अंबाला, पांच नवंबर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों की याद में अंबाला छावनी में निर्मित एक स्मारक का बृहस्पतिवार को उद्घाटन किया। शाह ने कहा कि आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक आने वाले दिनों में युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह स्मारक 22 एकड़ भूमि में फैला है और इसमें 22 दीर्घाओं के माध्यम से 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं को प्रदर्शित किया गया है।
शाह ने अंबाला प्रवास के दौरान स्मारक, एक संग्रहालय और 1,260 करोड़ रुपये की लागत वाली 23 किलोमीटर लंबी जलबेहड़ा-शाहाबाद (राष्ट्रीय राजमार्ग-152जी) परियोजना का उद्घाटन किया। शाह ने इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘मैं उस पावन धरती को बार-बार नमन करता हूं, जहां 10 मई को 1857 का स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ था। इस घटना ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी, जिसके बारे में कहा जाता था कि उसका सूरज कभी अस्त नहीं होता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अंग्रेजों से प्रभावित इतिहासकारों और ब्रिटिश विचारधारा से प्रेरित वामपंथी सोच रखने वालों ने 1857 के संघर्ष को महज विद्रोह करार दिया।
अंग्रेजों के नजरिये से यह विद्रोह हो सकता है, लेकिन वीर (वी डी) सावरकर ने सही कहा था कि भारत माता की संतान के लिए 1857 की क्रांति विद्रोह नहीं, बल्कि वास्तविक स्वतंत्रता संग्राम था।’’
शाह ने कहा कि अनगिनत शहीदों के बलिदान के बाद ही देश को आजादी मिली। उन्होंने कहा, ‘‘आज हम मोदी जी के नेतृत्व में जिस विकसित भारत की कल्पना कर रहे हैं, उसकी नींव उन शहीदों के बलिदान पर टिकी है। उनके त्याग की बुनियाद पर हमने पिछले 80 वर्षों में अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया है और आज पूरी दुनिया के सामने गर्व से खड़े हैं।’’
शाह ने नाना साहेब पेशवा, महारानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, अजीमुल्ला खान, बेगम हजरत महल और बहादुर शाह जफर सहित कई अन्य महान योद्धाओं के बलिदान को नमन किया।
उन्होंने अस्सी वर्ष से अधिक आयु के वीर योद्धा बाबू कुंवर सिंह के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने देश की आजादी के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। शाह ने कहा कि कोई भी राष्ट्र तब तक प्रगति नहीं कर सकता, जब तक वह अपनी आजादी का महत्व न समझे, इसके लिए खून बहाने वाले शहीदों का सम्मान न करे और शहीदों के खून से लिखे इतिहास के पन्नों को सुनहरे अक्षरों में दर्ज गौरवगाथा में न बदल दे। शाह ने कहा, आज उसी धरती पर 22 एकड़ में फैला और 594 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 23 दीर्घाओं वाला 1857 की क्रांति का भव्य स्मारक बनाया गया है।
इस जनसभा में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री एवं करनाल के सांसद मनोहर लाल, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अर्चना गुप्ता, हरियाणा के मंत्री एवं अंबाला छावनी के विधायक अनिल विज, विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, भाजपा की हरियाणा प्रभारी स्मृति ईरानी और सह-प्रभारी भोला सिंह सहित कई नेता उपस्थित थे। हरियाणा के मंत्री अनिल विज की ओर इशारा करते हुए शाह ने कहा कि वह उन्हें स्मारक के उद्घाटन समारोह में आमंत्रित करने आए थे। उन्होंने कहा, और आप जानते हैं कि एक बार विज बोलना शुरू कर दें तो उन्हें रोकना मुश्किल होता है।
करीब 45 मिनट तक विज मुझे इस स्मारक के बारे में बताते रहे। शाह ने स्मारक के निर्माण में विज के योगदान की सराहना करते हुए कहा, लेकिन उनके चेहरे पर जो उत्सुकता, ऊर्जा और चमक थी तथा इस स्मारक के प्रति उनका गहरा लगाव था… अनिल विज, जब तक यह स्मारक खड़ा रहेगा, अंबाला की जनता आपको भी हमेशा याद रखेगी। शाह ने कहा कि आधुनिक तकनीक, वर्चुअल गैलरी, रियलिटी तकनीक, होलोग्राफी और इंटरैक्टिव प्रोजेक्शन के माध्यम से अनेक ऐतिहासिक दस्तावेजों को प्रदर्शित करते हुए स्मारक में हरियाणा की सभी कला विधाओं को एक साथ समेटने का शानदार प्रयास किया गया है।
उन्होंने स्मारक की विशेषताओं के बारे में बताते हुए कहा कि इसमें फुलकारी और सरकंडा शिल्प, 2,500 लोगों की क्षमता वाला खुला रंगमंच तथा प्रकाश एवं ध्वनि का ऐसा कार्यक्रम शामिल है, जो दर्शकों को 1857 के दौर में ले जाने का अनुभव कराता है। उन्होंने कहा, यह स्मारक एक ऐसा जीवंत स्थल बन गया है, जो 1857 की क्रांति के गौरव, बलिदान और सम्मान के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध की भावना भी जगाता है। शाह ने कहा, मैं देशभर के युवाओं से आग्रह करना चाहता हूं कि यदि आप समझना चाहते हैं कि आज हम जहां हैं, वहां तक कैसे पहुंचे, तो आपको अंबाला के इस स्मारक में जरूर आना चाहिए और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
