क्या आप ने कभी अचार का पानी यानी पिकल जूस पिया है? फिटनेस लवर्स के बीच यह काफी ट्रेंडी बना हुआ है। गौरतलब है कि पिकल जूस को हमारी दादी-नानी पेट की गड़बड़ी, कमजोरी या गर्मी से राहत के लिए घरेलू नुस्खे की तरह इस्तेमाल करती थीं। अब मॉर्डन हेल्थ ट्रेंड के रुप में यह वापस आ रहा है। आपको बता दें कि, पिकल जूस में नमक, मसाले और फर्मेंटेशन से बने प्रोबायोटिक गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। इस दौरान सोशल मीडिया पर भी पिकल जूस पीने के फायदे को लेकर कोई दावे किए जा रहे हैं, कोई इसे मसल क्रैम्प्स का इलाज बता रहा है, तो कोई डाइजेशन सुधारने का आसान तरीका। आइए आपको इसके फायदे बताते हैं।
Pickle Juice पीने के फायदे क्या हैं?
– पिकल जूस को पर्याप्त मात्रा में पीने से कई फायदे मिलते हैं। इसमें मौजूद सोडियम और पोटैशियम शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित रखते हैं, जिससे कमजोरी और चक्कर आने की समस्या कम हो जाती है।
– इतना ही नहीं, यह डाइजेशन को बेहतर बनाता है और आंतों के गुड बैक्टीरिया को सपोर्ट करता है।
– एक्सरसाइज के बाद मसल क्रैम्प्स में भी पिकल जूस मददगार माना जाता है।
– हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, गर्मी या डायरिया के बाद शरीर में नमक की कमी को पूरा करने में पिकल जूस उपयोगी हो सकता है।
कैसे बनाएं पिकल जूस
घर पर पिकल जूस तैयार करना बहुत सरल है और इसके लिए किसी जटिल विधि की जरूरत नहीं होती। इसके लिए खीरा, गाजर, नींबू या कच्चा आम लें। इन सभी को अच्छी तरह साफ करके टुकड़ों में काट लें। फिर सब्जियों को कांच के जार में डालकर ऊपर से उबला हुआ और ठंडा पानी डालें। इसमें स्वाद के अनुसार सेंधा नमक, थोड़ी हल्दी, सरसों के दाने और सिरका या नींबू का रस मिलाएं। जार को ढककर 4–5 दिनों तक धूप में रखें। जब सब्जियां अच्छे से फर्मेंट हो जाएं, तो वही पानी नेचुरल पिकल जूस बन जाता है। घर पर बना पिकल जूस बाजार में मिलने वाले जूस की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और सेहतमंद होता है।
इस बात का ध्यान रखें कि व्यक्ति को दिन में अधिकतम 30-50 मिलीलीटर से ज्यादा पिकल जूस नहीं लेना चाहिए। अधिक सेवन करने से हाई ब्लड प्रेशर, एसिडिटी और किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, क्योंकि इसमें सोडियम की मात्रा अधिक होती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
