभावी प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, फंक्शन कॉलिंग तथा स्ट्रक्चर्ड आउटपुट्स के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी साझा की।

दिन का समापन हैंड्स-ऑन प्रयोगशाला सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने दिनभर सीखी गई एआई तकनीकों एवं उपकरणों का व्यावहारिक अभ्यास किया। संवादात्मक व्याख्यानों, शोध-आधारित चर्चाओं एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण ने प्रतिभागियों को आगामी सत्रों के लिए मजबूत आधार प्रदान किया तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की आईआईटीएम की प्रतिबद्धता को और सशक्त किया। इस अवसर पर एफडीपी के फैकल्टी समन्वयक डॉ. पंकज वार्ष्णेय तथा सह-समन्वयक डॉ. मंजूर आलम पूरे कार्यक्रम के दौरान उपस्थित रहे और इसके सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन को सुनिश्चित किया। कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से आए संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की, जिससे सार्थक शैक्षणिक संवाद, ज्ञान-विनिमय तथा सहयोगात्मक अधिगम को बढ़ावा मिला।
