एक ओर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच पिछड़ा हुआ है। तो दूसरी ओर नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन नेवी को मजबूत करने में लगे हुए हैं। खबर है कि किम जोंग उन की मौजूदगी में नॉर्थ कोरियन नेवी ने एक नए युद्धपोत से स्ट्रेटेजिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण कर लिया है। यह मिसाइल टेस्ट उत्तर कोरिया के नए 5000 टन वजनी युद्धपोत चोए हन क्लास डिस्ट्रॉयर से किया गया है। परीक्षण के बाद इस जहाज को आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पूरे परीक्षण को उत्तर कोरिया की समुद्री ताकत बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह परीक्षण उत्तर कोरिया के पश्चिमी तट पर स्थित नमफो शिपयार्ड से किया गया है। इस दौरान किम जोंग उन खुद जहाज पर मौजूद थे और उन्होंने समुद्र से जमीन पर मार करने वाली स्ट्रेटेजिक क्रूज मिसाइल के लॉन्च को देखा।
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के मुताबिक किम जोंग उन ने कहा है कि यह मिसाइल सिस्टम इस नई युद्धपोध की सबसे महत्वपूर्ण क्षमता है। उनका दावा है कि जहाज देश की समुद्री रक्षा का नया प्रतीक बनेगा और दुश्मन के किसी भी खतरे का जवाब देने में सक्षम होगा। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया अक्सर स्ट्रेटेजिक शब्द का इस्तेमाल उन हथियारों के लिए करता है जो संभावित रूप से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हो सकते हैं। अब बात जोईहन युद्धपोत के बारे में करते हैं। यह नया जहाज लगभग 5000 टन वजनी मल्टी रोल डिस्ट्रयर है जिसे उत्तर कोरिया का अब तक का सबसे आधुनिक युद्धपोत माना जा रहा है। इसकी लंबाई लगभग 140 मीटर के आसपास है। जहाज में कई वर्टिकल लॉन्च सिस्टम यानी बीएएलएस लगे हुए हैं। जिनसे अलग-अलग तरह की मिसाइलें दागी जा सकती हैं। बात करें इस युद्धपोत की क्षमताओं के बारे में तो इसमें लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल ल्च करने की क्षमता है। दुश्मन के जहाज और जमीन ठिकानों पर हमला करने की क्षमता है। इसमें आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी है जो फाइटर, जेट, ड्रोन और मिसाइलों को बाहर गिरा सकता है। उन्नत रदार सिस्टम और सेंसर भी लगे हुए हैं जो समुद्र, हवा और जमीन तीनों ओर से आने वाली खतरों का मिसाइलों का जवाब दे सकता है। न्यूज़ एजेंसी एपी के मुताबिक यह जहाज करीब 70-80 मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है।
मिसाइल टेस्ट के दौरान किम जोंग उन ने यह भी संकेत दिए हैं कि उत्तर कोरिया आने वाले सालों में इसी तरह के और भी युद्धपोत बनाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने जहाज निर्माण इंडस्ट्री को निर्देश दिया है कि अगले कुछ सालों में हर साल इस श्रेणी के कम से कम दो युद्धपोत बनाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा है कि उत्तर कोरिया की नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और समुद्र के ऊपर और नीचे दोनों ओर से हमला करने की क्षमता विकसित की जाएगी। चोहन दरअसल एक नई सीरीज का पहला युद्धपोत है जिसे चोहन क्लास डिस्ट्रॉयर कहा जा रहा है। यह नाम उत्तर कोरिया के एक ऐतिहासिक सैन्य नेता चोई हन के नाम पर रखा गया है। इस जहाज को पहली बार अप्रैल 2025 में ल्च किया गया था और अब इसे पूरी तरह से ऑपरेशनल बनाने की दिशा में काम चल रहा है। हालांकि उत्तर कोरिया की नेवी के आधुनिकरण कार्यक्रम को पिछले साल एक बड़ा झटका लगा था।
मई 2025 में जब इसी क्लास के दूसरे युद्धपोथ को लॉन्च किया जा रहा था तब चोंगजन शिपयार्ड में एक हादसा हो गया और जहाज आंशिक रूप से पलट गया। उस समय किम जोंग उन ने इससे गंभीर लापरवाही बताते हुए अधिकारियों की कड़ी आलोचना की। इसके साथ-साथ उन्होंने मिसाइल, परमाणु हथियार और अब नौसेना की ताकत को भी तेजी से बढ़ाया है। वहीं अगर उत्तर कोरिया अपने युद्धपोतों पर परमाणु हथियार ले जाने वाली मिसाइलें तैनात कर देता है तो इससे पूर्वी एशिया में सैन्य संतुलन बदल सकता है। दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका पहले से ही उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर के चिंता में रहते हैं। अगर किम जोंग उन समुद्र में भी परमाणु हमला करने की क्षमता हासिल कर लेते हैं। उसे विकसित कर लेते हैं तो ये क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।