समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की एथनॉल मिश्रित ईंधन नीति की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने एथनॉल को मुनाफाखोरी का एक नया नाम बताते हुए आरोप लगाया कि यह सरकार, एथनॉल उत्पादकों और तेल कंपनियों के बीच की एक ऐसी साझेदारी है जो सरकारी स्तर पर मिलावट को बढ़ावा दे रही है।
सपा मुख्यालय द्वारा जारी एक बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार की ओर से अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि एथनॉल के प्रयोग से प्रदूषण घटेगा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होने से आयात बिल में कमी आएगी। हालांकि, सरकार इस बात को स्पष्ट नहीं कर रही है कि इस ईंधन की वजह से वाहनों का माइलेज लगातार गिर रहा है। उन्होंने दावा किया कि एथनॉल के कारण गाड़ियों में जल्दी खराबी आ रही है और उन्हें चालू करने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि कम माइलेज मिलने की वजह से आम जनता को अपनी गाड़ियों में अधिक ईंधन भरवाना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इसके अलावा, एथनॉल युक्त ईंधन के कारण गाड़ियां अक्सर बीच रास्ते में खराब हो रही हैं, जिससे उनके रखरखाव और समय-समय पर होने वाली मरम्मत का खर्च भी काफी बढ़ गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, इस नीति का असर वाहनों की कुल उपयोग अवधि पर भी पड़ रहा है और उनके पुनर्विक्रय मूल्य यानी रिसेल वैल्यू में भी गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि एथनॉल के कारण वाहनों के पुर्जों में जंग लगने और अन्य तकनीकी खराबियां पैदा होने की घटनाएं बढ़ गई हैं।
सपा प्रमुख ने यह भी रेखांकित किया कि पुरानी गाड़ियां एथनॉल मिश्रित ईंधन की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं बनी हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीमा कंपनियां भी अब इस स्थिति का फायदा उठा रही हैं और वाहन खराब होने पर एथनॉल को आधार बनाकर क्लेम खारिज करने के बहाने तलाश लेती हैं। उन्होंने सरकार से तीखा सवाल किया कि वह चंद मुनाफाखोरों के हित के लिए आम जनता का शोषण क्यों कर रही है।
