सरकारी मशीनरी के नाकारा होने के कारण देश में धार्मिक आयोजनों में भगदड़ जैसे हादसे रुक नहीं रहे हैं। हादसों ऐसी श्रृंखला में नालंदा मंदिर का हादसा भी जुड़ गया है। नालंदा के शीतला माता मंदिर में पूजा करने के दौरान भगदड़ मच गई और इसमें 9 लोगों की जान चली गई। आठ महिलाओं की भीड़ में दबने से मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक पुरुष ने अस्पताल में दम तोड़ा। चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार को शीतला अष्टमी के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचे थे। वहां मेला भी लगा था। इसी दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज मंगलवार को नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति शामिल हुईं।
दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने कई देशों के छात्रों को डिग्री व मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान दिया गया। राष्ट्रपति की यात्रा की सुरक्षा में 8 जिलों के 2500 जवानों को लगाया गया था, जबकि मंदिर में जुटी 10 हजार की भीड़ के लिए एक भी पुलिस वाले की तैनाती नहीं थी। यह हालत है देश में जिम्मेदार मानी जाने वाली चुनी हुई सरकारों की। अधिकारी इस बात का आकलन ही नहीं कर सके कि इतने बड़े आयोजन में कोई हादसा भी हो सकता है। इसी भारी चूक की वजह से मंदिर स्थल पर पुलिस सुरक्षा का इंतजाम नहीं किया गया। सारी फोर्स राष्ट्रपति की सुरक्षा के इंतजाम में लगा दी गई।
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कुंभ मेले, मंदिर दर्शन, सत्संग, त्योहार और रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन पकड़ने की होड़ जैसी घटनाएं न केवल आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि प्रबंधन की कमी के कारण अक्सर जानलेवा साबित होती रही है। साल-दर-साल मची भगदड़ में सैकड़ों निर्दोष जिंदगियां चली जाती हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। ये हादसे मुख्य रूप से सुरक्षा व्यवस्थाओं की चूक, अपवाहें, संकरी जगहों पर अत्यधिक भीड़ और प्रशासन की लापरवाही के कारण होती हैं। देश के सरकारी तंत्र ने विगत वर्षों में हुए इस तरह के हादसों से कोई सबक नहीं सीखा। यही वजह ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति थम नहीीं रही है। विगत एक दशक में ऐसा शायद ही कोई साल गया होगा, जब भगदड़ में मौतों की दर्दनाक घटनाएं सामने नहीं आई होंगी।
3 मई 2025 को गोवा के श्री लैरे देवी मंदिर के वार्षिक मेले में पूजा-अर्चना के दौरान भगदड़ मची। इसमें छह श्रद्धालुओं की मौत हुई और लगभग 55 लोग घायल हुए। 15 फरवरी 2025 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्रयागराज कुंभ में शामिल होने के लिए ट्रेन पकड़ने की होड़ के चलते मची भगदड़ में 18 यात्रियों की जान गई। 9 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ के संगम क्षेत्र में भगदड़ 30 तीर्थयात्रियों की मौत हुई और 60 लोग घायल हुए। इसी तरह 8 जनवरी 2025 आंध्र प्रदेश के तिरुपति में श्री वेंकटेश्वर मंदिर में छह श्रद्धालुओं की मौत हुई।
इसी तरह 2 जुलाई 2024 उत्तर प्रदेश के हाथरस में संत भोले बाबा (नारायण साकार हरि) की सत्संग के बाद भगदड़ मची। इस घटना में कुल 121 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे थे। यह हादसा सुरक्षा प्रबंधों की कमी के चलते हुआ। 31 मार्च 2023 मध्यप्रदेश के इंदौर में रामनवमी पर ढाई तालाब की बावड़ी की छत गिरने के दौरान भगदड़ मच गई। इस हादसे में 36 तीर्थयात्रियों की मौत हुई और 16 अन्य घायल हुए। भीड़-नियंत्रण में चूक यहां भी जानलेवा साबित हुई। इन हादसों के अलावा विगत वर्षों में कटरा जम्मू में वैष्णो देवी मंदिर, महाराष्ट्र के मंधर देवी, नासिक में कुंभ स्नान, आंध्र प्रदेश के राजामुंद्री, बिहार के पटना में गांधी मैदान, मध्य प्रदेश के दतिया में पुल पर अफवाह फैलने, हरिद्वार में हर-की-पौड़ी घाट पर आयोजित गायत्री महायज्ञ आयोजन, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़, जोधपुर में चामुंडा देवी मंदिर में हिमाचल के नैना देवी में भगदड़ के दौरान सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी।
नालंदा में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अन्य हादसों की तरह वही जांच कमेटी बना दी गई। बिहार सरकार की तरफ से मृतकों के परिजनों को सांत्वना राशि की घोषणा कर दी गई। राजनीतिक दलों के नेताओं की तरफ से औपचारिकता निभानते हुए घड़ियाली आसूं बहाए गए। किन्तु एक भी जिम्मेदार अफसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। अन्य हादसों की तरह इस हादसे में भी एक भी अफसर को जेल नहीं होगी। किसी का भी बांल बांका नहीं होगा, होगा भी तो सिर्फ दिखावे के लिए छोटे कर्मचारी अधिकारियों पर गाज घटना की गाज गिर सकती है। देश में परंपरा रही है कि बड़े अफसर हर बार बच निकलते हैं। इस लिहाज से बिहार की इस घटना इससे अलग नहीं है। सरकारों ने ना पहले हुए ऐसे हादसों से कोई सबक सीखा था ना ही बिहार हादसे से सीखेंगे। ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति देश में जारी रहेगी। ऐसे हादसों में सरकारी कुप्रबंधन की वजह से आम लोगों की मौत होती रहेगी और सरकारें तमाशबीन बनी रहेंगी।
– योगेन्द्र योगी
(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
